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Chandigarh News: जीएसटी का झटका, 7000 उत्पादों के रेट तय करने में पसीने छूटे

Wed, 24 Sep 2025 01:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Sep 2025 01:53 AM IST
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GST shock, rate fixing for 7000 products is a struggle
चंडीगढ़: जीएसटी स्लैब में बदलाव ने चंडीगढ़ के जनरल मर्चेंट कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। 7000 से ज्यादा उत्पादों की नई रेट लिस्ट तैयार करना और पुराने स्टॉक को जल्दी खत्म करने का दबाव व्यापारियों के लिए पहाड़ जैसी चुनौती बन गया है। कंपनियों से नए एमआरपी वाला माल आने में देरी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
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पुराना स्टॉक, नया रेट: हिसाब-किताब में उलझे व्यापारी
अनाज मंडी के कारोबारी देवेंद्र कुमार ने बताया कि हजारों उत्पाद पुराने जीएसटी स्लैब के हिसाब से गोदामों में पड़े हैं। नए एमआरपी वाला माल आएगा लेकिन पहले पुराना स्टॉक बेचना जरूरी है, वरना भारी नुकसान होगा। 7000 से ज्यादा छोटे-बड़े उत्पादों के रेट को सर्वर पर अपडेट करना और नई कीमतें तय करना किसी जंग से कम नहीं।
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ग्रेन मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहित सूद ने कहा, जिनके पास सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर हैं, उन्होंने 12% से 5% स्लैब वाले उत्पादों को अपडेट कर लिया है। लेकिन 28% से 18% स्लैब वाले सामान की गणना में खासी दिक्कत हो रही है। उदाहरण के लिए, साबुन जैसे उत्पाद दो अलग-अलग स्लैब (5% और 18%) में हैं, जिन्हें छांटना और रेट तय करना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
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छोटे दुकानदारों पर दोहरी मार
लोकल स्तर पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों की हालत और पतली है। न कंप्यूटर, न सॉफ्टवेयर—उन्हें हर सामान का नया रेट कैलकुलेटर से निकालना या हाथ से लिखना पड़ रहा है। मंडी कारोबारी राहुल गोयल ने बताया, लगभग 700 उत्पादों के रेट की गणना अलग से करनी पड़ रही है। यह समय और मेहनत दोनों खा रहा है।

कंपनियों की चाल, उपभोक्ताओं को राहत नहीं
कारोबारियों का आरोप है कि जीएसटी स्लैब बदलाव की चर्चा शुरू होते ही कई कंपनियों ने बेस रेट बढ़ा दिए। मोहित सूद ने खुलासा किया, एक देसी घी कंपनी ने एमआरपी तो वही रखा लेकिन होलसेल रेट बढ़ा दिया। जीएसटी 12% से 5% होने के बाद भी उपभोक्ताओं को कोई खास फायदा नहीं मिला। यह सीधा-सीधा धोखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मुद्दे को जीएसटी अधिकारियों और अन्य मंच पर जोर-शोर से उठाया जाएगा।


आगे की राह: उम्मीद और चुनौतियां
कारोबारी उम्मीद कर रहे हैं कि नए एमआरपी वाले माल की आपूर्ति जल्द शुरू होगी, जिससे पुराने स्टॉक का बोझ कम होगा लेकिन तब तक मैन्युअल हिसाब-किताब और स्टॉक मैनेजमेंट की जद्दोजहद जारी रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को जीएसटी स्लैब बदलाव के दौरान कारोबारियों को तकनीकी और नीतिगत सहायता देनी चाहिए ताकि यह प्रक्रिया आसान हो सके।
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