पंजाब विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने पंजाब में गंवा दी सत्ता, जानिए वे पांच कारण जिनसे मिली शिकस्त
पंजाब में पहली बार किसी दलित को सीएम बनाकर कांग्रेस ने दलित वोट बैंक को साधने का प्रयास किया। वहीं चन्नी ने सीएम पद संभालते ही कई लोक लुभावने फैसले लिए लेकिन वे नाकाफी रहे।
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पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। पांच साल पहले प्रचंड बहुमत से सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस को इस बार मुंह की खानी पड़ी। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस अकालियों से सत्ता छीन लाई थी, लेकिन 2022 में पार्टी को एंटी इनकंबेसी का सामना करना पड़ा। साढ़े चार साल कैप्टन अमरिंदर सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, वहीं बाद में चरणजीत चन्नी को सीएम कुर्सी मिली।
कैप्टन सिद्धू विवाद
पंजाब में कांग्रेस पर सबसे भारी पड़ा पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू के बीच विवाद। दोनों के बीच का विवाद इतना बढ़ा कि कैप्टन को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। हाईकमान ने अपने पुराने सिपहासालार का हाथ छोड़ सिद्धू को ऊपर उठाया और उन्हें राज्य पार्टी प्रधान के पद पर बैठा दिया। सरकार पर अपने वादों को पूरा न करने का आरोप लगाने वाले सिद्धू कैप्टन पर भारी पड़े और पार्टी प्रधान के पद पर जाकर बैठ गए।
कैप्टन का कांग्रेस से इस्तीफा
कांग्रेस की हार का एक और बड़ा कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह का पार्टी से इस्तीफा देना भी रहा। नवजोत सिद्धू से तल्खी के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीएम पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद दोनों तरफ से बयानबाजियों का दौर तेज हो गया। कैप्टन ने सिलसिलेवार ढंग से हाईकमान पर निशाना साधा और फिर कांग्रेस को अलविदा कहकर पंजाब लोक कांग्रेस के नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली।
चन्नी और सिद्धू विवाद
कैप्टन अमरिंदर सिंह के पार्टी छोड़ने के बाद जब नए सीएम के तौर पर चरणजीत चन्नी का नाम तय किया गया तो पार्टी प्रधान नवजोत सिद्धू की नाराजगी की खबरें फैलने लगी। विपक्षियों ने आरोप लगाया कि सिद्धू सुपर सीएम बनना चाहते थे। इन बातों को बल तब मिला जब मंत्रियों को मंत्रालय बांटने के बाद नाराज सिद्धू ने इस्तीफा दे दिया। सिद्धू को मनाने के लिए सीएम चन्नी को एडवोकेट जनरल और डीजीपी को बदलना पड़ा। इसके बाद सिद्धू ने अपना इस्तीफा वापस लिया। हालांकि इसके बाद भी सिद्धू ने कई बार चन्नी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए।
खनन विवाद
पंजाब में कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण अवैध खनन का मुद्दा भी माना जा रहा है। सीएम चन्नी की साली के बेटे भूपिंदर हनी पर 18 जनवरी को ईडी ने दबिश दी। साल 2018 में जब कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री थे, उस समय अवैध खनन का मामला सामने आया था। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में मुख्य आरोपी कुदरतदीप सिंह ने दो निदेशकों संदीप सिंह और भूपिंदर सिंह के साथ नई कंपनियां बनाई थीं। पूछताछ के बाद ईडी के हाथ भूपिंदर हनी तक पहुंचे और 18 जनवरी को ईडी ने हनी के चंडीगढ़, लुधियाना, मोहाली और फतेहगढ़ के दस अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। प्रवर्तन निदेशालय को इनके ठिकानों से 10.7 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई।
बेअदबी और नशा मामले में कार्रवाई न होना
पंजाब में कांग्रेस की हार का एक बड़ा कारण बेअदबी मामले और नशा तस्करी मामले में कार्रवाई न होना भी माना जा रहा है। इन्हीं दो मुद्दों के दम पर कांग्रेस ने 2017 में पंजाब में बहुमत से सरकार बनाई थी। पिछले साल के अंत में अमृतसर और कपूरथला में बेअदबी के प्रयास हुए और दोनों मामलों में आरोपियों की पीटकर हत्या कर दी गई। वहीं विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस ने अकाली दिग्गज बिक्रम मजीठिया पर नशा तस्करी की एफआईआर दर्ज करवाकर कार्रवाई करने के संकेत दिए लेकिन माहिरों के मुताबिक ये केस काफी कमजोर हैं।