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रोड सेफ्टी: हरियाणा के जब अफसर ही लापरवाह तो कैसे बचेंगी जानें, 4 साल में 5 हजार की मौत

Sat, 14 Mar 2020 12:09 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 14 Mar 2020 12:09 PM IST
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Haryana Government Officers Not Serious for Road Safety in State
प्रतीकात्मक तस्वीर
हरियाणा में रोड सेफ्टी को लेकर एक ओर जहां सरकार खासी गंभीरता दिखाने में जुटी हुई है। वहीं जिलों में अफसर सरकार के इन प्रयासों को लेकर पूरी तरह संजीदा नहीं हैं। अफसर न तो जिलों में डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमेटी की हर माह होने वाली नियमित बैठकें करते हैं और न ही अपने इलाकों में रोड सेफ्टी को ज्यादा मजबूत बनाने का कोई खास प्लानिंग बनाते हैं।
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ऐसे में किस तरह सड़क हादसों और उसमें जान गंवाने वाले लोगों की संख्या कम होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अफसरों की इस लापरवाही का खुलासा हरियाणा रोड सेफ्टी की नोडल एजेंसी परिवहन विभाग की वर्ष 2019 की समीक्षा रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार कुरुक्षेत्र ही एकमात्र ऐसा जिला है, जिसने हर महीने जिला रोड सेफ्टी कमेटी की बैठकें की है।
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उल्लेखनीय है कि इस कमेटी के चेयरमैन संबंधित जिलों के डीसी होते हैं। जबकि शिक्षा, एजुकेशन, बीएंडआर, पुलिस समेत अन्य विभागों के अफसर इस कमेटी के सदस्य होते हैं। हर महीने इस कमेटी की बैठक अनिवार्य है। कमेटी ने जिले में रोड सेफ्टी के प्रयासों, सड़क  दुघर्टनाओं के आंकड़ों व जागरूकता कार्यक्रमों इत्यादि विषयों पर चर्चा व समीक्षा होती है।
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इसी कमेटी में उन प्रयासों पर भी चर्चा होती है कि जिससे जिले में सड़क हादसों की संख्या को कम किया जा सके। मगर इन बैठकों को लेकर जिलों के अफसर कतई गंभीर नहीं है।

सिरसा ने साल में की सिर्फ एक बैठक

नियमानुसार तो हर जिले में डिस्ट्रिक्ट रोड सेफ्टी कमेटी की हर महीने बैठक होनी चाहिए। मगर अफसरों की लापरवाही की हद यह है कि कुरुक्षेत्र को छोड़कर अन्य जिलों ने वर्ष 2019 में पूरी बैठकें नहीं की है। सिरसा जिले में तो पूरे साल सिर्फ1 बैठक अगस्त माह में हुई थी।

इसके अलावा भिवानी व पानीपत में 11-11 बैठकें, चरखी दादरी, फरीदाबाद, करनाल व रेवाड़ी में 10-10 बैठकें, फतेहाबाद, कैथल व रोहतक में 9-9 बैठकें, झज्जर में 8, अंबाला, गुरुग्राम, हिसार व यमुनानगर में 7-7 बैठकें, जींद, महेंद्रगढ़, पलवल व सोनीपत में 6-6 बैठकें, नूहं व पंचकूला में 5-5 बैठकें ही हुईं।

पिछले चार साल से 5 हजार से ज्यादा लोग गवां रहे जान
रोड सेफ्टी को लेकर सरकार इसलिए ज्यादा गंभीर है, क्योंकि पिछले चार साल से 5 हजार से अधिक लोग हरियाणा में सड़क हादसों में जान वर्ष 2018 में भी 11238 सड़क हादसों में 5118 लोगों ने जान गवांई व 10020 लोग घायल हुए थे।

इसी तरह वर्ष 2017 में 5120 व वर्ष 2016 में 5024 लोगों की सड़क हादसों में जान गई। जबकि 10339 लोग वर्ष 2017 और 10531 लोग वर्ष 2016 में घायल हुए थे। लिहाजा सरकार चाहती है कि मरने व घायल होने वालों का यह आंकड़ा नीचे आए।

मगर इसके लिए जिलों में अफसरों को भी पूरी शिद्दत के साथ अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा।
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