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पीयू छात्रसंघ चुनाव: चुनावी अखाड़ा बना पीयू, अपने संगठन को जिताने के लिए पंजाब-हरियाणा की सरकारें भी कूदीं
Sat, 15 Oct 2022 05:00 PM IST
निवेदिता वर्मा
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 15 Oct 2022 05:00 PM IST
सार
पंजाब सरकार की ओर से पीयू परिसर के छात्रसंघ चुनाव में संगठन सीवाईएसएस की जीत दिलवाने के लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है। शुरुआत से संगठन को पीयू में लांच करने से लेकर अब चुनाव प्रचार में पंजाब के एमएलए लगातार पीयू का दौरा कर रहे हैं
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चंडीगढ़ पंजाब यूनिवर्सिटी में चुनाव प्रचार तेज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में मुकाबला केवल छात्र नेताओं तक न होकर हरियाणा और पंजाब सरकार बनाम अन्य छात्र संगठन बन गया है। दोनों राज्यों की सरकारें अपने छात्र संगठनों को चुनाव में जितवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। दो दिन पहले तक अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाला संगठन इनसो हरियाणा में चल रही गठबंधन की सरकार के दबाव के चलते एबीवीपी के साथ मिलकर जनरल सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर चुनाव लड़ने को तैयार हो गया है।
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इनसो ने सबसे पहले 8 नवंबर को ही अध्यक्ष के पद के उम्मीदवार की घोषणा कर चुनाव प्रचार शुरू कर दिया था। इनसो की ओर से दस साल बाद अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने के लिए घोषणा की गई थी और संगठन ने इसके लिए प्रचार भी जोर-शोर के साथ किया लेकिन एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही पासा पलट गया। हरियाणा सरकार के राज्य के गठबंधन और पीयू में एबीवीपी को अध्यक्ष पद पर जितवाने की जंग के दबाव के कारण इनसो को पीयू में अध्यक्ष पद की दावेदारी छोड़नी पड़ी और नीचे की दो सीट जनरल सेक्रेटरी और ज्वाइंट सेक्रेटरी पर इस बार का चुनाव लड़ने के लिए सहमत होना पड़ा।
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सीवाईएसएस के प्रचार के लिए पंजाब के एमएलए कर रहे पीयू का दौरा
पंजाब सरकार की ओर से पीयू परिसर के छात्रसंघ चुनाव में संगठन सीवाईएसएस की जीत दिलवाने के लिए पूरा जोर लगाया जा रहा है। शुरुआत से संगठन को पीयू में लांच करने से लेकर अब चुनाव प्रचार में पंजाब के एमएलए लगातार पीयू का दौरा कर रहे हैं जबकि चुनाव की घोषणा के बाद पीयू में बाहरी लोगों के आने पर रोक है, बावजूद इसके सरकार के नुमाइंदे पीयू में लगातार दिखाई दे रहे हैं।
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एमएलए और नेता हरियाणा और पंजाब के छात्रों के परिवारों से कर रहे संपर्क
सबसे ज्यादा जोरआजमाइश अध्यक्ष पद को लेकर हो रही है। पीयू में इस जंग को जीतने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार के एमएलए और नेता पीयू में पढ़ रहे दोनों ही राज्यों के विद्यार्थियों के परिवारों के साथ भी संपर्क बना रहे हैं। पीयू छात्रसंघ चुनाव में उम्मीदवारों को वोट डलवाने के लिए छात्रों के साथ साथ उनके परिवारों को भी नेता कैंपेनिंग में शामिल कर वोट के लिए आग्रह कर रहे हैं।
चार छात्र संगठन बिना राजनीतिक दबाव के अध्यक्ष पद की दौड़ में
पीयू में इस बार अध्यक्ष पद के लिए आठ दावेदार हैं। इसमें चार छात्र संगठन ऐसे हैं जिन पर किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है। हालांकि इनमें तीन छात्र संगठन अलग अलग राजनीतिक विचारधारा से जरूर जुड़े हैं। इनमें छात्र संगठन पुसू, पीएसयू ललकार, एसएफएस और सथ शामिल हैं। सथ पहली बार पीयू छात्रसंघ चुनाव में भागीदारी कर रहा है।
बिना जीत के छात्रों को एबीवीपी की कार्यशैली दिखा पाना मुश्किल
इस बार पीयू छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी का लक्ष्य अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करना है। एबीवीपी एक बार भी काउंसिल में नहीं आ पाई है। बिना जीत के छात्रों को संगठन की कार्यशैली दिखा पाना मुश्किल है। इस बार पहले के मुकाबले संगठन मजबूत है। चूंकि विरोध में भी काफी संगठन हैं इसलिए गठबंधन किया गया है। राज्य सरकार भी गठबंधन से चल रही है तो यहां कोई दिक्कत नहीं हुई। -विशाल वर्मा, पीयू एबीवीपी इलेक्शन इंचार्ज
जीतकर छात्रहित में काम करवाना लक्ष्य
पीयू छात्रसंघ चुनाव में किसी पद पर जीत हासिल कर काउंसिल में प्रवेश करना और छात्रहित के लिए काम करना इनसो का लक्ष्य है इसलिए अन्य संगठनों के साथ गठबंधन किया गया है। हालांकि अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रचार किया गया। गठबंधन पर भी कई संगठनों से बातचीत हुई लेकिन सहमति नहीं बन पाई, इसलिए नीचे के पद पर चुनाव लड़ने को तैयार हुए। सरकार में भी गठबंधन है। इसलिए हाईकमान ने भी छात्र नेताओं के फैसले पर सहमति जता दी है। -रजत नैन, पीयू इनसो इलेक्शन को-इंचार्ज