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सड़क पर पैदल चलने वाले सुरक्षित क्यों नहीं, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 05 Aug 2017 10:05 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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सड़कों पर दुर्घटनाओं के चलते पैदल और साइकिल सवारों की मौत के बढ़ते आंकड़ों पर चिंता जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और यूटी प्रशासन से जवाब- तलब किया है।
मौत के बढ़ रहे आंकड़े पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि एक ओर प्रदूषण कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तो दूसरी ओर इस प्रकार के आंकड़े सामने आ रहे हैं। इस प्रकार की स्थिति प्रदूषण को कम करने केलक्ष्य को पूरा करने के लिए आदर्श नहीं है।
अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को बताया जाए कि सड़कों पर साइकिल चालकों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर चंडीगढ़, लुधियाना, बठिंडा, मोहाली और गुड़गांव में इसके लिए क्या किया जा रहा है।
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इन शहरों में काफी संख्या में वाहन हैं और वहां पर पैदल चलने और साइक्लिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। ऐसे में इन शहरों को फोकस में रखकर सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा की यह देखने में आया है की इन शहरों में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में साइकिल चालक और पैदल चलने वाले लोग शामिल हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता और संजीदगी से लेते हुए अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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मौत के बढ़ रहे आंकड़े पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि एक ओर प्रदूषण कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तो दूसरी ओर इस प्रकार के आंकड़े सामने आ रहे हैं। इस प्रकार की स्थिति प्रदूषण को कम करने केलक्ष्य को पूरा करने के लिए आदर्श नहीं है।
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अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को बताया जाए कि सड़कों पर साइकिल चालकों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। खासतौर पर चंडीगढ़, लुधियाना, बठिंडा, मोहाली और गुड़गांव में इसके लिए क्या किया जा रहा है।
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इन शहरों में काफी संख्या में वाहन हैं और वहां पर पैदल चलने और साइक्लिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। ऐसे में इन शहरों को फोकस में रखकर सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा की यह देखने में आया है की इन शहरों में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में साइकिल चालक और पैदल चलने वाले लोग शामिल हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता और संजीदगी से लेते हुए अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।