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चंडीगढ़ के हरविंदर भोला ने जीती दक्षिण डेयर मोटर स्पोर्ट्स रैली, सबसे मुश्किल पर एडवेंचर से भरपूर

Fri, 09 Aug 2019 11:04 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 09 Aug 2019 11:04 AM IST
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harvinder bhola of chandigarh wins dakshin dare motor sports rally
मोटर स्पोर्ट्स रैली के विजेता - फोटो : अमर उजाला
मोटर स्पोर्ट्स में भारत की सबसे कठिन रैली में एक मानी जाने वाली दक्षिण डेयर मोटर स्पोर्ट्स रैली में चंडीगढ़ के हरविंदर भोला का जलवा रहा। इसमें उनके को-ड्राइवर (नेविगेटर) चिराग ठाकुर भी शामिल रहे। इस जोड़ी ने दक्षिण डेयर रैली में ओवरऑल सेकेंड रनरअप और अपनी श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल किया। यह रैली कर्नाटक में हुई।
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इसमें देश के टॉप मोटर स्पोर्ट्स के33 ड्राइवर्स शुमार हुए, जिन्होंने 4 दिन की रैली में कुल 15000 किलोमीटर की दूरी तय की। तेज बारिश, मिट्टी भरे रास्ते और नए चैलेंज से भरे रूटों से होते हुए मोटर स्पोर्ट्स के ड्राइवर्स ने दक्षिण डेयर रैली में  विभिन्न इवेंटों में ट्राफियां जीतीं। इसमें सिटी के हरविंदर भोला ने 1400 सीसी चार गुणा चार में तीसरे स्थान और 1400 सीसी से ऊपर की श्रेणी में प्रथम रहे। रैली में जीतने के बाद शहर पहुंच कर हरविंदर भोला और चिराग ठाकुर ने अपने अनुभव साझे किए।
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खेल है महंगा, स्पोंसर्स नहीं मिलते
हरविंदर भोला ने बताया कि मोटर स्पोर्ट्स काफी महंगा खेल है। इस खेल में युवा आना तो चाहते हैं, लेकिन इसके लिए जल्दी से स्पोंसर्स नही मिलते। बिना स्पोंसर्स के आप इस खेल में अधिक देर तक टिक नही पाएंगे। उन्होंने बताया कि एक रैली में अपनी जिप्सी को तैयार करने और उसमें शामिल होने के लिए तीन से चार लाख रुपये तक खर्चा आता है।
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गाड़ी कीचड़ में फंसी, फिर भी बना ली मजबूत पकड़

हरविंदर ने बताया कि यह रैली भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण रैली है। मोटर स्पोर्ट्स से जुड़े हर ड्राइवर सालभर इस रैली में हिस्सा लेने का इच्छुक रहता है। इस बार रैली में बारिश सबसे बड़ी बाधा रही, जिसने ट्रैक  फिसलन भरा और अधिक कठिन बना दिया। रैली के दौरान गाड़ी फिसल कर कीचड़ में फंस गई। जिसे ड्राइवर्स के साथ मिलकर कड़ी मेहनत से बाहर निकाला। हालांकि इसमें हमारा महत्वपूर्ण वक्त भी खराब हुआ। इसके बावजूद हमने दोबारा से रैली में अपनी पकड़ मजबूत बना ली।

नेविगेटर की भूमिका महत्वपूर्ण
चिराग ठाकुर ने बताया कि रैली में एक हद तक ड्राइवर रोड देख सकता है। लेकिन एकदम से मोड़ आना और नीचे की और जाना वह खुद देख नहीं पाता। ऐसे में उसके साथ बैठे को-ड्राइवर को नेविगेटर की भूमिका शुरू होती है जोकि हाथाें मे मैप और इलेक्ट्रोनिक गैजेट लेकर बैठा होता है। जिसकी मदद से वह आने वाले रूट के बारे में ड्राइवर को जानकारी देता है।
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