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#हिंदीहैंहमः: हमारी मातृभाषा हिंदी हमारी पहचान है... इससे दूर न जाएं, शान से अपनाएं
Fri, 21 Aug 2020 11:09 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 21 Aug 2020 11:09 AM IST
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
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मातृभाषा से दिल का रिश्ता रखने वालों का अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है। इस अभियान के तहत वीरवार को शहर के कुछ अधिकारियों से चर्चा की गई।
अधिकारियों ने बताया कि जब किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का ख्याल मन में आता था तो अंग्रेजी हमेशा आड़े आती थी, लेकिन हम अपनी जड़ों से जुड़े रहे। वैकल्पिक भाषा को सिर्फ विकल्प के रूप में रखा। मातृभाषा हमारी जड़ में है, हम इससे जुड़ें रहेंगे तो हमारी नींव कभी कमजोर नहीं होगी।
हिंदी ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया : केके यादव
नगर निगम कमिश्नर केके यादव का कहना है कि जब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की तो दोस्तों ने कहा कि अंग्रेजी नहीं आती तो कुछ भी संभव नहीं, क्योंकि सभी कामकाज तो अंग्रेजी में ही होते हैं इसलिए जो तैयारी करना अंग्रेजी में करना। थोड़ा प्रयास किया कि अंग्रेजी में तैयारी की जाए, लेकिन मन ही नहीं लगा।
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फिर जब हिंदी में लोकसेवा आयोग की तैयारी की तो दोस्तों की बातें सुनकर थोड़ा मन डगमगाया, लेकिन मातृभाषा ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। पीसीएस की तैयारी हो या लोकसेवा आयोग की परीक्षा। हिंदी के साथ आत्मविश्वास लबालब रहा। मेरा यकीन मानिए जब मातृभाषा मजबूत होगी तो वैकल्पिक भाषाएं स्वत: आने लगेंगी, लेकिन शर्त यही है कि वैकल्पिक भाषा का प्रयोग सिर्फ विकल्प के रूप में हो। मातृभाषा से सदैव जुड़े रहें।
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अधिकारियों ने बताया कि जब किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का ख्याल मन में आता था तो अंग्रेजी हमेशा आड़े आती थी, लेकिन हम अपनी जड़ों से जुड़े रहे। वैकल्पिक भाषा को सिर्फ विकल्प के रूप में रखा। मातृभाषा हमारी जड़ में है, हम इससे जुड़ें रहेंगे तो हमारी नींव कभी कमजोर नहीं होगी।
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हिंदी ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया : केके यादव
नगर निगम कमिश्नर केके यादव का कहना है कि जब प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की तो दोस्तों ने कहा कि अंग्रेजी नहीं आती तो कुछ भी संभव नहीं, क्योंकि सभी कामकाज तो अंग्रेजी में ही होते हैं इसलिए जो तैयारी करना अंग्रेजी में करना। थोड़ा प्रयास किया कि अंग्रेजी में तैयारी की जाए, लेकिन मन ही नहीं लगा।
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फिर जब हिंदी में लोकसेवा आयोग की तैयारी की तो दोस्तों की बातें सुनकर थोड़ा मन डगमगाया, लेकिन मातृभाषा ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। पीसीएस की तैयारी हो या लोकसेवा आयोग की परीक्षा। हिंदी के साथ आत्मविश्वास लबालब रहा। मेरा यकीन मानिए जब मातृभाषा मजबूत होगी तो वैकल्पिक भाषाएं स्वत: आने लगेंगी, लेकिन शर्त यही है कि वैकल्पिक भाषा का प्रयोग सिर्फ विकल्प के रूप में हो। मातृभाषा से सदैव जुड़े रहें।
मातृभाषा हमारी जड़ है, इससे हमेशा जुड़े रहें : संजय झा
सेक्रेटरी पर्सोनल संजय झा का कहना है कि बिहार में मैथली या भोजपुरी भाषा का प्रभाव ज्यादा है, लेकिन हिंदी भी लोग बेहतर तरीके से समझते और बोलते हैं। बेगूसराय स्थित एक गांव के सरकारी स्कूल में जब मेरी शिक्षा प्रारंभ हुई तो हिंदी या स्थानीय भाषा के अलावा कोई विकल्प नहीं था। जब बड़े हुए तो कानपुर आईआईटी से होते हुए दिल्ली आईआईटी तक का सफर तय किया। तब पता चला कि अंग्रेजी भाषा का ज्ञान अनिवार्य है, लेकिन मातृभाषा ने इतना आत्मविश्वास दिलाया था कि कभी अंग्रेजी भाषा के सामने कमजोर नहीं पड़े। कक्षा में अंग्रेजी में पढ़ते और उसे हॉस्टल में आकर अपनी मातृभाषा में अनुवाद करते थे। मेरा यही कहना है कि कभी अपनी मातृभाषा को न छोड़ें। यह हमारी जड़ है और जड़ों से हमेशा जुड़े रहें।
केवल मातृभाषा ही नहीं हिंदी हमारा मान-सम्मान : संजय बेनीवाल
चंडीगढ़ के डीजीपी संजय बेनीवाल का कहना है कि हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं बल्कि हम सभी भारतवासियों का मान-सम्मान और हमारी पहचान है। हिंदी का इस्तेमाल हम लोगों को ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए, क्योंकि यह हम लोगों के लिए गर्व और गौरव की बात है। मैं यह नहीं कहता कि हिंदी भाषा के अलावा अन्य भाषा का ज्ञान नहीं होना चाहिए, लेकिन हिंदी भाषा का स्थान जो हमारी रोजाना जिंदगी में होना चाहिए, वह जिम्मेदारी मुझ पर भी है। युवा पीढ़ी में भी इसके प्रति जागरुकता होनी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि अब आप लोग शुभरात्रि और सुप्रभात ही कहें न कि कुछ और।
हिंदी लिखें, हिंदी बोलें.. बच्चों को करें जागरूक : नीलांबरी जगदले
एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले का कहना है कि सरकारी कामकाज में ज्यादातर अंग्रेजी का ही प्रयोग होता है लेकिन घर पहुंचकर बेटी के साथ हिंदी भाषा में ही बात करती हूं। कोशिश रहती है कि घर पर अपनी मातृभाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करूं। शिक्षा बेशक अंग्रेजी में हो, लेकिन संस्कार तो हिंदी से ही मिलते हैं। इसलिए बचपन से ही संस्कारों को समेटे हुए हूं। हिंदी भाषा का प्रयोग सभी भारतीयों को प्राथमिकता के साथ करना चाहिए। हिंदी हमारी मातृभाषा है इसको कभी भी भूलना नहीं चाहिए। हिंदी लिखें, हिंदी बोलें और बच्चों को भी हिंदी के प्रति जागरूक करें। अपनी संस्कृति और धरोहर को कायम रखने में योगदान दें।
केवल मातृभाषा ही नहीं हिंदी हमारा मान-सम्मान : संजय बेनीवाल
चंडीगढ़ के डीजीपी संजय बेनीवाल का कहना है कि हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं बल्कि हम सभी भारतवासियों का मान-सम्मान और हमारी पहचान है। हिंदी का इस्तेमाल हम लोगों को ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए, क्योंकि यह हम लोगों के लिए गर्व और गौरव की बात है। मैं यह नहीं कहता कि हिंदी भाषा के अलावा अन्य भाषा का ज्ञान नहीं होना चाहिए, लेकिन हिंदी भाषा का स्थान जो हमारी रोजाना जिंदगी में होना चाहिए, वह जिम्मेदारी मुझ पर भी है। युवा पीढ़ी में भी इसके प्रति जागरुकता होनी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि अब आप लोग शुभरात्रि और सुप्रभात ही कहें न कि कुछ और।
हिंदी लिखें, हिंदी बोलें.. बच्चों को करें जागरूक : नीलांबरी जगदले
एसएसपी नीलांबरी विजय जगदले का कहना है कि सरकारी कामकाज में ज्यादातर अंग्रेजी का ही प्रयोग होता है लेकिन घर पहुंचकर बेटी के साथ हिंदी भाषा में ही बात करती हूं। कोशिश रहती है कि घर पर अपनी मातृभाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करूं। शिक्षा बेशक अंग्रेजी में हो, लेकिन संस्कार तो हिंदी से ही मिलते हैं। इसलिए बचपन से ही संस्कारों को समेटे हुए हूं। हिंदी भाषा का प्रयोग सभी भारतीयों को प्राथमिकता के साथ करना चाहिए। हिंदी हमारी मातृभाषा है इसको कभी भी भूलना नहीं चाहिए। हिंदी लिखें, हिंदी बोलें और बच्चों को भी हिंदी के प्रति जागरूक करें। अपनी संस्कृति और धरोहर को कायम रखने में योगदान दें।