{"_id":"669d442c620605b0b501e6ff","slug":"haryana-expects-money-from-center-in-election-year-chandigarh-news-c-16-1-pkl1060-473301-2024-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: चुनावी साल में हरियाणा को केंद्र से धनवर्षा की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: चुनावी साल में हरियाणा को केंद्र से धनवर्षा की उम्मीद
विज्ञापन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खजाने से हरियाणा को बड़ी उम्मीदें
कारोबारियों, किसानों के साथ आम आदमी को राहत की आस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्र में
लगातार तीसरी बार बनी मोदी सरकार के बजट से हरियाणा को इस बार काफी उम्मीदें हैं। इसकी बड़ी वजह अक्तूबर में होने वाले वाले विधानसभा चुनाव हैं। चुनाव को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खजाने से हरियाणा पर धनवर्षा की उम्मीद जताई जा रही है। रोजगार के लिहाज से भी कोई बड़ा एलान किया जा सकता है। महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को राहत दी जा सकती है। किसानों के साथ कारोबारियों के खाते में भी कुछ आने की उम्मीद बंध रही है। युवाओं के लिए स्टार्टअप या कौशल आधारित रोजगार की दिशा में भी कुछ योजनाएं लाई जा सकती हैं।
हरियाणा सरकार ने भी अपनी कुछ मांगों से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अवगत कराया है। इसके साथ ही कुछ नए शहरों को स्मार्ट सिटी की योजनाओं में भी शामिल किया जा सकता है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल का हरियाणा पर खास फोकस है। कई मौकों पर उन्होंने कहा है कि भले ही वह केंद्र में चले गए हों, मगर उनकी प्राथमिकताओं में हरियाणा पहले नंबर पर है। बजट में उन्होंने भी शहरों के सुनियोजित विकास के लिए कई सुझाव दिए हैं। 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट से हरियाणा व लोगों को क्या उम्मीदें हैं। एक नजर।
-- -- -- -- -- -
कच्चे माल में अतिरिक्त टैक्स कम किया जाए
आईएमटी उद्योग वेलफेयर एसोसिएशन प्रधान जोगिंद्र सिंह नांदल ने बताया कि रोहतक में नट-बोल्ट की लगभग 200 से ज्यादा फैक्टरी हैं। कच्चे माल पर भी अतिरिक्त टैक्स लगाया जा रहा है। केंद्रीय बजट से उम्मीद है कि सरकार टैक्स का भार कम करेगी। विदेशों से आयात किए गए माल पर भी सामान्य टैक्स लगना चाहिए, बिना किसी सिक्योरिटी के बैंक से कम ब्याज पर लोन मिलना चाहिए। सरकार को लैंड बैंक बनाकर ज्यादा से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि उद्योगपतियों को सस्ते रेट में दे सके। जीएसटी के रिफंड का पैसा समय पर मिलना चाहिए, ताकि कोई परेशानी न हो। बिजली की कमी भी है। इसे भी पूरा करना चाहिए।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -
जूते और साइंस उत्पादों पर जीएसटी पांच प्रतिशत किया जाए
बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क एसोसिएशन के प्रधान सुभाष जग्गा ने बताया, शहर में कुल साढ़े सात हजार फैक्ट्रियां हैं। इनमें 3 हजार से अधिक फुटवियर इंडस्ट्री हैं। कारोबारी चाहते हैं कि जीएसटी में उन्हें कुछ राहत मिले। एक हजार के जूते पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगती है। इस जीएसटी को कम करके 5 प्रतिशत किया जाए। आयकर स्लैब में कमी की जाए। एमएसएमई में काम करने वाले उद्योगपतियों को राहत देनी चाहिए। फिलहाल 45 दिन में भुगतान का नियम है। इस नियम में बदलाव करते हुए 90 दिन का समय मिलना चाहिए। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव गौरव सोनी ने बताया कि साइंस उत्पादों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत किया जाए, क्योंकि अधिकांश साइंस के उत्पाद शिक्षा के क्षेत्र में जाते हैं। इसके अलावा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय ने जिस प्रकार से कांच से बनने वाले उत्पादों पर आईएसआई ग्रेड की शर्त लगाई है, उसे हटाया जाए।
-- -- -- -- -
पानीपत को एनसीआर से बाहर करें
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने पर ग्रैप के नियम लागू होने से उद्यमियों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है। पानीपत को एनसीआर से बाहर किया जाए। पानीपत में कॉमन बॉयलर और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रोजेक्ट लंबे समय से अटके हैं। इनमें से किसी पर काम नहीं हो पाया है। दोनों बजट के अभाव में अटके हैं। नई इंडस्ट्री लगाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम हो।
पानीपत में करीब 20 हजार छोटे और बड़े उद्योग हैं। यहां से प्रतिवर्ष करीब 15 हजार करोड़ का निर्यात और करीब 90 हजार करोड़ का घरेलू बाजार है। इसलिए हमारी मांगों पर ध्यान दिया जाए।
-- -- -- -- -- --
स्टील इंडस्ट्री को चाहिए कैपिटल गेंस में राहत
लघु उद्योग भारती के महामंत्री व रामसंस स्टेनलेस के मालिक संजय गोयल के मुताबिक बजट में आयकर स्लैब में बढ़ोतरी की जाए। कैपिटल गेंस (पूंजीगत लाभ) से राहत दी जाए। स्टेनलेस स्टील पर जीएसटी कम किया जाए, जो फिलहाल 18 प्रतिशत है। कच्चा माल सस्ता किया जाए ताकि विदेश से आने वाले सस्ते माल से मुकाबला किया जा सके। हिसार में स्टेलनेस स्टील से जुड़ी 50 से ज्यादा इकाइयां संचालित हैं। देश का 20 प्रतिशत स्टेनलेस स्टील का हिसार में उत्पादन होता है।
-- -- -- -- -
किसानों को हर फसल पर मिले एमएसपी : चढ़ूनी
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा- महंगाई ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसल बोने में किसानों की लागत ज्यादा आ रही है। उसे कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। इसलिए किसानों पर कर्जा बढ़ता जा रहा है। या तो किसानों का कर्ज माफ हो या फिर उन्हें हर फसल पर एमएसपी की गारंटी मिलनी चाहिए। भले ही उस फसल को कोई खरीदें। किसान बहुत बड़ा वर्ग है। इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए। किसान खुशहाल होगा तो देश अपने आप तरक्की करने लगेगा। इसके अलावा खेती के उपकरणों में भी सब्सिडी ज्यादा से ज्यादा मिले। क्योंकि उपकरण भी काफी महंगे हो गए हैं।
-- -- -- -- -- -
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और एनसीआर के लिए विशेष पैकेज की मांग
केंद्रीय बजट से हरियाणा सरकार की दो बड़ी मांगें हैं। वित्त मंत्री जेपी दलाल ने बताया कि हरियाणा देश में सबसे ज्यादा सामाजिक पेंशन देता है। राज्य में 32 लाख लाभार्थी हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता की दर बढ़ाई जाए या इस मद में राज्य का बोझ साझा किया जाए। वहीं, दूसरी बड़ी मांग एनसीआर जिलों में केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में हरियाणा को विशेष पैकेज दिया जाए। उन्होंने बताया एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते शहरीकरण के वजह से मूलभूत सुविधाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। प्रदूषण बढ़ने के साथ भूजल स्तर भी गिरा है। इन सभी को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि छोटा राज्य होने के बावजूद कुल जीएसटी संग्रह में हरियाणा का योगदान छह फीसदी से ज्यादा है। ऐसे में हरियाणा को आवंटन राशि के अतिरिक्त बजट मिलना चाहिए।
विज्ञापन
कारोबारियों, किसानों के साथ आम आदमी को राहत की आस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। केंद्र में
लगातार तीसरी बार बनी मोदी सरकार के बजट से हरियाणा को इस बार काफी उम्मीदें हैं। इसकी बड़ी वजह अक्तूबर में होने वाले वाले विधानसभा चुनाव हैं। चुनाव को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खजाने से हरियाणा पर धनवर्षा की उम्मीद जताई जा रही है। रोजगार के लिहाज से भी कोई बड़ा एलान किया जा सकता है। महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को राहत दी जा सकती है। किसानों के साथ कारोबारियों के खाते में भी कुछ आने की उम्मीद बंध रही है। युवाओं के लिए स्टार्टअप या कौशल आधारित रोजगार की दिशा में भी कुछ योजनाएं लाई जा सकती हैं।
हरियाणा सरकार ने भी अपनी कुछ मांगों से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अवगत कराया है। इसके साथ ही कुछ नए शहरों को स्मार्ट सिटी की योजनाओं में भी शामिल किया जा सकता है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल का हरियाणा पर खास फोकस है। कई मौकों पर उन्होंने कहा है कि भले ही वह केंद्र में चले गए हों, मगर उनकी प्राथमिकताओं में हरियाणा पहले नंबर पर है। बजट में उन्होंने भी शहरों के सुनियोजित विकास के लिए कई सुझाव दिए हैं। 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट से हरियाणा व लोगों को क्या उम्मीदें हैं। एक नजर।
विज्ञापन
कच्चे माल में अतिरिक्त टैक्स कम किया जाए
आईएमटी उद्योग वेलफेयर एसोसिएशन प्रधान जोगिंद्र सिंह नांदल ने बताया कि रोहतक में नट-बोल्ट की लगभग 200 से ज्यादा फैक्टरी हैं। कच्चे माल पर भी अतिरिक्त टैक्स लगाया जा रहा है। केंद्रीय बजट से उम्मीद है कि सरकार टैक्स का भार कम करेगी। विदेशों से आयात किए गए माल पर भी सामान्य टैक्स लगना चाहिए, बिना किसी सिक्योरिटी के बैंक से कम ब्याज पर लोन मिलना चाहिए। सरकार को लैंड बैंक बनाकर ज्यादा से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि उद्योगपतियों को सस्ते रेट में दे सके। जीएसटी के रिफंड का पैसा समय पर मिलना चाहिए, ताकि कोई परेशानी न हो। बिजली की कमी भी है। इसे भी पूरा करना चाहिए।
विज्ञापन
जूते और साइंस उत्पादों पर जीएसटी पांच प्रतिशत किया जाए
बहादुरगढ़ फुटवियर पार्क एसोसिएशन के प्रधान सुभाष जग्गा ने बताया, शहर में कुल साढ़े सात हजार फैक्ट्रियां हैं। इनमें 3 हजार से अधिक फुटवियर इंडस्ट्री हैं। कारोबारी चाहते हैं कि जीएसटी में उन्हें कुछ राहत मिले। एक हजार के जूते पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगती है। इस जीएसटी को कम करके 5 प्रतिशत किया जाए। आयकर स्लैब में कमी की जाए। एमएसएमई में काम करने वाले उद्योगपतियों को राहत देनी चाहिए। फिलहाल 45 दिन में भुगतान का नियम है। इस नियम में बदलाव करते हुए 90 दिन का समय मिलना चाहिए। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव गौरव सोनी ने बताया कि साइंस उत्पादों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत किया जाए, क्योंकि अधिकांश साइंस के उत्पाद शिक्षा के क्षेत्र में जाते हैं। इसके अलावा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय ने जिस प्रकार से कांच से बनने वाले उत्पादों पर आईएसआई ग्रेड की शर्त लगाई है, उसे हटाया जाए।
पानीपत को एनसीआर से बाहर करें
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स पानीपत चैप्टर के प्रधान विनोद धमीजा ने बताया कि प्रदूषण बढ़ने पर ग्रैप के नियम लागू होने से उद्यमियों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है। पानीपत को एनसीआर से बाहर किया जाए। पानीपत में कॉमन बॉयलर और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रोजेक्ट लंबे समय से अटके हैं। इनमें से किसी पर काम नहीं हो पाया है। दोनों बजट के अभाव में अटके हैं। नई इंडस्ट्री लगाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम हो।
पानीपत में करीब 20 हजार छोटे और बड़े उद्योग हैं। यहां से प्रतिवर्ष करीब 15 हजार करोड़ का निर्यात और करीब 90 हजार करोड़ का घरेलू बाजार है। इसलिए हमारी मांगों पर ध्यान दिया जाए।
स्टील इंडस्ट्री को चाहिए कैपिटल गेंस में राहत
लघु उद्योग भारती के महामंत्री व रामसंस स्टेनलेस के मालिक संजय गोयल के मुताबिक बजट में आयकर स्लैब में बढ़ोतरी की जाए। कैपिटल गेंस (पूंजीगत लाभ) से राहत दी जाए। स्टेनलेस स्टील पर जीएसटी कम किया जाए, जो फिलहाल 18 प्रतिशत है। कच्चा माल सस्ता किया जाए ताकि विदेश से आने वाले सस्ते माल से मुकाबला किया जा सके। हिसार में स्टेलनेस स्टील से जुड़ी 50 से ज्यादा इकाइयां संचालित हैं। देश का 20 प्रतिशत स्टेनलेस स्टील का हिसार में उत्पादन होता है।
किसानों को हर फसल पर मिले एमएसपी : चढ़ूनी
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा- महंगाई ने किसानों की कमर तोड़ दी है। फसल बोने में किसानों की लागत ज्यादा आ रही है। उसे कोई खास फायदा नहीं हो रहा है। इसलिए किसानों पर कर्जा बढ़ता जा रहा है। या तो किसानों का कर्ज माफ हो या फिर उन्हें हर फसल पर एमएसपी की गारंटी मिलनी चाहिए। भले ही उस फसल को कोई खरीदें। किसान बहुत बड़ा वर्ग है। इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए। किसान खुशहाल होगा तो देश अपने आप तरक्की करने लगेगा। इसके अलावा खेती के उपकरणों में भी सब्सिडी ज्यादा से ज्यादा मिले। क्योंकि उपकरण भी काफी महंगे हो गए हैं।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और एनसीआर के लिए विशेष पैकेज की मांग
केंद्रीय बजट से हरियाणा सरकार की दो बड़ी मांगें हैं। वित्त मंत्री जेपी दलाल ने बताया कि हरियाणा देश में सबसे ज्यादा सामाजिक पेंशन देता है। राज्य में 32 लाख लाभार्थी हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता की दर बढ़ाई जाए या इस मद में राज्य का बोझ साझा किया जाए। वहीं, दूसरी बड़ी मांग एनसीआर जिलों में केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में हरियाणा को विशेष पैकेज दिया जाए। उन्होंने बताया एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते शहरीकरण के वजह से मूलभूत सुविधाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। प्रदूषण बढ़ने के साथ भूजल स्तर भी गिरा है। इन सभी को नियंत्रित करने के लिए हरियाणा को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि छोटा राज्य होने के बावजूद कुल जीएसटी संग्रह में हरियाणा का योगदान छह फीसदी से ज्यादा है। ऐसे में हरियाणा को आवंटन राशि के अतिरिक्त बजट मिलना चाहिए।