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पूर्व सैन्यकर्मी को विकलांगता पेंशन से इन्कार: HC ने केंद्र को फटकारा, कहा-पेंशन कोई दान नहीं है

Mon, 27 Jan 2025 10:55 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 27 Jan 2025 10:55 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए सूबेदार अनोख सिंह की विकलांगता को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर विकलांगता पेंशन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। 

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High Court on decision of Armed Forces Tribunal to grant disability pension to former military officer
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैन्य अधिकारी को विकलांगता पेंशन देने के आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि सैनिक सरहद की रखवाली कर रहे हैं तभी हम गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं।

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केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए सूबेदार अनोख सिंह की विकलांगता को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर विकलांगता पेंशन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। 
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कोर्ट ने कहा कि 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, जो अनुशासित लोग हैं, अपनी वैध मांगों को लेकर हाईकोर्ट और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण का रुख कर रहे हैं। एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते, सरकार का यह कर्तव्य है कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अधिकारों को लागू करे और राहत प्रदान करे। 
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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी सूबेदार अनोख सिंह को विकलांगता पेंशन न देने के मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम 76वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं, स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस का पूरा जश्न हमारी सेना के कठिन परिश्रम और सीमाओं पर उनके साहसिक कार्यों के कारण ही संभव होता है। केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों को उनकी स्थिति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। पेंशन कोई दान या अनुग्रह नहीं है, बल्कि यह उन सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों का अधिकार है, जिन्होंने सेवा के दौरान विकलांगता का सामना किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार, केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों को सभी पात्र पेंशनभोगियों को पेंशन बढ़ाने का लाभ देना चाहिए था। लेकिन सरकार के उदासीन रवैये के कारण पेंशनभोगियों को बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।

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