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Highcourt: धार्मिक संस्थानों को दी भूमि व उसकी आय को लेकर हाई पावर कमेटी बनाएं हरियाणा और पंजाब

Thu, 29 Feb 2024 03:35 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 29 Feb 2024 03:35 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब के राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि धार्मिक संस्थानों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए हाई पावर कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी देखे कि धार्मिक संस्थानों को कितनी ग्रांट दी गई है, ग्रांट के लिए क्या शर्त थी और क्या शर्त का उल्लंघन किया गया। शर्त के उल्लंघन पर क्या ग्रांट रद्द की गई है।

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High Court order punjab haryana to audit use of land given to temples and gurdwaras and income derived there
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मंदिरों और गुरुद्वारों को दी गई भूमि के उपयोग व उससे आने वाली आय का ऑडिट करने और इनको लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का हरियाणा व पंजाब सरकार को आदेश दिया है। इसके लिए हाईकोर्ट ने दोनों को हाई पावर कमेटी बनाने का निर्देश दिया है जिसे 4 माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपनी होगी।
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पटियाला के सत्यनारायण मंदिर की ओर से याचिका दाखिल करते हुए उनके पास मौजूद भूमि का मालिकाना हक उनके नाम करने की अपील की गई थी। इस मामले में राजस्व रिकार्ड में मालिकाना हक नगर पंचायत का व खेती मंदिर की दर्ज थी। मंदिर की दलील थी कि यह भूमि उनके पास 1950 से पहले से मौजूद है। 
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हाईकोर्ट ने मंदिर की याचिका को खारिज कर दिया लेकिन याचिका का दायरा बढ़ा दिया। हाईकोर्ट ने हरियाणा व पंजाब के राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि धार्मिक संस्थानों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए हाई पावर कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी देखे कि धार्मिक संस्थानों को कितनी ग्रांट दी गई है, ग्रांट के लिए क्या शर्त थी और क्या शर्त का उल्लंघन किया गया। शर्त के उल्लंघन पर क्या ग्रांट रद्द की गई है। क्या अलॉट की गई भूमि पर खेती प्रबंधन की उचित व्यवस्था है और क्या इस भूमि से प्राप्त होने वाली आय का रेगुलर ऑडिट किया जा रहा है। इसके साथ ही मंदिर व गुरुद्वारों में प्रबंधक, पुजारी व ग्रंथी की नियुक्ति के लिए उचित व्यवस्था मौजूद है। हाईकोर्ट ने इन सभी बिंदुओं को लेकर दोनों राज्यों को चार माह में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
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