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Chandigarh News: सैनी सरकार ने ली राहत की सास, हरियाणा भी चाहता है बातचीत से निकले हल
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विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण सरकार चाहती है मसले का शांतिपूर्ण हल
सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आने के बाद सरकार कमेटी के सदस्यों को लेकर करेगी चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शंभू बॉर्डर पर यथास्थिति बनाए रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा की सैनी सरकार ने चैन की सास ली है। पिछले दिनों शंभू बॉर्डर खोलने के हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ गई थीं। बॉर्डर की दूसरी तरफ पंजाब के किसान संगठनों के सदस्य बैठे हैं, जो एमएसपी समेत कई मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं। हरियाणा सरकार को आशंका थी कि बॉर्डर खुलने की स्थिति पर एक बार फिर से किसान आंदोलन भड़क सकता है। जिसका असर राज्य में ढाई महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से सरकार नहीं चाहती है कि फिर से किसान संगठन सक्रिय हो।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद सरकार व उसके अधिकारियों की चिंताएं थोड़ी कम हुई हैं। सरकार से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का डिटेल ऑर्डर आने के बाद कमेटी के सदस्यों पर चर्चा होगी। फिलहाल सरकार भी चाहती है कि इस मसले का हल बातचीत से हो और स्थानीय लोगों को जो मुश्किलें आ रही हैं, उससे उन्हें जल्द छुटकारा मिले। हरियाणा सरकार का कहना है कि किसान बातचीत के लिए दिल्ली जा सकते हैं। उन्हें किसी किसान या किसान संगठन से कोई दिक्कत नहीं है। बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। दिक्कत सिर्फ यही है कि किसान संगठन लाव लश्कर के साथ जाना चाहते हैं। इससे हरियाणा में फिर से कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष भी ऐसे माहौल का फायदा उठाता है और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में जुट जाता है। इसलिए सरकार इस मसले का हल शांति से चाहती है।
किसान संगठन बोले-हमें सिर्फ एमएसपी कानून से मतलब
किसान संगठनों का कहना है कि हमें सिर्फ एमएसपी से मतलब है। फिर चाहे सरकार कमेटी बनाकर इसकी घोषणा करे या संसद के भीतर। हरियाणा के किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विश्वास की जो कमी की बात कही है, वह बिल्कुल सही है। भाजपा सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक तरह से लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों को सिर्फ एमएसपी से मतलब है। भले ही वह बात करके बना दे या फिर बिना बात करके। किसान संगठन भी नहीं चाहते हैं कि वह सड़क पर संघर्ष करें। किसान तो सिर्फ अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का डिटेल ऑर्डर आने के बाद ही वह कमेटी के मुद्दे पर कोई बात कर पाएंगे।
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सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आने के बाद सरकार कमेटी के सदस्यों को लेकर करेगी चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शंभू बॉर्डर पर यथास्थिति बनाए रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा की सैनी सरकार ने चैन की सास ली है। पिछले दिनों शंभू बॉर्डर खोलने के हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ गई थीं। बॉर्डर की दूसरी तरफ पंजाब के किसान संगठनों के सदस्य बैठे हैं, जो एमएसपी समेत कई मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं। हरियाणा सरकार को आशंका थी कि बॉर्डर खुलने की स्थिति पर एक बार फिर से किसान आंदोलन भड़क सकता है। जिसका असर राज्य में ढाई महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। विधानसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से सरकार नहीं चाहती है कि फिर से किसान संगठन सक्रिय हो।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद सरकार व उसके अधिकारियों की चिंताएं थोड़ी कम हुई हैं। सरकार से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का डिटेल ऑर्डर आने के बाद कमेटी के सदस्यों पर चर्चा होगी। फिलहाल सरकार भी चाहती है कि इस मसले का हल बातचीत से हो और स्थानीय लोगों को जो मुश्किलें आ रही हैं, उससे उन्हें जल्द छुटकारा मिले। हरियाणा सरकार का कहना है कि किसान बातचीत के लिए दिल्ली जा सकते हैं। उन्हें किसी किसान या किसान संगठन से कोई दिक्कत नहीं है। बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं। दिक्कत सिर्फ यही है कि किसान संगठन लाव लश्कर के साथ जाना चाहते हैं। इससे हरियाणा में फिर से कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष भी ऐसे माहौल का फायदा उठाता है और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में जुट जाता है। इसलिए सरकार इस मसले का हल शांति से चाहती है।
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किसान संगठन बोले-हमें सिर्फ एमएसपी कानून से मतलब
किसान संगठनों का कहना है कि हमें सिर्फ एमएसपी से मतलब है। फिर चाहे सरकार कमेटी बनाकर इसकी घोषणा करे या संसद के भीतर। हरियाणा के किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विश्वास की जो कमी की बात कही है, वह बिल्कुल सही है। भाजपा सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक तरह से लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि किसान संगठनों को सिर्फ एमएसपी से मतलब है। भले ही वह बात करके बना दे या फिर बिना बात करके। किसान संगठन भी नहीं चाहते हैं कि वह सड़क पर संघर्ष करें। किसान तो सिर्फ अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का डिटेल ऑर्डर आने के बाद ही वह कमेटी के मुद्दे पर कोई बात कर पाएंगे।
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