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Hindi News ›   Chandigarh ›   HC's important decision about those who have traveled without ticket

बस में बिना टिकट सफर करने वालों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Wed, 03 Jan 2018 09:44 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 03 Jan 2018 09:44 AM IST
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HC's important decision about those who have traveled without ticket
court - फोटो : Demo Pics
बस में वेंडिंग के लिए घुसे व्यक्ति या बिना टिकट सफर करने वालों को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनके साथ घटी किसी दुर्घटना के लिए केवल वाहन मालिक और चालक जिम्मेदार होंगे। वाहन का बीमा करने वाली कंपनी जिम्मेदार नहीं है क्योंकि वे अधिकृत सवारी की परिभाषा में फिट नहीं होते हैं। केवल टिकट लेकर यात्रा करने वाला ही अधिकृत पैसेंजर है।
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मामला हिसार में हुई एक दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें अखबार के एक हॉकर की बस के नीचे आने से मौत हो गई थी। अमरनाथ नामक व्यक्ति 14 दिसंबर 2011 को बस से उतरते हुए उसके पिछले टायर के  नीचे आ गया था। उसके परिजनों ने मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की।
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याचिका पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने वाहन मालिक और चालक को जिम्मेदार ठहराते हुए 5 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा तय किया। इसके बाद वाहन मालिकों और पीड़ित पक्ष दोनों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। जहां वाहन मालिक और ड्राइवर को हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी, वहीं पीड़ित पक्ष को राहत देते हुए मुआवजा राशि 5 लाख 50 हजार 120 रुपये कर दी।
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यात्रियों की संख्या के हिसाब से बीमा की दलील नहीं मानी

HC's important decision about those who have traveled without ticket
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
यात्रियों की संख्या के हिसाब से बीमा की दलील नहीं मानी
इस मामले में वाहन के मालिक और ड्राइवर की दलील थी कि बीमा कंपनी ने यात्रियों की संख्या के हिसाब से बीमा किया था और ऐसे में अमरनाथ को मिलाकर भी वाहन में निर्धारित संख्या से अधिक यात्री नहीं थे।

​वहीं, बीमा कंपनी ने दलील दी कि बिना टिकट के कैसे अमरनाथ को यात्री माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस पर याचिका का निपटारा करते हुए जारी आदेशों में यह व्यवस्था दी कि वाहन में वेंडिंग के लिए चढ़ा व्यक्ति यात्री की परिभाषा में नहीं आता। उसके लिए बीमा कंपनी को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता है।

वेंडिंग के लिए चढ़े व्यक्ति या बिना टिकट के व्यक्ति को यात्री की परिभाषा में नहीं रख सकते इसलिए मृतक के परिजनों को मुआवजा देने के लिए ड्राइवर और मालिक बाध्य हैं। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मृतक के परिजनों को मुआवजा देने और बाद में इसे वाहन मालिक और ड्राइवर से रिकवर करने की छूट दे दी।
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