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जाट आंदोलन: हरियाणा सरकार ने खारिज की एक मांग, रखी बड़ी शर्त
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Feb 2017 09:47 AM IST
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- फोटो : File Photo
पिछले साल जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में हिंसा और उपद्रव के आरोपियों पर सीबीआई की ओर से दर्ज केस वापस नहीं हो सकेंगे। राज्य सरकार के पास सीआरपीसी के सेक्शन-321 के प्रावधानों के तहत केस वापस लेने का अधिकार नहीं है।
सीआरपीसी में स्पष्ट किया गया है कि सीबीआई के केस दर्ज करने के बाद राज्यों की सरकारें अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकतीं। ऐसे केस जांच के बाद सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट देने पर ही बंद हो सकते हैं।
सरकार ने सोमवार को मलिक गुट से दूसरे दौर की वार्ता में केस वापसी को लेकर चार सदस्यीय समिति गठित की थी। मंगलवार शाम सरकार की ओर से कमेटी में शामिल अतिरिक्त महाधिवक्ता परविंद्र चौहान और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) मोहम्मद अकील व जाट नेताओं की तरफ से हाईकोर्ट के अधिवक्ता एसएस खरब की वार्ता महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन के ऑफिस में हुई।
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सीआरपीसी में स्पष्ट किया गया है कि सीबीआई के केस दर्ज करने के बाद राज्यों की सरकारें अपने स्तर पर वापस नहीं ले सकतीं। ऐसे केस जांच के बाद सीबीआई के क्लोजर रिपोर्ट देने पर ही बंद हो सकते हैं।
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सरकार ने सोमवार को मलिक गुट से दूसरे दौर की वार्ता में केस वापसी को लेकर चार सदस्यीय समिति गठित की थी। मंगलवार शाम सरकार की ओर से कमेटी में शामिल अतिरिक्त महाधिवक्ता परविंद्र चौहान और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) मोहम्मद अकील व जाट नेताओं की तरफ से हाईकोर्ट के अधिवक्ता एसएस खरब की वार्ता महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन के ऑफिस में हुई।
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'केस वापसी पर आगे नहीं होगी वार्ता'
Jat reservation
- फोटो : File Photo
जाटों के अन्य प्रतिनिधि अतिरिक्त महाधिवक्ता रणधीर सिंह वार्ता में शामिल नहीं हुए। केस वापसी को लेकर शुरू मंथन में जाट प्रतिनिधि एडवोकेट एसएस खरब ने सीबीआई की ओर से 21 लोगों पर दर्ज केस वापस लेने की बात रखी। जिसे सरकार के प्रतिनिधियों ने सीआरपीसी के सेक्शन 321 का हवाला देते हुए खारिज कर दिया।
इससे बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि अन्य केसों की वापसी के लिए दो-तीन दिन और बातचीत चलनी थी, लेकिन सीबीआई केस वापस न लिए जा पाने के सरकार के जवाब से पेच फंस गया। हरियाणा के महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन ने बताया कि जाटों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का रास्ता सुझाने को गठित समिति की बैठक हुई है, लेकिन ये सिरे नहीं चढ़ पाई।
कुछ मामले सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। याद रहे कि वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर आगजनी के मामले सीबीआई ने 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है जबकि, 11 उपद्रवियों के खिलाफ जघन्य अपराध के मामले दर्ज हैं।
आंदोलन को लेकर पूर्व में घोषित रणनीति के तहत आगे बढ़ेंगे। बीते वर्ष हुए समझौते का सरकार मजाक उड़ा रही है।
यशपाल मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति़
इससे बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि अन्य केसों की वापसी के लिए दो-तीन दिन और बातचीत चलनी थी, लेकिन सीबीआई केस वापस न लिए जा पाने के सरकार के जवाब से पेच फंस गया। हरियाणा के महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन ने बताया कि जाटों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का रास्ता सुझाने को गठित समिति की बैठक हुई है, लेकिन ये सिरे नहीं चढ़ पाई।
कुछ मामले सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। याद रहे कि वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर आगजनी के मामले सीबीआई ने 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है जबकि, 11 उपद्रवियों के खिलाफ जघन्य अपराध के मामले दर्ज हैं।
आंदोलन को लेकर पूर्व में घोषित रणनीति के तहत आगे बढ़ेंगे। बीते वर्ष हुए समझौते का सरकार मजाक उड़ा रही है।
यशपाल मलिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति़