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Ground Report : इतिहास दोहराने की राह पर संगरूर, यहां नहीं टिकता किसी का गुरूर; सीएम मान की प्रतिष्ठा दांव पर

Mon, 27 May 2024 05:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा महेंद्र तिवारी, संगरूर
महेंद्र तिवारी, संगरूर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 27 May 2024 05:58 AM IST
सार

किसी ऐसी-वैसी घटना पर संगरूर वाले रवि दियोल के एक गाने के अंदाज में बड़े भोलेपन से सफाई देते हैं। पर, दूसरा पहलू यह है कि ये सियासी रूप से बेहद जागरूक और अपने नेता पर पैनी नजर रखते हैं। इसे दो तथ्यों से अच्छी तरह से समझ सकते हैं।

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Ground Report Sangrur... CM Mann reputation at stake
सुखपाल सिंह खैरा, गुरमीत सिंह मीत, अरविंद खन्ना और इकबाल सिंह झूंदा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साडा नी कसूर, साडा जिला संगरूर' (हमारा नहीं कसूर, हमारा जिला संगरूर)। किसी ऐसी-वैसी घटना पर संगरूर वाले रवि दियोल के इस गाने के अंदाज में बड़े भोलेपन से सफाई देते हैं। पर, दूसरा पहलू यह है कि ये सियासी रूप से बेहद जागरूक और अपने नेता पर पैनी नजर रखते हैं। इसे दो तथ्यों से अच्छी तरह से समझ सकते हैं।

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पहला, यहां के मतदाता अव्वल तो किसी को लगातार मौका देना नहीं चाहते। दे भी दिया, तो इतराने नहीं दिया। दिग्गज अकाली नेता सुरजीत सिंह बरनाला के बाद भगवंत मान इकलौते हैं, जिन्हें यहां के लोगों ने लगातार दो बार (वर्ष 2014 और 2019) संसद भेजा। दूसरा उदाहरण ताजा है। मार्च 2022 में विधानसभा चुनाव हुआ, तो यहां के लोगों ने आप को सभी नौ सीटें जिता दीं। मान भी यहीं की धूरी विधानसभा सीट से जीते। आप की सरकार बनी तो मान सीएम और यहां के तीन अन्य विधायक मंत्री बन गए। जीत की खुमारी उतरी भी नहीं थी कि लोकसभा सीट पर उपचुनाव का एलान हो गया। मगर, संगरूर के लोगों ने अपने नए नवेले सीएम की प्रतिष्ठा का भी ध्यान नहीं रखा और आप के प्रत्याशी गुरमेल सिंह को हराकर शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता और खालिस्तान समर्थक पूर्व आईपीएस सिमरनजीत सिंह मान (तब 77 साल के थे) को जिता दिया।
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उपचुनाव के नतीजे से यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि उपचुनाव की हार के बाद यह सीट कैसे मुख्यमंत्री मान की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई है।  ननकियाना साहिब गुरुद्वारा के पास मिलीं बीएससी की छात्रा जसजीत कहती हैं कि मौजूदा सांसद सिमरनजीत सिंह मान से लोग खुश नहीं हैं। ऐसे में जनता इतिहास दोहराए, तो कोई ताज्जुब नहीं। सिमरनजीत सिंह इस बार भी मैदान में हैं।
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मान ने अपने कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह को उतारा
भगवंत मान ने अपनी कैबिनेट में खेल व युवा मामले मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर को उतारा है। सुनाम में मिले आप समर्थक गुरबिंदर सिंह कहते हैं कि जिले से मंत्री हरपाल चीमा और अमन अरोड़ा के साथ आप की पूरी टीम मीत हेयर के समर्थन में जुटी है। इस बार दिक्कत नहीं है। लेकिन, यहीं मिले किसान कमलजीत सिंह कहते हैं, आप का ग्राफ लुढ़का है। पर, आप विरोधी वोट तीन-चार जगह बंटने से लड़ेंगे सब उसी से।

कांग्रेस : विधायक सुखपाल पर दांव
कांग्रेस ने भुलत्थ से विधायक सुखपाल खैरा को उतारा है। खैरा 2015 में कांग्रेस छोड़ आप में चले गए थे। वह नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। बाद में पंजाब एकता पार्टी बनाई और 2019 का चुनाव बठिंडा से पूर्व मंत्री हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ लड़ा। हार गए। 2021 में खैरा फिर कांग्रेस में लौट आए और 2022 में विधायक बने। ड्रग्स मामले में गिरफ्तार भी हुए थे। सुखपाल के पिता सुखजिंदर सिंह खैरा अकाली दल सरकार में मंत्री रहे हैं।

भाजपा : पूर्व विधायक अरविंद  खन्ना के सामने कठिन चुनौती
भाजपा के साथ गठबंधन में यह सीट शिअद (ब) लड़ती रही है। गठबंधन नहीं होने से भाजपा ने पूर्व विधायक अरविंद खन्ना को उम्मीदवार बनाया है। खन्ना दिसंबर 2022 से पंजाब भाजपा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और भाजपा पंजाब की कोर कमेटी और वित्त समिति के सदस्य भी हैं। वह 2002 से 2007 तक संगरूर और 2012 से 2014 तक धूरी से विधायक रहे। वह कांग्रेस से भी जुड़े रहे हैं।

शिअद : झूंदा मैदान में, लेकिन ढींढसा नाराज
शिरोमणि अकाली दल (ब) ने दो बार विधायक रहे इकबाल सिंह झूंदा को उतारा है। झूंदा, अकाली दल प्रधान सुखबीर सिंह बादल के भरोसेमंद माने जाते हैं। पर, पूर्व मंत्री सुखदेव सिंह ढींढसा नाराज बताए जा रहे हैं। बरनाला में मिले जितेंदर सिंह बताते हैं कि ढींढसा अपने बेटे पूर्व मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा के लिए अकाली दल (ब) से टिकट चाह रहे थे। इसलिए ढींढसा ने अपनी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) का शिअद में विलय भी कर दिया। लेकिन, बेटे को टिकट न मिलने से नाराज ढींढसा घर बैठ गए हैं।

महिलाओं, किसानों पर आप का दारोमदार
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के प्रो. बलविंदर सिंह टिवाणा कहते हैं, बिजली फ्री होने से लोगों का हर महीने दो से ढाई हजार रुपये बच रहा है। इससे आम लोगों के साथ ही कारोबारी तबका भी खुश है। हालांकि, मलेरकोटला में मिले दुकानदार. मो. इरफान कहते हैं, आप से लोगों में निराशा है। उसके बड़े-बड़े वादे भी लोगों को जुमला लगने लगे हैं। आप को कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (ब) से चुनौती मिलेगी।

किसानों में एमएसपी को लेकर आशंका
पूरे देश में पंजाब के किसानों का आंदोलन चर्चा में है। दिड़बा में मिले परचून दुकानदार सोहनलाल बताते हैं, यहां करीब 80 फीसदी किसान हैं। बड़ी जोत, फ्री बिजली और सिंचाई है। अनाज एमएसपी पर मंडी में बिक जाता है। पैसा तीसरे दिन आ जाता है। पर, किसानों के मन में यह बात बैठ गई है कि मोदी एमएसपी खत्म करना चाहते हैं। जब तक यह आशंका दूर नहीं होती, भाजपा यहां पैर नहीं जमा सकती।


पंजाब के लोगों की बड़ी चिंता
धुरी के निकट बुगरा कृषि मंडी में अपना गेहूं लेकर आए किसान जगदेव सिंह कहते हैं, यहां करीब 200 बाहरी मजदूर काम कर रहे हैं। हर दो गांव बाद मंडी है। हर मंडी में यही स्थिति है। कुछ साल बाद देखिएगा पंजाब में बाहरियों का दबदबा हो जाएगा। पहले पढ़-लिख कर युवा विदेश जाते थे और पैसा कमाकर भेजते थे। अब पढ़ाई के समय ही चले जा रहे हैं। यहां का मोटा पैसा बाहर जा रहा है। जो एक बार गया, लौटना ही नहीं चाहता।

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