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Haryana Election: सरकार-विपक्ष को सहारा देने वाले निर्दल खुद बेसहारा... भाजपा ने इनमें से किसी को नहीं दी टिकट

Mon, 16 Sep 2024 08:46 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 16 Sep 2024 08:46 AM IST
सार

संकट के समय छह निर्दलीय विधायकों ने भाजपा सरकार को समर्थन दिया था। भाजपा ने इनमें से किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया। कांग्रेस ने सिर्फ गोंदर को नीलोखेड़ी से टिकट दिया है। तीन फिर से निर्दलीय लड़ रहे हैं। एक की मौत के बाद अब पत्नी निर्दलीय मैदान में उतरी हैं।

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Haryana Election Independents who support government and opposition are themselves helpless
Haryana Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साढ़े चार साल तक बिना शर्त समर्थन देकर प्रदेश की भाजपा सरकार और लोकसभा चुनाव से पहले पाला बदलकर विपक्ष की उम्मीदों को सहारा देने वाले निर्दलीय विधायक विधानसभा चुनाव में बेसहारा हो गए हैं। भाजपा ने किसी भी निर्दलीय विधायक को टिकट नहीं दिया। दोराहे पर फंसे पांच निर्दलीय विधायकों में से तीन फिर आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे हैं।
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पिछले विधानसभा चुनाव में सात निर्दलीय जीते थे। रानियां से रणजीत चौटाला, पृथला से नयनपाल रावत, बादशाहपुर से राकेश दौलताबाद, दादरी से सोमबीर सांगवान, पूंडरी से रणधीर गोलन, नीलोखेड़ी से धर्मपाल गोंदर व महम से बलराज कुंडू। कुंडू को छोड़कर शेष छह विधायकों ने भाजपा को समर्थन देकर प्रदेश में दूसरी बार सरकार बनाने में मदद की। 
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भाजपा ने चौटाला को मंत्री व शेष को बोर्डों व निगमों का चेयरमैन बनाया। चाहे शराब घोटाले के आरोप हों या पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह के महिला कोच के यौन उत्पीड़न का मामला, विपक्ष के जोरदार  हमलों के बाद भी निर्दलीय विधायकों ने सरकार का साथ नहीं छोड़ा।
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साढ़े चार साल बाद लोकसभा चुनाव से पूर्व धर्मपाल गोंदर, रणधीर गोलन व सोमबीर कांग्रेस के पाले में चले गए। तीनों को अब कांग्रेस से टिकट की आस थी। लोकसभा चुनाव के दौरान ही राकेश दौलताबाद का निधन हो गया। रणजीत चौटाला ने भाजपा में शामिल होकर हिसार से लोकसभा चुनाव लड़ा, पर जीत नहीं मिली। 
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वे विधानसभा चुनाव में फिर रानियां से टिकट चाह रहे थे, पर भाजपा उन्हें डबवाली से लड़ाना चाह रही थी। पृथला से विधायक नयनपाल रावत भी अंत सरकार के साथ बने रहे। रावत भी भाजपा से टिकट मांग रहे थे। कांग्रेस ने सिर्फ धर्मपाल गोंदर को नीलोखेड़ी से टिकट दिया है। 

 

रणधीर सिंह गोलन
पुंडरी से रणधीर सिंह गोलन 2019 में कांग्रेस के सतबीर भाना को 12,824 वोटों से हराकर विधायक बने और मनोहर सरकार को समर्थन दिया। बीते लोकसभा चुनाव के दौरान वह भाजपा से समर्थन वापस लेकर कांग्रेस के पाले में गए, पर पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया। अब पुंडरी से ही निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।
 

सोमबीर सांगवान
सोमवीर ने 2019 में भाजपा से बागी होकर दादरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और इलाके के कद्दावर नेता सत्यपाल सांगवान को 14,272 वोट से हराया। पहले भाजपा को समर्थन दिया और बाद में कांग्रेस को। वह कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह मनीषा सांगवान को टिकट दे दिया। सोमबीर इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे।


 

नयनपाल रावत
पृथला से निर्दलीय जीतने वाले नयनपाल रावत ने आखिरी तक भाजपा का साथ नहीं छोड़ा। वह भाजपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे, मगर ऐन वक्त पर पार्टी ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया। इससे नाराज होकर दोबारा पृथला से ही निर्दलीय चुनावी दंगल में उतर गए।

 

राकेश दौलताबाद
2019 में बादशाहपुर से निर्दलीय चुनाव जीते राकेश दौलताबाद ने भाजपा प्रत्याशी मनीष यादव को हराया था। अंत तक सरकार के साथ रहे दौलताबाद का लोकसभा चुनाव के दौरान निधन हो गया। इस बार चुनाव में उनकी पत्नी कुमुदिनी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं।

 

रणजीत चौटाला
2019 में रानियां से हरियाणा लोकहित पार्टी के गोबिंद कांडा को 19,431 वोटों से हराया। कांग्रेस से बगावत कर मैदान में उतरे थे। भाजपा सरकार को समर्थन दिया। बदले में भाजपा ने कैबिनेट मंत्री बनाया। लोकसभा चुनाव में हिसार सीट से भाजपा उम्मीदवार बनाया, मगर हार गए। इस बार रानियां से टिकट कटा तो निर्दलीय नामांकन भर दिया।

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