{"_id":"67da57a864032e6ca80b71a2","slug":"highcourt-says-it-is-not-mandatory-for-the-cemetery-to-be-near-muslim-population-2025-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Highcourt: कब्रिस्तान मुस्लिम आबादी के निकट होना अनिवार्य नहीं, याचिका पर डीसी लेंगे निर्णय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Highcourt: कब्रिस्तान मुस्लिम आबादी के निकट होना अनिवार्य नहीं, याचिका पर डीसी लेंगे निर्णय
Wed, 19 Mar 2025 01:06 PM IST
निवेदिता वर्मा
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 19 Mar 2025 01:06 PM IST
सार
पानीपत के मुसलमान याची ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके गांव से कब्रिस्तान दूर है। बीच में हाईवे है। इस पर प्रशासन ने जवाब दिया था कि गांव से कुछ ही दूरी पर अंडरपास है।
विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कब्रिस्तान को मुस्लिम आबादी से दूर बताते हुए दाखिल की गई एक जनहित याचिका का पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची ऐसा कोई कानूनी प्रावधान दर्शाने में नाकाम रहा है जो यह अनिवार्य करता हो कि कब्रिस्तान मुस्लिम आबादी के निकट होना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने समालखा म्यूनिसिपल कमेटी व पानीपत के डीसी को याची द्वारा सौंपे मांगपत्र पर निर्णय लेने का आदेश दिया।
याचिका दाखिल करते हुए रियाजुद्दीन व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि वे पानीपत के भापुरा गांव के निवासी हैं और मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं। याचिकाकर्ताओं के गांव से कब्रिस्तान कुछ दूरी पर मौजूद है। याची ने बताया कि मुस्लिम आबादी दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे के एक ओर है और कब्रिस्तान दूसरी ओर है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि कब्रिस्तान की व्यवस्था वार्ड नंबर 2 और 3 के निकट की जाए।
इस पर हरियाणा सरकार ने अपने जवाब में बताया कि कब्रिस्तान आबादी से केवल 2 किलोमीटर की दूरी पर है। जहां तक इसके एक्सप्रेस-वे के दूसरी ओर होने की बात है, गांव से कुछ ही दूरी पर अंडर पास मौजूद हैं। इस आधार पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से याचिका को खारिज करने की अपील की।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकील किसी भी प्रावधान (वैधानिक या अन्यथा) को दर्शाने में असमर्थ रहे, जो यह अनिवार्य बनाता है कि कब्रिस्तान का निर्माण, कब्रिस्तान का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के निवास स्थान के निकट होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले के गुण दोष में नहीं जाना चाहते। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उनकी मांग को लेकर समालखा म्यूनिसिपल कमेटी और पानीपत के डीसी को 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के साथ मांगपत्र सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के मांगपत्र पर 60 दिन में निर्णय लेने का आदेश भी दिया है।
विज्ञापन
याचिका दाखिल करते हुए रियाजुद्दीन व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि वे पानीपत के भापुरा गांव के निवासी हैं और मुस्लिम समुदाय से संबंधित हैं। याचिकाकर्ताओं के गांव से कब्रिस्तान कुछ दूरी पर मौजूद है। याची ने बताया कि मुस्लिम आबादी दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे के एक ओर है और कब्रिस्तान दूसरी ओर है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की थी कि कब्रिस्तान की व्यवस्था वार्ड नंबर 2 और 3 के निकट की जाए।
विज्ञापन
इस पर हरियाणा सरकार ने अपने जवाब में बताया कि कब्रिस्तान आबादी से केवल 2 किलोमीटर की दूरी पर है। जहां तक इसके एक्सप्रेस-वे के दूसरी ओर होने की बात है, गांव से कुछ ही दूरी पर अंडर पास मौजूद हैं। इस आधार पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से याचिका को खारिज करने की अपील की।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकील किसी भी प्रावधान (वैधानिक या अन्यथा) को दर्शाने में असमर्थ रहे, जो यह अनिवार्य बनाता है कि कब्रिस्तान का निर्माण, कब्रिस्तान का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के निवास स्थान के निकट होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले के गुण दोष में नहीं जाना चाहते। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उनकी मांग को लेकर समालखा म्यूनिसिपल कमेटी और पानीपत के डीसी को 30 दिन के भीतर हाईकोर्ट के आदेश की प्रति के साथ मांगपत्र सौंपने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के मांगपत्र पर 60 दिन में निर्णय लेने का आदेश भी दिया है।