गुरुग्राम में भूजल स्तर की हालत गंभीर, लोग बूंद-बूंद को तरसेंगे: हाईकोर्ट
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गुरुग्राम में निर्माण कार्य में बिल्डरों द्वारा बड़े स्तर पर भूजल के इस्तेमाल पर कड़ा संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हालात गंभीर हैं। वह दिन दूर नहीं जब लोग एक-एक बूंद को तरसेंगे। हाईकोर्ट ने अब केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और गुरुग्राम नगर निगम से भूजल के मौजूदा हालात की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।
चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने वर्ष 2008 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं वे बेहद गंभीर हैं। अगर इस तरह से भूजल का अंधाधुंध दोहन जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब यहां के लोग पानी की एक एक बूंद को भी तरसेंगे।
उन्होंने कहा कि यह याचिका वर्ष 2008 में दायर की गयी थी जिस पर समय-समय पर हाईकोर्ट निर्देश जारी करता रहा लेकिन किसी कारणवश इस याचिका पर वर्ष 2014 के बाद सुनवाई नहीं हो पाई।
चीफ जस्टिस ने कहा कि इतने वर्ष बाद अब सुनवाई हुई तो याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को जो जानकारी दी है वह बेहद ही गंभीर है। ऐसे में यहां के भूमिगत जल के मौजूदा हालात का जायजा लिया जाना बेहद ही जरूरी है। लिहाजा इस मामले के सभी पक्षों से यह जानकारी जुटाई जानी अब आवश्यक है।
यह है मामला
गुरुग्राम में बिल्डरों द्वारा बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों में बोरवेल के जरिए भूमिगत जल के दुरुपयोग को लेकर हाईकोर्ट में वर्ष 2008 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। तब हाईकोर्ट ने सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर उनके पानी के स्रोत की जानकारी मांगी थी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि जिस किसी ने भी बिना सरकार से अनुमति लिए भूमिगत जल को निर्माणकार्य में इस्तेमाल किया है वह इसे तत्काल बंद करे।