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अनूठी शुरुआत: हफ्ते में एक दिन स्कूल की वर्दी पहनती हैं मुख्याध्यापिका, बच्चों में अनुशासन जगाने की कवायद
Wed, 30 Aug 2023 04:06 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 30 Aug 2023 04:06 PM IST
सार
इंद्रजीत कौर ने बताया कि जब विद्यार्थी उनसे पूछते हैं कि मैंने यह वर्दी क्यों पहनी है तो मैं उनको बताती हूं कि हम एक टीम हैं और एक टीम अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक ही रंग की वर्दी पहनते हैं।
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स्कूल की वर्दी पहने मुख्याध्यापिका
- फोटो : संवाद
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विस्तार
पटियाला के सरकारी स्कूल दाना मंडी में बतौर मुख्याध्यापिका सेवा कर रहीं डाक्टर इंद्रजीत कौर ने अनूठी शुरुआत करते हुए सप्ताह में एक दिन सोमवार को अपने विद्यार्थियों की तरह स्कूल की वर्दी पहननी शुरू की है।
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से समाज विज्ञान में डाक्टरेट (पीएचडी) करने वाली मुख्याध्यापिका इंद्रजीत कौर ने बताया कि विद्यार्थियों को प्रेरित करने का यह सबसे प्रभावशाली ढंग है। जिससे स्कूल के बच्चों में विश्वास पैदा हो रहा है कि बदलाव के एक छोटे से कदम से समाज की सोच बदली जा सकती है, क्योंकि अब तक टीचर की एक खास किस्म के ड्रेस कोड में ही कल्पना की जा सकती थी। लेकिन अब उनके इस कदम से बच्चों को काफी सीख मिल रही है। पहले कई बच्चे स्कूल की वर्दी पहनकर नहीं आते थे, लेकिन जब उनकी मुख्याध्यापिका हफ्ते में एक दिन स्कूल की वर्दी पहनने लगी है, तो वह भी इस तरह वर्दी में आना शान समझते हैं।
यह भी पढ़ें: PU Student union election: चुनाव को लेकर पुलिस सख्त, फ्रेशर पार्टी के नाम पर परोसी शराब तो होगी कार्रवाई
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इंद्रजीत कौर ने बताया कि जब विद्यार्थी उनसे पूछते हैं कि मैंने यह वर्दी क्यों पहनी है तो मैं उनको बताती हूं कि हम एक टीम हैं और एक टीम अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक ही रंग की वर्दी पहनते हैं। इंद्रजीत कौर का यह सफर केवल पहनावे पर ही नहीं रुका, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के बीच बैठकर जीवंत चर्चाओं व व्यक्तिगत अध्यापन सेशन में व्यस्त रहती हैं।
वह बताती हैं कि जब से उन्होंने वर्दी पहननी शुरू की है, विद्यार्थियों ने विचारों को खुले मन से व्यक्त करना शुरू कर दिया है। वर्दी समानता व दोस्ती का प्रतीक बन गई है। अपनी इस नई पहलकदमी के जरिये उन्होंने अपने विद्यार्थियों में भाईचारा, एकता व अनुशासन की भावना पैदा की है।
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से समाज विज्ञान में डाक्टरेट (पीएचडी) करने वाली मुख्याध्यापिका इंद्रजीत कौर ने बताया कि विद्यार्थियों को प्रेरित करने का यह सबसे प्रभावशाली ढंग है। जिससे स्कूल के बच्चों में विश्वास पैदा हो रहा है कि बदलाव के एक छोटे से कदम से समाज की सोच बदली जा सकती है, क्योंकि अब तक टीचर की एक खास किस्म के ड्रेस कोड में ही कल्पना की जा सकती थी। लेकिन अब उनके इस कदम से बच्चों को काफी सीख मिल रही है। पहले कई बच्चे स्कूल की वर्दी पहनकर नहीं आते थे, लेकिन जब उनकी मुख्याध्यापिका हफ्ते में एक दिन स्कूल की वर्दी पहनने लगी है, तो वह भी इस तरह वर्दी में आना शान समझते हैं।
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इंद्रजीत कौर ने बताया कि जब विद्यार्थी उनसे पूछते हैं कि मैंने यह वर्दी क्यों पहनी है तो मैं उनको बताती हूं कि हम एक टीम हैं और एक टीम अपनी-अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए एक ही रंग की वर्दी पहनते हैं। इंद्रजीत कौर का यह सफर केवल पहनावे पर ही नहीं रुका, बल्कि वह अपने विद्यार्थियों के बीच बैठकर जीवंत चर्चाओं व व्यक्तिगत अध्यापन सेशन में व्यस्त रहती हैं।
वह बताती हैं कि जब से उन्होंने वर्दी पहननी शुरू की है, विद्यार्थियों ने विचारों को खुले मन से व्यक्त करना शुरू कर दिया है। वर्दी समानता व दोस्ती का प्रतीक बन गई है। अपनी इस नई पहलकदमी के जरिये उन्होंने अपने विद्यार्थियों में भाईचारा, एकता व अनुशासन की भावना पैदा की है।