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हिरासत में मौत की घटनाओं पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 17 Jan 2016 04:20 PM IST
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अमृतसर जेल में हिरासत के दौरान पिटाई से राजू नामक युवक की मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
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अदालत ने ऐसी घटना के पीछे जिला प्रशासन, पुलिस और जेल अफसरों समेत डॉक्टरों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना है। हाईकोर्ट ने डीजीपी को उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि हिरासत में मौत एक संगीन अपराध है। ताजा मामले में सरकारी अमले में शामिल लोगों ने एकदूसरे को बचाने की पूरी कोशिश की है।
जस्टिस फतेहदीप सिंह की एकल बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि हिरासत में मौत के मामलों में पंजाब देश में सबसे ऊपर है। प्रदेश का सरकारी अमला इसे कम करने के बजाय और बढ़ावा दे रहा है। राजू की मौत में जहां पुलिस ने सही जांच नहीं की, वहीं न्यायिक जांच में सरकारी स्तर से सहयोग नहीं मिला।
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मामले में न जेल स्टाफ कुछ बोलने को तैयार हुआ और न ही राजू के अस्पताल में इलाज का रिकार्ड पेश किया गया। जेल अफसरों की जिम्मेदारी कैदियों और बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित बनाने की है, लेकिन यहां राजू की सुरक्षा तय करना तो दूर, उसे चोटें किन परिस्थितियों में आईं, इसका भी खुलासा नहीं किया जा सका।
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यहां तक कि हालत गंभीर होने के बावजूद जेल के मेडिकल अफसर ने राजू को इमरजेंसी वार्ड में भेजने के बजाय ओपीडी में भेज दिया। चोटों के कारण उसका दिमाग निष्क्रिय हो गया और इसी वजह से उसकी मौत हो गई।
मामले में अधिकारियों व डॉक्टरों की मिलीभगत बताते हुए बेंच ने डीजीपी को कत्ल की धारा के तहत उन सभी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है, जिनकी भूमिका को अमृतसर के सेशन जज ने संदिग्ध बताया था।
साथ ही यह भी कहा है कि मामले की जांच के दौरान उन पर भी ऐसी ही कार्रवाई की जाए, जिनके नाम सामने नहीं आ सके। बेंच ने कहा है कि कत्ल की एफआईआर की जांच एडीजीपी रैंक के पुलिस अधिकारी से कराई जाए और डीआईजी बॉर्डर रेंज अमृतसर समेत ऐसे अधिकारियों की टीम बनाई जाए, जिनकी छवि स्वच्छ हो।
जेल स्टाफ और अधिकारियों का तबादला करने के निर्देश
बेंच ने कहा है कि अमृतसर जेल वाली घटना के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों और स्टाफ का तबादला किया जाए, ताकि वे जांच प्रभावित न कर सकें। साथ ही एफआईआर की जांच और मामले का ट्रायल कोर्ट में चालान पेश करने तक जांच टीम के अधिकारियों का तबादला अमृतसर से बाहर न किया जाए।
अदालत ने मृतक के समूचे परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित बनाने का आदेश भी दिया है। इसके अलावा अदालत ने मृतक के परिवार को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह है मामला
अमृतसर के मकबूलपुरा थाने में राजू नामक युवक के खिलाफ 16 अक्तूबर 2013 को एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज किया गया था। उसे न्यायिक हिरासत में अमृतसर जेल भेजा गया था। 4 नवंबर को पुलिस उसे गुरुनानक देव अस्पताल लेकर पहुंची थी, जहां 6 नवंबर को उसकी मौत हो गई थी।