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SYL के मुद्दे पर खुलकर बोले खट्टर, बताया अगले 3 साल का विजन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 30 Jul 2016 09:00 AM IST
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : फाइल फोटो
अक्टूबर में दो साल पूरे करने की दहलीज पर खड़ी खट्टर सरकार ने अब तक अस्थिर नौकरशाही, रामपाल प्रकरण और जाट आंदोलन जैसी एक के बाद एक चुनौतियां झेलीं हैं। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हावभाव पर बीते कल की चिंताएं हावी नहीं दिखतीं।
अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में वे खासे उत्साहित दिखे और उन्होंने अपनी सरकार की कई आगामी योजनाओं का खुलासा किया। स्थानीय संपादक संजय अभिज्ञान और ब्यूरो चीफ प्रवीण पांडे के साथ उनकी बातचीत के अंशः
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि जिन्हें एसवाईएल के मुद्दे पर राजनीति करनी है, वे करते रहें, लेकिन हरियाणा एसवाईएल के भरोसे नहीं बैठा है। हरियाणा सरकार का फोकस तीन बांधों लखवार, किशारू और रेणुका डैम पर है। उसकी रणनीति यमुना के तटवर्ती जिलों में नई झीलें बनाने की है और पूरी उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में राज्य में आठ महीने पानी की भरपूर सप्लाई पक्की हो जाएगी।
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अमर उजाला को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने कहा कि एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा सरकार ने अपना असली मकसद हासिल कर लिया है। उसका लक्ष्य इस मुद्दे को कोर्ट में फिर से जिंदा करना था और यह हो चुका है। अब जो कुछ करना है कोर्ट को करना है। हरियाणा न तो सिंचाई के लिए एसवाईएल का मोहताज है और न ही राजनीति चमकाने के लिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा सरकार आने के बाद एसवाईएल के मुद्दे पर कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई है। उम्मीद है कि न्यायालय हरियाणा के हित में ही फैसला देगा।
उन्होंने दलील दी कि पंजाब को समझना होगा कि बरसात के दौरान 30 लाख एकड़ फुट पानी पाकिस्तान होता हुआ अंततः समुद्र में चला जाता है। एसवाईएल का मकसद यही है कि समुद्र में जाकर मिल रहे इस पानी को ही जलाशयों में संग्रहित कर विभिन्न राज्यों को दिया जा सके।
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अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में वे खासे उत्साहित दिखे और उन्होंने अपनी सरकार की कई आगामी योजनाओं का खुलासा किया। स्थानीय संपादक संजय अभिज्ञान और ब्यूरो चीफ प्रवीण पांडे के साथ उनकी बातचीत के अंशः
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि जिन्हें एसवाईएल के मुद्दे पर राजनीति करनी है, वे करते रहें, लेकिन हरियाणा एसवाईएल के भरोसे नहीं बैठा है। हरियाणा सरकार का फोकस तीन बांधों लखवार, किशारू और रेणुका डैम पर है। उसकी रणनीति यमुना के तटवर्ती जिलों में नई झीलें बनाने की है और पूरी उम्मीद है कि अगले तीन वर्षों में राज्य में आठ महीने पानी की भरपूर सप्लाई पक्की हो जाएगी।
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अमर उजाला को दिए गए एक विशेष इंटरव्यू में मुख्यमंत्री ने कहा कि एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा सरकार ने अपना असली मकसद हासिल कर लिया है। उसका लक्ष्य इस मुद्दे को कोर्ट में फिर से जिंदा करना था और यह हो चुका है। अब जो कुछ करना है कोर्ट को करना है। हरियाणा न तो सिंचाई के लिए एसवाईएल का मोहताज है और न ही राजनीति चमकाने के लिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और हरियाणा में भाजपा सरकार आने के बाद एसवाईएल के मुद्दे पर कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई है। उम्मीद है कि न्यायालय हरियाणा के हित में ही फैसला देगा।
उन्होंने दलील दी कि पंजाब को समझना होगा कि बरसात के दौरान 30 लाख एकड़ फुट पानी पाकिस्तान होता हुआ अंततः समुद्र में चला जाता है। एसवाईएल का मकसद यही है कि समुद्र में जाकर मिल रहे इस पानी को ही जलाशयों में संग्रहित कर विभिन्न राज्यों को दिया जा सके।
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लखवार डैम दो साल के अंदर शुरू करवाने की उम्मीद
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : फाइल फोटो
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में दशकों से अटके पड़े लखवार डैम को दो बरस के भीतर शुरू करवाने के उनके प्रयासों को सफलता मिल रही है। उन्होंने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती से मिलकर लखवार के फंडिंग के लिए लोन का प्रस्ताव रखा है जिसके ब्याज भुगतान में हरियाणा की हिस्सेदारी होगी।
उन्होंने बताया कि मूल समझौते के मुताबिक लखवार बांध के पानी में से लगभग 48 फीसदी हरियाणा को मिलना है। तकरीबन एक लाख 22 हजार एकड़ फीट अतिरिक्त पानी लखवार से हरियाणा को मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखवार की तरह रेणुका डैम और उत्तराखंड में किशाऊ डैम का काम पूरा करवाने के लिए भी हरियाणा सरकार जुटी हुई है। उन्होंने दावा किया उनकी सरकार के बचे हुए तीन साल के कार्यकाल में इन तीनों बांधों से राज्य को सिंचाई और पेयजल का पानी उपलब्ध होने लगेगा।
उन्होंने बताया कि मूल समझौते के मुताबिक लखवार बांध के पानी में से लगभग 48 फीसदी हरियाणा को मिलना है। तकरीबन एक लाख 22 हजार एकड़ फीट अतिरिक्त पानी लखवार से हरियाणा को मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखवार की तरह रेणुका डैम और उत्तराखंड में किशाऊ डैम का काम पूरा करवाने के लिए भी हरियाणा सरकार जुटी हुई है। उन्होंने दावा किया उनकी सरकार के बचे हुए तीन साल के कार्यकाल में इन तीनों बांधों से राज्य को सिंचाई और पेयजल का पानी उपलब्ध होने लगेगा।
नई झीलें और तालाब, रणनीति का अहम हिस्सा
CM Khattar
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए उनकी रणनीति का दूसरा अहम हिस्सा हैं नई विकसित होने वाली झीलें।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यमुना के आसपास के निचले भूभागों पर 50 से 100 एकड़ तक के भूखंडों की पहचान के निर्देश दिए हैं। इन्हें झीलों की तरह विकसित किया जाएगा ताकि भूजल स्तर ऊंचा करने और सिंचाई में उनका इस्तेमाल हो सके।
खासतौर पर फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक में ऐसी झीलें विकसित करने की बड़ी गुंजाइश है। फरीदाबाद की बड़खल जैसी झीलों को फिर से जिंदा करने के लिए भी योजना बन रही है। उन्होंने कहा कि बाद में इन झीलों को वन विभाग को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यमुना के आसपास के निचले भूभागों पर 50 से 100 एकड़ तक के भूखंडों की पहचान के निर्देश दिए हैं। इन्हें झीलों की तरह विकसित किया जाएगा ताकि भूजल स्तर ऊंचा करने और सिंचाई में उनका इस्तेमाल हो सके।
खासतौर पर फरीदाबाद, झज्जर, रोहतक में ऐसी झीलें विकसित करने की बड़ी गुंजाइश है। फरीदाबाद की बड़खल जैसी झीलों को फिर से जिंदा करने के लिए भी योजना बन रही है। उन्होंने कहा कि बाद में इन झीलों को वन विभाग को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।