फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Gurdaspur administration new initiative to stop stubble burning

गुरदासपुर प्रशासन की अपील: पराली न जलाएं किसान... बने पर्यावरण संरक्षक और सरकारी दफ्तरों में पाएं प्राथमिकता

Mon, 02 Oct 2023 02:43 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 02 Oct 2023 02:43 PM IST
सार

गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि हमारा उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से परहेज करने के लिए प्रेरित करना है जो वायु प्रदूषण का कारण बनता है। पर्यावरण के संरक्षक प्रमाण पत्र धारकों को सरकारी कार्यालयों में किसी भी काम के लिए कुछ विशेषाधिकार मिलेंगे। प्रमाणपत्र धारक को कतारों में प्राथमिकता दी जाएगी

विज्ञापन
Gurdaspur administration new initiative to stop stubble burning
पराली जलाते किसान - फोटो : PTI

विस्तार

पंजाब में किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। अब गुरदासपुर जिला प्रशासन ने पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए एक नई पहल की है। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने से परहेज करने वाले किसानों को पर्यावरण के संरक्षक के रूप में मान्यता दी जाएगी और प्रशंसा प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इसे दिखाकर वे सरकारी कार्यालयों में प्राथमिकता पा सकते हैं और लंबी कतारों से बच सकते हैं। 
विज्ञापन

 

यह भी पढ़ें: Jalandhar: घर के बाहर बंद ट्रंक में मिली तीन लापता बहनों की लाश, पिता पर ही हत्या का आरोप

विज्ञापन


केवल किसान ही नहीं, पराली न जलाने की सूचना देने वाले गांवों को भी पर्यावरण के संरक्षक प्रमाण पत्र दिया जाएगा और किसी भी विकास परियोजना के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों को पराली जलाने से परहेज करने के लिए प्रेरित करना है जो वायु प्रदूषण का कारण बनता है। पर्यावरण के संरक्षक प्रमाण पत्र धारकों को सरकारी कार्यालयों में किसी भी काम के लिए कुछ विशेषाधिकार मिलेंगे। प्रमाणपत्र धारक को कतारों में प्राथमिकता दी जाएगी जिससे प्रतीक्षा समय कम हो जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि यदि किसी गांव में पराली नहीं जलाने की सूचना मिलती है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर किसी भी विकास परियोजना के लिए राशि मुहैया कराई जाएगी। अग्रवाल ने कहा कि इस पहल के लिए उन्हें किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।


पंजाब में हर साल 1.8 करोड़ टन पराली का उत्पादन
गौरतलब है कि धान की कटाई के बाद रबी फसल गेहूं की बुआई का अंतराल बहुत कम होता है। इसलिए, किसान फसल के अवशेषों को जल्दी से साफ करने और अगली फसल बोने की तैयारी के लिए अपने खेतों में आग लगा देते हैं। लगभग 31 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले पंजाब में हर साल लगभग 1.8 करोड़ से 2 करोड़ टन पराली का उत्पादन होता है। इसमें से 120 लाख टन का निपटान इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन विधियों के माध्यम से किया जाता है। अकेले गुरदासपुर जिले की बात करें तो 10 लाख टन पराली का उत्पादन होता है।

55 हॉटस्पॉट की पहचान
गुरदासपुर प्रशासन की योजना इन-सीटू (फसल के अवशेषों को खेतों में मिलाना) और एक्स-सीटू (पुआल को ईंधन के रूप में उपयोग करना) तरीकों से प्रबंधित करने की है। अभी तक 55 हॉटस्पॉट की पहचान की और पराली जलाने से रोकने के लिए बड़े पैमाने पर जागरुकता अभियान चलाया गया है। जिला प्रशासन ने ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए पराली एकत्र करने के लिए कुछ कंपनियों के साथ गठजोड़ करने का प्रयास किया है। अग्रवाल ने कहा कि पैलेट यूनिट स्थापित करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग ईंट भट्टों को ईंधन देने के लिए किया जा सकता है।

24,000 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें
राज्य कृषि विभाग फसल के मौसम के दौरान पराली जलाने से रोकने के लिए राज्य भर में 24,000 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध कराएगा। इन मशीनों में इन-सीटू प्रबंधन के लिए सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर, स्मार्ट सीडर, जीरो टिल ड्रिल, सरफेस सीडर, सुपर सीडर, क्रॉप रीपर, श्रब मास्टर और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए बेलर और स्ट्रॉ रेक शामिल हैं। 350 करोड़ रुपये की धान की पराली प्रबंधन योजना के तहत, राज्य का कृषि विभाग पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, मोहाली, एसबीएस नगर और मलेरकोटला जिलों में पराली जलाने की शून्य घटनाओं का लक्ष्य बना रहा है।

जिले को 79 क्लस्टर में बांटा
डीसी हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि इसके साथ ही प्रशासन किसानों को आग से होने वाले नुकसान की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है और साथ ही जिले भर में ग्रामीण स्तर पर कर्मचारियों को तैनात किया गया है जो पराली की आग रोकने में निर्णायक भूमिका अदा करेगें। अग्रवाल ने बताया कि जिले को 79 क्लस्टर में बांटा गया है। प्रत्येक क्लस्टर में कृषि अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही क्लस्टर टीम के साथ पुलिस विभाग के कर्मचारियों को भी तैनात किया जा रहा है।

साथ ही धारा 144 के तहत धान की पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस संबंध में पहले ही निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि क्लस्टर स्तरीय टीमों द्वारा गांव स्तर पर पहुंचकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धान की पराली में बिल्कुल भी आग न लगे। उन्होंने कहा कि अगर कोई पराली को आग लगाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed