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Chandigarh News: चार साल की आनंदी ने पांच लोगों की जिंदगी में बिखेरी खुशियां
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चंडीगढ़। लुधियाना के बाजार कॉलोनी की रहने वाली चार साल की आनंदी ने दुनिया से जाते हुए पांच लोगों की जिंदगी में खुशियां बिखेरी हैं। पीजीआई में इलाज के दौरान ब्रेन डेड घोषित किए जाने पर परिजनों से अंगदान की मिली अनुमति के बाद आनंदी की दोनों किडनी, अग्नाशय और दोनों कॉर्निया को पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल चार मरीजों को प्रत्यारोपित किया गया है, जबकि लिवर का मिलन न होने पर ग्रीन कॉरिडोर बनाकर नई दिल्ली के आईएलबीएस अस्पताल में पंजीकृत मरीज को प्रत्यारोपित किया गया है।
पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि आनंदी के माता-पिता ने अपने नुकसान और कष्ट को भूलते हुए अविश्वसनीय धैर्य का परिचय दिया है। उनका निर्णय मानवता का जीवंत प्रमाण है। मूलरूप से झारखंड की रहने वाले आनंदी 15 नवंबर को दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिजनों ने उसे लुधियाना सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में इलाज के दौरान 21 और 22 नवंबर को दो ब्रेन स्टेम डेथ कमेटियों ने मूल्यांकन के बाद आनंदी को ब्रेन डेड घोषित किया।
हमारे जीवन की रोशनी थी आनंदी
आनंदी के पिता सीताराम का कहना है कि आनंदी हमारे जीवन की रोशनी थी। उसका दुनिया से जाना अकल्पनीय है लेकिन हमें यह जानकर सांत्वना मिल रही है कि वह दूसरों के लिए जीवित है। उसके अंगदान का निर्णय लेना बहुत कठिन था लेकिन हमारा मानना है कि वह जरूरतमंदों की मदद करना चाहती थी, इसलिए ईश्वर ने उसे ऐसा अवसर दिया।
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पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि आनंदी के माता-पिता ने अपने नुकसान और कष्ट को भूलते हुए अविश्वसनीय धैर्य का परिचय दिया है। उनका निर्णय मानवता का जीवंत प्रमाण है। मूलरूप से झारखंड की रहने वाले आनंदी 15 नवंबर को दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। परिजनों ने उसे लुधियाना सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में इलाज के दौरान 21 और 22 नवंबर को दो ब्रेन स्टेम डेथ कमेटियों ने मूल्यांकन के बाद आनंदी को ब्रेन डेड घोषित किया।
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हमारे जीवन की रोशनी थी आनंदी
आनंदी के पिता सीताराम का कहना है कि आनंदी हमारे जीवन की रोशनी थी। उसका दुनिया से जाना अकल्पनीय है लेकिन हमें यह जानकर सांत्वना मिल रही है कि वह दूसरों के लिए जीवित है। उसके अंगदान का निर्णय लेना बहुत कठिन था लेकिन हमारा मानना है कि वह जरूरतमंदों की मदद करना चाहती थी, इसलिए ईश्वर ने उसे ऐसा अवसर दिया।
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