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Haryana Flood: पांच साल में बाढ़ नियंत्रण के लिए जारी किए बीस अरब रुपये, नदियों के तटबंध आज भी कच्चे

Wed, 19 Jul 2023 08:50 AM IST
निवेदिता वर्मा नसीब सैनी, अमर उजाला, चंडीगढ़
नसीब सैनी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 19 Jul 2023 08:50 AM IST
सार

घग्गर नदी पंचकूला क्षेत्र से शुरू होकर अंबाला, कैथल, फतेहाबाद व सिरसा जिलों से होते हुए राजस्थान तक जाती है। दोनों नदियों के किनारों पर पत्थर लगाने के कार्य पर ही हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस समय भी लगभग 168 परियोजनाएं बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रही हैं।

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Haryana has spent more than two thousand crore rupees in five years for flood control
बाढ़ की चपेट में कुरुक्षेत्र। - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा सिंचाई विभाग के माध्यम से बाढ़ नियंत्रण के लिए पिछले पांच साल में दो हजार करोड़ (बीस अरब) रुपये से अधिक खर्च कर चुका है। इसके बावजूद बाढ़ का स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा। अधिक बारिश होते ही नदियां तटबंध तोड़कर आबादी का रुख कर लेती हैं। 1978 की बाढ़ में यमुना नदी का तटबंध बनाया गया था जो आज भी पूरी तरह से कच्चा है। यही हाल घग्गर नदी का है। कहीं-कहीं पत्थरों की तारबंदी करके अस्थायी उपाय किए जाते हैं, जो दो-तीन साल में बह जाते हैं।
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यमुना और घग्गर में आती है बाढ़
हरियाणा में यमुना व घग्गर नदी में अधिक बारिश के बाद बाढ़ आ जाती है। यमुना नदी में हथनी कुंड बैराज में अधिक पानी होने पर नहरों में क्षमता से अधिक पानी छोड़ दिया जाता है। यमुना नदी यमुनानगर जिले से शुरू होकर हरियाणा में मुरथल के बाद दिल्ली में प्रवेश करती है। बाद में पलवल हथीन के इलाके में और फिर हरियाणा में प्रवेश करती है। इसका करीब 200 किलोमीटर से अधिक लंबा क्षेत्र हरियाणा में आता है। यमुनानगर, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत व सोनीपत सहित फरीदाबाद के कुछ क्षेत्रों में पत्थर लगाकर इसके तटबंधों को अलग-अलग जगह मजबूती का प्रयास किया जाता है।
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बाढ़ नियंत्रण के लिए 168 परियोजनाएं 
घग्गर नदी पंचकूला क्षेत्र से शुरू होकर अंबाला, कैथल, फतेहाबाद व सिरसा जिलों से होते हुए राजस्थान तक जाती है। दोनों नदियों के किनारों पर पत्थर लगाने के कार्य पर ही हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस समय भी लगभग 168 परियोजनाएं बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रही हैं। फिर भी तीन दिन की बारिश भी ये नदियां झेल नहीं पातीं। इनेलो नेता अभय चौटाला इस बात पर सवाल उठा चुके हैं कि बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की बैठकों में स्वीकृत होने वाला पैसा यदि खर्च हो जाए तो हरियाणा में बाढ़ जैसी स्थिति ही न आए।

तैयारियां पूरी थीं पर पानी ही ज्यादा आ गया : कमिश्नर
सिंचाई विभाग के कमिश्नर पंकज अग्रवाल का कहना है कि बाढ़ राहत के लिए लघु, मध्यम एवं लंबी अवधि की परियोजनाओं के तहत पैसा खर्च किया जाता है। इस पैसे में केवल इन नदियों पर ही काम नहीं होता, इसे पानी के स्रोतों में सुधार, निचले इलाकों में होने वाले जलभराव की निकासी आदि पर भी खर्च किया जाता है। इस बार भी तैयारियां तो पूरी थीं, पानी क्षमता से अधिक आ गया, इसी कारण नुकसान हुआ है।

बाढ़ नियंत्रण पर खर्च
वर्ष                      खर्च

2017-18            120 करोड़
2018-19            100 करोड़
2019-20            185 करोड़
2020-21            190 करोड़
2021-22            260 करोड़
2022-23            350 करोड़
2023-24            370 करोड़ (प्रस्तावित)
(बाढ़ नियंत्रण बोर्ड की 54वीं बैठक में प्रस्तुत आंकड़े)
 
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