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पराली बेचने को लेकर कई कंपनियों से समझौता कर रही हरियाणा सरकार : डीएस ढेसी
Thu, 22 Oct 2020 12:54 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 22 Oct 2020 12:54 PM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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पराली प्रबंधन के तहत प्रदेश सरकार कई कंपनियों से समझौते कर उन्हें पराली बेचेगी। इस वर्ष लगभग 1.75 लाख टन धान की पराली की खरीद बॉयोमास प्लांट्स द्वारा की जा चुकी है। जबकि पूरे सीजन के दौरान 8.58 लाख टन पराली खरीदना प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी ने यह जानकारी दी।
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वह अफसरों के साथ पराली प्रबंधन की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष कस्टम हाइरिंग सेंटर के माध्यम से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी दर पर मशीनरी उपलब्ध करवाने के लिए 152 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, किसानों को ऐसी मशीनों के लिए व्यक्तिगत स्तर पर 50 प्रतिशत की दर से सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाती है। इनके लिए इस वर्ष 216.21 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
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हरेडा के माध्यम से लगेंगे 25 बॉयोमास ऊर्जा प्लांट
ढेसी के अनुसार हरेडा के माध्यम से भी बॉयोमास ऊर्जा के लिए पराली का उपयोग हो, इसके लिए 111.51 मेगावाट क्षमता के 25 बॉयोमास ऊर्जा प्लांट लगाना प्रस्तावित है। जिसमें लगभग 1.80 लाख टन धान की पराली का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, भारतीय तेल निगम, पानीपत के साथ भी इथेनॉल गैस प्लांट लगाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही अन्य तेल कंपनियों से कम्प्रेस्ड बॉयोगैस प्लांट के लिए अब तक 66 सहमति पत्र जारी किए गए हैं, जिसमें कुल 353.56 टन प्रतिदिन क्षमता की गैस उत्पन्न होगी।
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कलानौर, रोहतक में लगेगा प्लांट
कलानौर, रोहतक में 6 टन प्रतिदिन क्षमता के साथ मैसर्ज स्पेक्ट्रम रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्लांट स्थापित किया जा रहा है। जिसमें 15 प्रतिशत धान की पराली का उपयोग होगा और प्रतिवर्ष 4320 टन पराली की खपत होगी। इसी प्रकार, करनाल के बस्ताड़ा में अजय बायो ऊर्जा प्राइवेट लिॅमिटेड द्वारा 12.5 टन प्रतिदिन क्षमता का एक प्लांट लगाया जा रहा है, जिसमें 6000 टन सालाना पराली का उपयोग किया जाएगा। कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद व फतेहाबाद जिलों में धान की पराली से ऊर्जा उत्पादन की चार कंपनियों ने अपने संयंत्र लगाने की सहमति दी है और इन कंपनियों द्वारा प्रति वर्ष 5.7 लाख टन धान की पराली का उपयोग ईंधन के तौर पर किया जाएगा।