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समझिए, मंत्रिमंडल के 'नए' चेहरों के पीछे सरकार का गणित
Updated Fri, 24 Jul 2015 12:03 PM IST
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंत्रिमंडल विस्तार में अपनी पूरी चलाई है। कई दिनों से दिल्ली का चक्कर काट रहे विधायकों को खट्टर ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए यह पाठ पढ़ा दिया है कि केंद्र में अपनी पहुंच का दंभ भरने वाले नेताओं को हरियाणा में कुछ हासिल नहीं होगा। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही खट्टर ने हरियाणा में भाजपा की सेकेंड लाइन भी तैयार कर दी है।
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अभी तक मुख्यमंत्री को कैप्टन अभिमन्यु, रामबिलास शर्मा, ओम प्रकाश धनखड़ और अनिल विज जैसे कद्दावर नेताओं से गाहे-बगाहे चुनौती मिलती रही है। विस्तार में मंत्री पद की चाह में लगे कई धुरंधरों को सीएम ने किनारे कर दिया है। यही कारण है कि नारायणगढ़ के विधायक नायब सैनी मुख्यमंत्री का सबसे प्रिय विधायक है।
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सैनी को मंत्री बनाकर खट्टर ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। अंबाला से भाजपा के कद्दावर नेता अनिल विज के मुकाबले एक और नेता को खड़ा किया है। हालांकि सैनी को राज्यमंत्री ही बनाया है, लेकिन खट्टर ने अपना संदेश दे दिया है।
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केंद्र की सिफारिशों के चक्कर में कटा विपुल गोयल का पत्ता
विधायकों में पावरफुल विधायक विपुल गोयल की ऊपर से आ रहीं सिफारिशों को दरकिनार कर खट्टर ने सीमा त्रिखा को सीपीएस बनाया। इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल इसराना विधायक कृष्ण पंवार को मंत्रिमंडल में फिट करने के पीछे यह कारण रहा कि पंवार शांत तरीके से काम कर रहे थे। सीएम के अलावा वे कहीं और चक्कर नहीं काट रहे थे। साथ ही अपने अनुभव का फायदा वे मुख्यमंत्री को गाइड करने में कर रहे थे। इस कारण पंवार ने सीएम का दिल जीत लिया।
वहीं भिवानी में सांसद धर्मवीर और कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ और शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के अधिक हस्तक्षेप को देखते हुए यहां घनश्याम सर्राफ को मैदान में उतारा। असंध विधायक बख्शीश सिंह को एकमात्र सिख विधायक होने की वजह से और डा. कमल गुप्ता को सीएम का निजी व्यक्ति होने के कारण पद मिला। श्याम सिंह राणा को लेकर भी सीएम पॉजिटिव थे।
ऐसे दिया निराश विधायकों को आश्वासन:
मुख्यमंत्री ने पूरे कार्यक्रम के दौरान निराश विधायकों को कहीं यह नहीं कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार उनकी मर्जी से हुआ है। अलबत्ता यह जरूर कहते दिखे कि लिस्ट ऊपर से आई थी। सूत्रों की मानें तो एक सप्ताह पहले ही मुख्यमंत्री ने यह लिस्ट बना कर भेज दी थी, जो किन्हीं कारणों से रुकी थी। हरी झंडी मिलते ही रात में फोन की घंटिया बजनी शुरू हो गईं।
वहीं भिवानी में सांसद धर्मवीर और कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ और शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के अधिक हस्तक्षेप को देखते हुए यहां घनश्याम सर्राफ को मैदान में उतारा। असंध विधायक बख्शीश सिंह को एकमात्र सिख विधायक होने की वजह से और डा. कमल गुप्ता को सीएम का निजी व्यक्ति होने के कारण पद मिला। श्याम सिंह राणा को लेकर भी सीएम पॉजिटिव थे।
ऐसे दिया निराश विधायकों को आश्वासन:
मुख्यमंत्री ने पूरे कार्यक्रम के दौरान निराश विधायकों को कहीं यह नहीं कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार उनकी मर्जी से हुआ है। अलबत्ता यह जरूर कहते दिखे कि लिस्ट ऊपर से आई थी। सूत्रों की मानें तो एक सप्ताह पहले ही मुख्यमंत्री ने यह लिस्ट बना कर भेज दी थी, जो किन्हीं कारणों से रुकी थी। हरी झंडी मिलते ही रात में फोन की घंटिया बजनी शुरू हो गईं।
पंवार को दल बदलने का फायदा
इनेलो छोड़ भाजपा में शामिल इसराना विधायक कृष्ण पंवार को कैबिनेट मंत्री के पद से नवाजा गया है। पंवार को मंत्री पद देकर भाजपा ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह संदेश देने का भी काम किया है कि दल बदल कर आने वालों को मंत्री पद से महरूम नहीं रखा जाएगा। कृष्ण पंवार के डिप्टी स्पीकर बनाए जाने की चर्चा लंबे समय से चल रही थी। पंवार पांचवी बार विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे हैं।
घनश्याम के नाम पर देर रात तक चली कश्मकश :
भिवानी विधायक घनश्याम सर्राफ और हिसार विधायक कमल गुप्ता के नाम पर रात तक कश्मकश चलती रही। लंबी खींचतान के बाद वैश्य समुदाय से एक ही नाम लिया जाना है यह तय हुआ। इसके बाद मुख्यमंत्री ने घनश्याम सर्राफ को मंत्री पद के लिए फोन किया, लेकिन वीरवार सुबह डा. कमल गुप्ता को भी सीपीएस के लिए फोन करना पड़ा।
खट्टर में निष्ठा का फायदा सैनी को
नारायणगढ़ विधायक नायब सैनी को मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के प्रति निष्ठा और आस्था का तोहफा मिला है। सैनी लंबे समय से खट्टर के साथ जुडे़ हुए हैं और उनके करीबी हैं। उन्हें सीएम के विश्वासपात्रों में एक माना जाता है। हालांकि नायब सैनी पहली बार विधायक बने हैं। लिहाजा सैनी को मंत्री बनाकर प्रदेश के सैनी वर्ग को भी खुश किया गया है।
पहली बार विधायक और पहली बार में सीपीएस :
भाजपा सरकार ने पहली बार विधायक बने श्याम सिंह राणा, बख्शीश सिंह, सीमा त्रिखा और डा. कमल गुप्ता को सीपीएस के पद से नवाजा है।
घनश्याम के नाम पर देर रात तक चली कश्मकश :
भिवानी विधायक घनश्याम सर्राफ और हिसार विधायक कमल गुप्ता के नाम पर रात तक कश्मकश चलती रही। लंबी खींचतान के बाद वैश्य समुदाय से एक ही नाम लिया जाना है यह तय हुआ। इसके बाद मुख्यमंत्री ने घनश्याम सर्राफ को मंत्री पद के लिए फोन किया, लेकिन वीरवार सुबह डा. कमल गुप्ता को भी सीपीएस के लिए फोन करना पड़ा।
खट्टर में निष्ठा का फायदा सैनी को
नारायणगढ़ विधायक नायब सैनी को मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के प्रति निष्ठा और आस्था का तोहफा मिला है। सैनी लंबे समय से खट्टर के साथ जुडे़ हुए हैं और उनके करीबी हैं। उन्हें सीएम के विश्वासपात्रों में एक माना जाता है। हालांकि नायब सैनी पहली बार विधायक बने हैं। लिहाजा सैनी को मंत्री बनाकर प्रदेश के सैनी वर्ग को भी खुश किया गया है।
पहली बार विधायक और पहली बार में सीपीएस :
भाजपा सरकार ने पहली बार विधायक बने श्याम सिंह राणा, बख्शीश सिंह, सीमा त्रिखा और डा. कमल गुप्ता को सीपीएस के पद से नवाजा है।