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Punjab: पराली आधारित ईंधन की शर्त पर सुनवाई, हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बनाया पक्ष
Fri, 02 Aug 2024 10:50 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 02 Aug 2024 10:50 AM IST
सार
पंजाब ब्रिकक्लिन ऑनर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार वे भट्ठों में कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच पंजाब सरकार ने अधिसूचना जारी कर ईंट भट्ठों के लिए कुल ईंधन का 20 प्रतिशत पराली आधारित अनिवार्य कर दिया।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में ईंट भट्ठों के लिए कुल ईंधन का 20 प्रतिशत पराली आधारित अनिवार्य करने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्ष बना लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पंजाब ब्रिकक्लिन ऑनर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार वे भट्ठों में कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच पंजाब सरकार ने अधिसूचना जारी कर ईंट भट्ठों के लिए कुल ईंधन का 20 प्रतिशत पराली आधारित अनिवार्य कर दिया। याचिका में बताया गया कि इससे एसोसिएशन के सदस्यों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। पराली आधारित ईंधन कोयले की तुलना में पांच गुना ज्यादा महंगा है और यह सीजनल ही उपलब्ध होता है। ऐसे में पंजाब सरकार के इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ताओं को राहत दी जानी चाहिए।
सरकार आदेश का पालन न करने वाले भट्ठों पर कार्रवाई भी कर रही है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद ईंट भट्ठों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें बंद करने पर रोक लगा दी थी। अब इस मामले में एसोसिएशन ने अर्जी दाखिल करते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्ष बनाने की मांग की थी। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने बोर्ड को पक्ष बना लिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए पंजाब ब्रिकक्लिन ऑनर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार वे भट्ठों में कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच पंजाब सरकार ने अधिसूचना जारी कर ईंट भट्ठों के लिए कुल ईंधन का 20 प्रतिशत पराली आधारित अनिवार्य कर दिया। याचिका में बताया गया कि इससे एसोसिएशन के सदस्यों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। पराली आधारित ईंधन कोयले की तुलना में पांच गुना ज्यादा महंगा है और यह सीजनल ही उपलब्ध होता है। ऐसे में पंजाब सरकार के इस आदेश को रद्द किया जाना चाहिए और याचिकाकर्ताओं को राहत दी जानी चाहिए।
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सरकार आदेश का पालन न करने वाले भट्ठों पर कार्रवाई भी कर रही है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद ईंट भट्ठों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें बंद करने पर रोक लगा दी थी। अब इस मामले में एसोसिएशन ने अर्जी दाखिल करते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पक्ष बनाने की मांग की थी। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने बोर्ड को पक्ष बना लिया है।
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