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हरीश रावत की डिनर डिप्लोमेसी आई काम, नवजोत सिद्धू के कांग्रेस छोड़ने के कयासों पर लगा विराम
Sat, 03 Oct 2020 10:19 AM IST
खुशबू गोयल
अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 03 Oct 2020 10:19 AM IST
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पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत
- फोटो : अमर उजाला
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आखिरकार पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत की डिनर डिप्लोमेसी एक बार फिर काम आई और नवजोत सिद्धू के कांग्रेस छोड़ने के कयासों पर विराम लग गया। अरे! सिद्धू साब, आप यहां। क्या घर की चाय नहीं पिलाओगे... सर, चाय नहीं खाना भी खिलाऊंगा। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी हरीश रावत वीरवार देर शाम श्री हरमंदिर साहिब माथा टेकने के बाद सांसद गुरजीत औजला के साथ सर्किट हाउस पहुंचे, तब पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू सर्किट हाउस के मुख्य भवन के बाहरी कमरे में बैठे हुए थे। रावत को इस बात की जानकारी नहीं थी।
रावत जब औजला के साथ कमरे में पहुंचे, तो सिद्धू को कमरे में देख कर चौंक गए। दुआ-सलाम के बाद सिद्धू रावत को खाने का न्योता देकर अपने घर रवाना हो गए। वहां उन्होंने रावत के लिए रात्रि भोज की तैयारी की। रावत भी सर्किट हाउस में मिलने के लिए आए कांग्रेसियों से जल्द मुलाकात खत्म कर सिद्धू के घर की तरफ रवाना हो गए। रावत के सिद्धू के घर जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि सिद्धू कांग्रेस का हाथ नहीं छोड़ेंगे। सिद्धू के घर पहुंचने पर फूलों के गुच्छ देकर रावत का स्वागत किया गया। सिद्धू और रावत कुछ देर तक घर के पार्क में टहलते रहे। फिर खाने की मेज पर रावत और सिद्धू के बीच लगभग दो घंटे तक बातचीत हुई।
सूत्रों के अनुसार रावत के सामने सिद्धू ने उन मुद्दों पर कैप्टन सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए, जिन मुद्दों पर सरकार सत्ता में आई थी। नशे के मुद्दे पर अकाली नेताओं पर अभी तक कोई कार्रवाई न करने और बेअदबी मामले में सरकार की जांच पर भी सिद्धू ने सवाल उठाए। इस पर रावत ने सिद्धू से कहा कि वह इन सभी मुद्दों पर कैप्टन अमरिंदर और सोनिया गांधी से बात करेंगे। रावत सिद्धू के घर से रात लगभग 11.30 निकले, सिद्धू उन्हें बाहर तक छोड़ने आए, लेकिन मीडिया से बात नहीं की। सूत्रों के अनुसार, रावत ने सिद्धू को राष्ट्रीय राजनीति में अपना मुकाम हासिल करने का सुझाव भी दिया। हालांकि सिद्धू ने खुद को पंजाब की राजनीति तक सीमित रहने की बात कही।
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रावत जब औजला के साथ कमरे में पहुंचे, तो सिद्धू को कमरे में देख कर चौंक गए। दुआ-सलाम के बाद सिद्धू रावत को खाने का न्योता देकर अपने घर रवाना हो गए। वहां उन्होंने रावत के लिए रात्रि भोज की तैयारी की। रावत भी सर्किट हाउस में मिलने के लिए आए कांग्रेसियों से जल्द मुलाकात खत्म कर सिद्धू के घर की तरफ रवाना हो गए। रावत के सिद्धू के घर जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि सिद्धू कांग्रेस का हाथ नहीं छोड़ेंगे। सिद्धू के घर पहुंचने पर फूलों के गुच्छ देकर रावत का स्वागत किया गया। सिद्धू और रावत कुछ देर तक घर के पार्क में टहलते रहे। फिर खाने की मेज पर रावत और सिद्धू के बीच लगभग दो घंटे तक बातचीत हुई।
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सूत्रों के अनुसार रावत के सामने सिद्धू ने उन मुद्दों पर कैप्टन सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए, जिन मुद्दों पर सरकार सत्ता में आई थी। नशे के मुद्दे पर अकाली नेताओं पर अभी तक कोई कार्रवाई न करने और बेअदबी मामले में सरकार की जांच पर भी सिद्धू ने सवाल उठाए। इस पर रावत ने सिद्धू से कहा कि वह इन सभी मुद्दों पर कैप्टन अमरिंदर और सोनिया गांधी से बात करेंगे। रावत सिद्धू के घर से रात लगभग 11.30 निकले, सिद्धू उन्हें बाहर तक छोड़ने आए, लेकिन मीडिया से बात नहीं की। सूत्रों के अनुसार, रावत ने सिद्धू को राष्ट्रीय राजनीति में अपना मुकाम हासिल करने का सुझाव भी दिया। हालांकि सिद्धू ने खुद को पंजाब की राजनीति तक सीमित रहने की बात कही।
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दूलो और बाजवा सार्वजनिक रूप में पार्टी विरोधी बयान न दें
राज्य सभा सदस्यों प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलो के कैप्टन के साथ के विवाद पर रावत ने कहा कि उनकी दोनों वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के साथ बातचीत हुई है। उनसे आग्रह किया गया है, जो भी शिकायत है वह उन्हें बताई जाए। कोई भी वैचारिक मतभेद हैं तो उन्हें पार्टी प्लेटफार्म पर रखा जाए। कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से बयान नहीं देगा। कांग्रेस पार्टी में कोई मतभेद नहीं हैं।
किसान विरोधी कानून का विरोध करने वाले कैप्टन देश के पहले सीएम
किसानों के आंदोलन पर रावत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की खूब पीठ थपथपाई। रावत ने कहा कि कैप्टन देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने किसान विरोधी इस कानून के विरुद्ध आवाज उठाई। राहुल गांधी पहले नेता थे जिन्होंने इस कानून का विरोध किया था।
जब अकाली दल इस कानून के लिए तालियां बजा रहा था, तब पंजाब का किसान सड़कों पर आ चुका था। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा देकर किसानों को नमन किया था, वही किसान अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर बैठे हैं।
किसान विरोधी कानून का विरोध करने वाले कैप्टन देश के पहले सीएम
किसानों के आंदोलन पर रावत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की खूब पीठ थपथपाई। रावत ने कहा कि कैप्टन देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने किसान विरोधी इस कानून के विरुद्ध आवाज उठाई। राहुल गांधी पहले नेता थे जिन्होंने इस कानून का विरोध किया था।
जब अकाली दल इस कानून के लिए तालियां बजा रहा था, तब पंजाब का किसान सड़कों पर आ चुका था। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने जय जवान जय किसान का नारा देकर किसानों को नमन किया था, वही किसान अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर बैठे हैं।