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जनता का विश्वास खो चुकी है भाजपा-जजपा, सवालों का जवाब नहीं दे पाई सरकार : हुड्डा
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-पहले घोषणा पत्र, फिर संकल्प पत्र और अब गांरटी की बात करते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की बजाए सरकार उनसे बचती नजर आई। ये बेहद शर्मनाक है कि मेनिफेस्टो के वादों, घोटालों, बेरोजगारी, अपराध, नशे, महंगाई व किसानों के मुद्दे पर बोलने की बजाए सरकार व्यक्तिगत टिप्पणियों पर उतर आई। इस सरकार पर कैसे विश्वास किया जा सकता है, पहले ये घोषणा पत्र की बात करते थे, फिर संकल्प पत्र और गारंटी की बात कर रहे हैं। सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है, इसलिए कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया। विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हुड्डा ने कहा कि सरकार किसान को एमएसपी, युवा को रोजगार, बुजुर्गों को पेंशन, गरीबों को राशन, दलित-पिछड़ों को आरक्षण व नागरिकों को प्रोटेक्शन देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। हुड्डा ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस का मकसद इस सरकार को आईना दिखाना था। लेकिन सरकार ने जानबूझकर विपक्ष को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया और सिर्फ सत्तापक्ष को समय दिया गया। बावजूद इसके सरकार जनता के सवालों का जवाब देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ साल में इस सरकार ने प्रदेश की ऐसी हालत बना दी है कि स्कूलों में टीचर, अस्पताल में डॉक्टर और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों का भारी अभाव है। जरूरत पड़ने पर ये सरकार कोरोना काल में मरीजों को दवाई और ऑक्सीजन तक नहीं दे पाई।
बाक्स
घोटालों के सबूत भी सरकार हमसे मांग रही
हुड्डा ने कहा कि अनगिनत भर्ती घोटालों को अंजाम देने के बाद सरकार विपक्ष से घोटालों के सबूत मांग रही है। जबकि सबूत जुटाना जांच एजेंसियों का काम होता है, जोकि सरकार के अधीन काम करती हैं। एचपीएससी वाट्सअप चैट की सरकार को जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, प्रदेश में ई रवाना और अवैध खनन को लेकर बड़ा घोटाला हुआ है। लेकिन सरकार केवल एसआईटी बनाती है और रिपोर्ट सदन में नहीं पेश की जाती। हुड्डा कहा कि मौजूदा सरकार के समय परचून की दुकान पर सामान की तरह नौकरियां बेची जा रही हैं। आज हरियाणा में 2 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं और हरियाणा बेरोजगारी में नंबर वन राज्य है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने की बजाए सरकार उनसे बचती नजर आई। ये बेहद शर्मनाक है कि मेनिफेस्टो के वादों, घोटालों, बेरोजगारी, अपराध, नशे, महंगाई व किसानों के मुद्दे पर बोलने की बजाए सरकार व्यक्तिगत टिप्पणियों पर उतर आई। इस सरकार पर कैसे विश्वास किया जा सकता है, पहले ये घोषणा पत्र की बात करते थे, फिर संकल्प पत्र और गारंटी की बात कर रहे हैं। सरकार जनता का विश्वास खो चुकी है, इसलिए कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया। विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हुड्डा ने कहा कि सरकार किसान को एमएसपी, युवा को रोजगार, बुजुर्गों को पेंशन, गरीबों को राशन, दलित-पिछड़ों को आरक्षण व नागरिकों को प्रोटेक्शन देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। हुड्डा ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के जरिए कांग्रेस का मकसद इस सरकार को आईना दिखाना था। लेकिन सरकार ने जानबूझकर विपक्ष को बोलने का पूरा मौका नहीं दिया और सिर्फ सत्तापक्ष को समय दिया गया। बावजूद इसके सरकार जनता के सवालों का जवाब देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े नौ साल में इस सरकार ने प्रदेश की ऐसी हालत बना दी है कि स्कूलों में टीचर, अस्पताल में डॉक्टर और सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों का भारी अभाव है। जरूरत पड़ने पर ये सरकार कोरोना काल में मरीजों को दवाई और ऑक्सीजन तक नहीं दे पाई।
बाक्स
घोटालों के सबूत भी सरकार हमसे मांग रही
हुड्डा ने कहा कि अनगिनत भर्ती घोटालों को अंजाम देने के बाद सरकार विपक्ष से घोटालों के सबूत मांग रही है। जबकि सबूत जुटाना जांच एजेंसियों का काम होता है, जोकि सरकार के अधीन काम करती हैं। एचपीएससी वाट्सअप चैट की सरकार को जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, प्रदेश में ई रवाना और अवैध खनन को लेकर बड़ा घोटाला हुआ है। लेकिन सरकार केवल एसआईटी बनाती है और रिपोर्ट सदन में नहीं पेश की जाती। हुड्डा कहा कि मौजूदा सरकार के समय परचून की दुकान पर सामान की तरह नौकरियां बेची जा रही हैं। आज हरियाणा में 2 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं और हरियाणा बेरोजगारी में नंबर वन राज्य है।
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