{"_id":"6a8a05d4619e32f0b403e2f7","slug":"gave-wings-to-the-dreams-of-children-from-middle-class-families-now-set-to-receive-a-national-award-chandigarh-news-c-16-pkl1079-1103890-2026-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: मिडिल क्लास परिवारों के बच्चों के सपनों को दी उड़ान, अब मिलेगा नेशनल अवार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: मिडिल क्लास परिवारों के बच्चों के सपनों को दी उड़ान, अब मिलेगा नेशनल अवार्ड
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। मिडिल क्लास परिवार से आने वाले मलोया कालोनी के सरकारी स्कूल के शिक्षक रवि जैसवाल ने पढ़ाई के दिनों में ही तय कर लिया था कि वह जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में मदद करेंगे। बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए किए गए उनके नवाचारों और समर्पण को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। इस वर्ष उनका चयन नेशनल अवार्ड के लिए हुआ है। शिक्षक दिवस पर 5 सितंबर को उन्हें सम्मानित किया जाएगा।
चंडीगढ़ से नेशनल अवार्ड के लिए तीन शिक्षकों के नाम भेजे गए थे, जिनमें रवि जैसवाल का चयन हुआ। उन्होंने बच्चों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए पढ़ाने पर जोर दिया। वर्ष 2018 में कपूरथला के शैक्षणिक भ्रमण के दौरान डोम थिएटर देखने के बाद उन्होंने स्कूल में बेकार सामान से बच्चों के लिए डोम थिएटर तैयार कर दिया।
इसके बाद स्कूल में साइंस पार्क और चाइल्ड सेंट्रिक लैब भी बनाई गई। साइंस पार्क में बच्चे खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझते हैं। सी-सॉ के जरिए हैंडपंप के काम करने का तरीका बताया जाता है, जबकि लैब में विज्ञान से जुड़े गैजेट और किट्स के माध्यम से बच्चे प्रयोग कर सीखते हैं।
विज्ञापन
रवि जैसवाल की मेहनत का असर विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी दिखाई दिया। वर्ष 2020 में स्कूल की एक छात्रा जापान में आयोजित साइंस प्रतियोगिता में पहुंची, जबकि 2019 में एक विद्यार्थी को इसरो में रॉकेट लॉन्च देखने का अवसर मिला।
रवि जैसवाल का कहना है कि जब अभिभावकों ने उन पर भरोसा कर अपनी बेटी को अकेले जापान भेजा, तो उनके लिए शिक्षक के रूप में इससे बड़ा सम्मान कोई नहीं था। अब नेशनल अवार्ड मिलने से उनकी वर्षों की मेहनत और बच्चों के लिए किए गए प्रयासों को नई पहचान मिली है।
चंडीगढ़ से नेशनल अवार्ड के लिए तीन शिक्षकों के नाम भेजे गए थे, जिनमें रवि जैसवाल का चयन हुआ। उन्होंने बच्चों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों और गतिविधियों के जरिए पढ़ाने पर जोर दिया। वर्ष 2018 में कपूरथला के शैक्षणिक भ्रमण के दौरान डोम थिएटर देखने के बाद उन्होंने स्कूल में बेकार सामान से बच्चों के लिए डोम थिएटर तैयार कर दिया।
विज्ञापन
इसके बाद स्कूल में साइंस पार्क और चाइल्ड सेंट्रिक लैब भी बनाई गई। साइंस पार्क में बच्चे खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझते हैं। सी-सॉ के जरिए हैंडपंप के काम करने का तरीका बताया जाता है, जबकि लैब में विज्ञान से जुड़े गैजेट और किट्स के माध्यम से बच्चे प्रयोग कर सीखते हैं।
विज्ञापन
रवि जैसवाल की मेहनत का असर विद्यार्थियों की उपलब्धियों में भी दिखाई दिया। वर्ष 2020 में स्कूल की एक छात्रा जापान में आयोजित साइंस प्रतियोगिता में पहुंची, जबकि 2019 में एक विद्यार्थी को इसरो में रॉकेट लॉन्च देखने का अवसर मिला।
रवि जैसवाल का कहना है कि जब अभिभावकों ने उन पर भरोसा कर अपनी बेटी को अकेले जापान भेजा, तो उनके लिए शिक्षक के रूप में इससे बड़ा सम्मान कोई नहीं था। अब नेशनल अवार्ड मिलने से उनकी वर्षों की मेहनत और बच्चों के लिए किए गए प्रयासों को नई पहचान मिली है।