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Chandigarh News: डॉक्टर के उज्ज्वल भविष्य को खतरे में डाला, एनबीईएमएस पर 25 हजार रुपये जुर्माना
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-मेडिकल एजुकेशन के लिए प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करती है एनबीईएमएस
-ज्वॉइनिंग होने के बावजूद सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट न देने के कारण प्रवेश से किया था इन्कार
-समान परिस्थितियों के एक अन्य मामले में आवेदक को पढ़ाई जारी रखने की दी थी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस (एनबीईएमएस) को डॉक्टर के उज्ज्वल भविष्य को खतरे में डालने पर फटकार लगाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बोर्ड पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए राशि याचिकाकर्ता को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही बोर्ड के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है जिसके तहत याची को सुपर स्पेशिएलिटी पाठ्यक्रम में प्रवेश से इन्कार कर दिया गया था। याचिका दाखिल करते हुए डॉक्टर जितेंद्र ने बताया था कि उनका एडमिशन रोहतक के हॉली हार्ट सुपर स्पेशलिटी एंड ट्रॉमा सेंटर में हुआ था। ज्वाॅइनिंग के बाद उसे प्रवेश देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया गया कि उसने सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट नहीं दी थी। याची ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी कोर्स में दाखिले के लिए जारी बुलेटिन में यह अनिवार्य शर्त नहीं थी। इसके साथ ही प्रवेश देने के बाद इस प्रकार कैसे दावा खारिज किया जा सकता है। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी जैसी समान परिस्थितियों में डाॅक्टर विक्रांत को कोर्स जारी रखने की एनबीईएमएस ने अनुमति दी थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एनबीईएमएस का रवैया मनमाना और भेदभावपूर्ण है। जो युवा अपने कॅरिअर की दहलीज पर हैं और अपना सपना पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत कर रहे हैं उन्हें बोर्ड का रवैया हतोत्साहित करेगा। ऐसे में बोर्ड अधिकारियों की इस तरह की प्रथा पर अंकुश लगाने की जरूरत है। इस मामले में बोर्ड ने याचिकाकर्ता के उज्ज्वल शैक्षणिक करियर को खतरे में डालने का प्रयास किया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने बोर्ड पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची को सौंपने का आदेश दिया है।
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-ज्वॉइनिंग होने के बावजूद सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट न देने के कारण प्रवेश से किया था इन्कार
-समान परिस्थितियों के एक अन्य मामले में आवेदक को पढ़ाई जारी रखने की दी थी अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस (एनबीईएमएस) को डॉक्टर के उज्ज्वल भविष्य को खतरे में डालने पर फटकार लगाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बोर्ड पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए राशि याचिकाकर्ता को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही बोर्ड के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है जिसके तहत याची को सुपर स्पेशिएलिटी पाठ्यक्रम में प्रवेश से इन्कार कर दिया गया था। याचिका दाखिल करते हुए डॉक्टर जितेंद्र ने बताया था कि उनका एडमिशन रोहतक के हॉली हार्ट सुपर स्पेशलिटी एंड ट्रॉमा सेंटर में हुआ था। ज्वाॅइनिंग के बाद उसे प्रवेश देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया गया कि उसने सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट नहीं दी थी। याची ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी कोर्स में दाखिले के लिए जारी बुलेटिन में यह अनिवार्य शर्त नहीं थी। इसके साथ ही प्रवेश देने के बाद इस प्रकार कैसे दावा खारिज किया जा सकता है। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि उसकी जैसी समान परिस्थितियों में डाॅक्टर विक्रांत को कोर्स जारी रखने की एनबीईएमएस ने अनुमति दी थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि एनबीईएमएस का रवैया मनमाना और भेदभावपूर्ण है। जो युवा अपने कॅरिअर की दहलीज पर हैं और अपना सपना पूरा करने के लिए जी जान से मेहनत कर रहे हैं उन्हें बोर्ड का रवैया हतोत्साहित करेगा। ऐसे में बोर्ड अधिकारियों की इस तरह की प्रथा पर अंकुश लगाने की जरूरत है। इस मामले में बोर्ड ने याचिकाकर्ता के उज्ज्वल शैक्षणिक करियर को खतरे में डालने का प्रयास किया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने बोर्ड पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि याची को सौंपने का आदेश दिया है।