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अंकल, मेरी किताबें भी जला दीं, मामा आवेगा, नई किताब लावेगा

Sun, 28 Feb 2016 12:16 PM IST
सर्वेश कुकरा/अमर उजाला, हांसी
सर्वेश कुकरा/अमर उजाला, हांसी Updated Sun, 28 Feb 2016 12:16 PM IST
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haryana jat protest and voilence, little child emotional story

जाट आंदोलन के दौरान उपद्रवियों ने तबाही मचाते हुए न बच्चे को देखा और न ही बुजुर्ग को। कहा जाता है कि बच्चें दिल के बहुत भोले होते है। वो जब कुछ कहते है तो आवाज सीधे दिल से निकलती है।

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ढाणी पाल में रहने वाला सात साल का लवकेश बहन तमन्ना के साथ हांसी लाल सड़क स्थित एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है। शनिवार को स्कूल बस उसे गांव से लेने गई थी लेकिन लवकेश स्कूल नहीं आया।
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आता भी कैसे, उसके पास न तो कोई किताब है और न कॉपी। पैंसिल भी नहीं है। अब तो स्कूल ड्रेस भी नहीं है। उसका तमाम सामान जाट आरक्षण की आड़ में हुई हिंसा में जल चुका है।

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इब मेरा मामा आवैगा, वो नई किताब लावैगा

haryana jat protest and voilence, little child emotional story

अमर उजाला ने शनिवार को इन दोनों बच्चों से बात की तो बच्चों के चेहरे पर घर जलने से ज्यादा अपनी किताबें जलने का दुख था। ये पूछे जाने पर कि वे स्कूल क्यों नहीं गए, बड़ी मासूमियत से जवाब दिया। बोले अंकल, इब म्हारा मामा आवैगा अर वो नई किताब लावैगा। नई किताब आण कै बाद मै ए स्कूल जावांगे। वे कहते है, इब तो किमै भी नहीं बचा।

दरअसल हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने ढाणियों में मकान जला डाले जिसमें कुछ भी नहीं बचा। घटना के दिन 22 फरवरी को बच्चें अपने आंगन में खेल रहे थे। उनका स्कूल बस्ता साइकिल के हैंडल पर ही टंगा हुआ था। इसी दौरान दूर से नारेबाजी सुनाई दी। छत पर चढ़ कर देखा तो उपद्रवियों की भीड़ आते हुए दिखाई दी।

तमन्ना और लवकेश ने बताया कि वे भी अपनी मां और पिता के साथ पैदल ही घर छोड़ कर खेतों से काफी दूर निकल गए थे। किसी तरह बचते बचाते रिश्तेदारियों में शरण ली। वापिस लौटने के बाद जब बच्चों ने अपने बस्ते संभाले तो वे जल चुके थे। मामा ने बच्चों से बात की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे उनके लिए नई किताबें लेकर आएंगे। अब बच्चें अपने मामा के आने का इंतजार कर रहे है।

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