संसद में गूंजा चंडीगढ़ का मुद्दा: हरसिमरत कौर ने कहा- पंजाब की हिस्सेदारी कम करने का प्रयास, केंद्रीय सेवा नियमों का जताया विरोध
हरसिमरत कौर बादल ने बताया कि कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब की हिस्सेदारी कम कर दी थी। बोर्ड के प्रबंधन को बांध सुरक्षा के बहाने केंद्र के अधीन लाया गया है।
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शिरोमणि अकाली दल ने संसद में चंडीगढ़ को पंजाब में मिलाने की मांग उठाई। पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने संसद से राजीव-लौंगोवाल समझौते की पुष्टि करने का आह्वान किया। बठिंडा सांसद ने शून्यकाल के दौरान चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों पर केंद्रीय सिविल सेवा नियमों का विस्तार करने के केंद्र के कदम का विरोध किया। उन्होंने इसे चंडीगढ़ पर पंजाब की हिस्सेदारी कम करने का एक और प्रयास करार दिया।
हरसिमरत ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के अनुसार जब अखंड पंजाब का विभाजन हुआ तो यह निर्णय लिया गया कि चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की अस्थायी राजधानी होगा। यह भी निर्णय लिया गया कि केंद्र शासित प्रदेश में कर्मचारियों की तैनाती में पंजाब और हरियाणा की 60:40 की हिस्सेदारी होगी। चंडीगढ़ में भर्ती के लिए किसी अन्य कैडर से नौकरी का कोई प्रावधान नहीं था।
उन्होंने कहा कि समय के साथ इस सिद्धांत को कमजोर कर दिया गया और अलग-अलग कैडर बनाए गए और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों को भी सिविल और पुलिस सेवाओं में चंडीगढ़ में तैनात किया गया। केंद्रीय सेवा नियमों को लागू करना जो अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तर्ज पर चंडीगढ़ में लागू किए गए हैं, चंडीगढ़ पर पंजाब के दावे को कमजोर करने का एक और प्रयास है। यह राजीव-लौंगोंवाल समझौते के भी खिलाफ है और इसका उद्देश्य राज्य से पंजाब की राजधानी छीनना है।
सांसद ने कहा कि राजीव-लौंगोवाल समझौते में 1986 में चंडीगढ़ को पंजाब में मिलाने का प्रावधान है। ऐसा नहीं करना संघवाद के सिद्धांत का उल्लंघन है, क्योंकि चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपा जाना पंजाब और पंजाबियों के लिए एक भावनात्मक मुद्दा है। उन्होंने संसद को पंजाब और उसके लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए समझौते की पुष्टि करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ हमारी राजधानी है और इसे पंजाब में तबदील किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में पंजाब की हिस्सेदारी कम कर दी थी। बोर्ड के प्रबंधन को बांध सुरक्षा के बहाने केंद्र के अधीन लाया गया है। बोर्ड के सदस्य तथा पंजाब सरकार के जो प्रतिनिधि ऊंचे ओहदों पर थे, को 56 साल से जारी व्यवस्था से हटा दिया गया।
पंजाब का हक खत्म कर रही भाजपा सरकार: राजविंदर
महिला किसान यूनियन ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में पंजाब की सदस्यता समाप्त करने के बाद चंडीगढ़ के कर्मचारियों पर केंद्रीय कानून लागू करके राजधानी चंडीगढ़ से पंजाब के कानूनी अधिकार समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की कड़ी निंदा की है। यूनियन का कहना है कि संघीय ढांचे का समर्थन करने वाले सभी पंजाबियों और राज्यों को कड़ा विरोध करना चाहिए।
यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजविंदर कौर राजू ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ नगर निगम और पंजाब चुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद राजनीतिक पैंतरेबाजी के जरिये मौजूदा प्रणाली की जगह चंडीगढ़ के कर्मचारियों पर केंद्रीय कानून को लागू करके चंडीगढ़ पर पंजाब के कानूनी अधिकार को खत्म करने की कोशिश की है। इस तरह पंजाब का 60 प्रतिशत हिस्सा खत्म कर पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 का सीधा उल्लंघन किया जा रहा है।