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Highcourt: एसएसपी के पत्र पर यूएपीए-पीएमएलए के तहत कार्रवाई नहीं शुरू कर सकते, पंजाब सरकार को आदेश
Wed, 20 Dec 2023 08:13 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 20 Dec 2023 08:13 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ये दोनों विशेष अधिनियम हैं और एसएसपी द्वारा पत्र लिखकर इन्हें लागू नहीं किया जा सकता। इन अधिनियमों को लागू करने की गुंजाइश का पता लगाए बिना ही इन्हें लागू कर दिया गया था।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बर्खास्त पुलिसकर्मियों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि केवल एसएसपी के पत्र के आधार पर गैर कानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) को आपराधिक मामले में लागू नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि एसएसपी ने इन दोनों विशेष अधिनियमों को लागू करने की गुंजाइश का पता लगाए बिना ही इसके लिए सिफारिश कर दी जो गलत है। इन टिप्पणियों के साथ ही याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों की बहाली पर विचार करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है।
मानसा निवासी ने लगाई थी याचिका
मानसा निवासी बर्खास्त पुलिसकर्मी हरमीत लाल व अन्य की ओर से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि 2011 में उनके खिलाफ आईपीसी की कुछ धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम भी जोड़े गए। याचिकाकर्ताओं पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने नक्सलियों को हथियार और गोला-बारूद बेचा है।
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पंजाब पुलिस ने याचिकाकर्ता और अन्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई भी शुरू की गई और परिणामस्वरूप उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं को 2019 में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया और ऐसे में उन्होंने बहाली के लिए अधिकारियों से अपील की लेकिन उनकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने नौकरी की बहाली के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
विशेष अधिनियम हैं दोनों
हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ये दोनों विशेष अधिनियम हैं और एसएसपी द्वारा पत्र लिखकर इन्हें लागू नहीं किया जा सकता। इन अधिनियमों को लागू करने की गुंजाइश का पता लगाए बिना ही इन्हें लागू कर दिया गया था। विशेष अधिनियमों के तहत आरोप सत्र न्यायाधीश द्वारा हटा दिए गए और ट्रायल कोर्ट ने 2019 में मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। इसके साथ ही समान आरोप वाले लोगों को अदालत द्वारा बरी करने पर बहाल कर दिया गया था लेकिन याचिकाकर्ताओं को नहीं किया गया। कुछ अन्य समान लोगों की ट्रायल के दौरान मौत होने पर उनके परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन का लाभ भी दिया गया। उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर हाईकोर्ट ने अब याचिकाकर्ताओं के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश पारित होने के तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई का पंजाब सरकार को आदेश दिया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि एसएसपी ने इन दोनों विशेष अधिनियमों को लागू करने की गुंजाइश का पता लगाए बिना ही इसके लिए सिफारिश कर दी जो गलत है। इन टिप्पणियों के साथ ही याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों की बहाली पर विचार करने का पंजाब सरकार को आदेश दिया है।
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मानसा निवासी ने लगाई थी याचिका
मानसा निवासी बर्खास्त पुलिसकर्मी हरमीत लाल व अन्य की ओर से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया गया कि 2011 में उनके खिलाफ आईपीसी की कुछ धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम भी जोड़े गए। याचिकाकर्ताओं पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने नक्सलियों को हथियार और गोला-बारूद बेचा है।
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पंजाब पुलिस ने याचिकाकर्ता और अन्य के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई भी शुरू की गई और परिणामस्वरूप उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं को 2019 में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया और ऐसे में उन्होंने बहाली के लिए अधिकारियों से अपील की लेकिन उनकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने नौकरी की बहाली के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई।
विशेष अधिनियम हैं दोनों
हाईकोर्ट ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ये दोनों विशेष अधिनियम हैं और एसएसपी द्वारा पत्र लिखकर इन्हें लागू नहीं किया जा सकता। इन अधिनियमों को लागू करने की गुंजाइश का पता लगाए बिना ही इन्हें लागू कर दिया गया था। विशेष अधिनियमों के तहत आरोप सत्र न्यायाधीश द्वारा हटा दिए गए और ट्रायल कोर्ट ने 2019 में मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया। इसके साथ ही समान आरोप वाले लोगों को अदालत द्वारा बरी करने पर बहाल कर दिया गया था लेकिन याचिकाकर्ताओं को नहीं किया गया। कुछ अन्य समान लोगों की ट्रायल के दौरान मौत होने पर उनके परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन का लाभ भी दिया गया। उपरोक्त तथ्यों के मद्देनजर हाईकोर्ट ने अब याचिकाकर्ताओं के मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश पारित होने के तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई का पंजाब सरकार को आदेश दिया है।