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Haryana: कागजों में पौधरोपण पर बिल से लेकर ठेकेदार और पता तक फर्जी... करोड़ों का है घोटाला

Thu, 22 Sep 2022 03:54 PM IST
निवेदिता वर्मा यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 22 Sep 2022 03:54 PM IST
सार

जांच एवं मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार पौधों का 50 प्रतिशत से कम सरवाइवल होने पर डीएफओ के खुद मौके पर जाकर जांच और उसके बाद अनुरक्षण कार्य करवाने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा बहुत कम हो रहा है।

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Haryana: Most bills of plantation, names and addresses of contractors in Yamunanagar and Morni are fake
पौधरोपण - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा के यमुनानगर और मोरनी में बीते चार-पांच साल में हुए पौधरोपण के अधिकतर बिल, ठेकेदारों के नाम और पते फर्जी हैं। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल ने ऐसा पाया है और उसने सरकार से सिफारिश की है कि इसकी विजिलेंस जांच करवाई जाए। परिमंडल ने पौधरोपण में बीते पांच साल में सौ करोड़ रुपये का घोटाला होने की आशंका जताई है। परिमंडल के जिम्मे पौधरोपण की पड़ताल का कार्य है। वन मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन और पीसीसीएफ को उसने अनियमितताओं की जो रिपोर्ट भेजी है, उससे हड़कंप मचा हुआ है। परिमंडल के सूत्रों के मुताबिक विजिलेंस जांच हुई तो पूरे घोटाले की परतें खुल जाएंगी। अत: वन विभाग जिलों में हुए पौधरोपण की अब अपने स्तर पर आंतरिक टीमें गठित कर जांच भी करवा रहा है।

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जांच एवं मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार पौधों का 50 प्रतिशत से कम सरवाइवल होने पर डीएफओ के खुद मौके पर जाकर जांच और उसके बाद अनुरक्षण कार्य करवाने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा बहुत कम हो रहा है। मोरनी और यमुनानगर में जितना पौधरोपण दिखाया जा रहा है, जहां पहले ही घना वन क्षेत्र होने के कारण जंगल में उतनी जगह ही नहीं है। सबसे अधिक बजट पंचकूला व यमुनानगर में खर्च हो रहा है जबकि दोनों जिलों में बहुत घना जंगल 100 प्रतिशत और मध्यम घना जंगल 50 प्रतिशत है।

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25 हजार फोटोग्राफ खोलते हैं गड़बड़ियों की पोल 

परिमंडल के बड़े अधिकारी 13 साल से पौधरोपण की जांच में जुटे हैं। उनके पास 25 हजार ऐसे फोटोग्राफ हैं, जिनसे पौधरोपण में गड़बड़ियों की पोल खुलती है। वन विभाग पौधरोपण का सरवाइवल चार्ट ही तैयार नहीं करवा रहा, उच्च अधिकारी बिना जमीनी रिपोर्ट के बजट जारी कर रहे हैं। कुछ महीने पहले जांच एवं मूल्यांकन कार्य रोकने के लिए मुख्यालय की ओर से पत्र जारी किया गया। उसमें लिखा था कि वन मंत्री ऐसा चाहते हैं।

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गले पड़े सिस्टम को ठीक करना जरूरी

जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल ने पौधरोपण पर हो रही गड़बिड़यों पर तीखी टिप्पणी की है। उच्च अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम गला पड़ा है, उसे ठीक करना जरूरी है। नहीं तो हर साल पौधरोपण के नाम पर पैसा बर्बाद होता रहेगा।

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