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Chandigarh: पीजीआई में पहले विदेशी नागरिक का अंगदान, दो साल के केन्याई नागरिक ने 4 लोगों को दी नई जिंदगी
Wed, 30 Oct 2024 12:35 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Wed, 30 Oct 2024 12:35 AM IST
सार
लुंडा कायुम्बा देश में सबसे कम उम्र के अग्नाशयदाता बन गए हैं। दुनिया को अलविदा कह दो साल के केन्याई नागरिक प्रॉस्पर ने 4 लोगों को नई जिंदगी दी है। 17 अक्तूबर को खरड़ स्थित घर में गिरकर वे चोटिल हो गए थे। दोनों किडनी और अग्नाशय के साथ दोनों कॉर्निया मरीजों में प्रत्यारोपित किए गए हैं।
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बच्चे का फोटो।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अफ्रीकी देश केन्या के रहने वाले दो साल के लुंडा कायुम्बा उर्फ प्रॉस्पर दुनिया को अलविदा कहकर चार लोगों के जीवन में खुशियां बिखेर गए। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद पीजीआई में उनका अंगदान कराया गया। प्रॉस्पर पहले ऐसे विदेशी नागरिक हैं, जिनका अंगदान पीजीआई चंडीगढ़ में हुआ। साथ ही वह देश में सबसे कम उम्र के अग्नाशयदाता भी बन गए।
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अंगदान में मिली एक किडनी और अग्नाशय एक व्यक्ति में प्रत्यारोपित की गई। दूसरी किडनी एक अन्य व्यक्ति और दोनों कॉर्निया प्रतीक्षा सूची में शामिल दो अन्य मरीजों में प्रत्यारोपित की गईं। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि इतनी कम उम्र में जीवन का अंत दुखद घटना है मगर प्रॉस्पर के परिवार की ओर किया गया यह महान काम दूसरों के लिए जीवन का किसी अनमोल उपहार से कम नहीं।
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पीजीआई के मुताबिक, बीते 17 अक्तूबर को प्रॉस्पर खरड़ स्थित घर में गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गया था। माता-पिता ने उसे पीजीआई में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 26 अक्टूबर को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। प्रॉस्पर की मां जैकलिन डायरी की आंखों में बेटे के दुनिया से जाने का गम और आंसू थे।
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उन्होंने रुंधे गले से कहा कि इस दुख को सहन करना आसान नहीं, प्रॉस्पर उनके दिन का टुकड़ा था लेकिन उन्हें इस बात की तसल्ली है कि प्रॉस्पर के अंग दुनिया में दुख झेल रहे दूसरे लोगों की जीवन में खुशियां भरेंगे। यह बात उन्हें शांति देगी। उन्होंने कहा कि यह कार्य हमारे लिए प्रॉस्पर के जीवन को जीवित रखने का एक तरीका है।
बता दें कि प्रॉस्पर की मां जैकलिन डायरी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (सीयू) में पढ़ती हैं और परिवार के साथ मोहाली के खरड़ क्षेत्र में रहती हैं।
डाॅक्टरों की टीम ने किया चुनौतीपूर्ण कार्य
किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी के प्रमुख प्रो. आशीष शर्मा ने बताया कि इतनी कम उम्र के अंगदाता के अंगों के प्रत्यारोपण में कई तरह की चुनौतियां सामने होती हैं। इतनी छोटी उम्र में दो किडनी को अलग करना अपने आप में बहुत चुनौती पूर्ण होता है क्योंकि अंगों का आकार बहुत छोटा होता है। एक मरीज के लिए अग्नाशय के प्रत्यारोपण को जोड़ना सर्जरी को और भी कठिन बना देता है लेकिन टीम की मेहनत और एकजुटता ने इस चुनौती को स्वीकार किया और सफलता प्राप्त की।
अंगदाता परिवार के साहसिक फैसले से चार मरीजों के जीवन में खुशियां आई हैं। अंगदान करने का निर्णय लेना आसान नहीं होता। जो लोग अपने दुख को दरकिनार कर दूसरों के बारे में सोचते हुए यह निर्णय लेते हैं, वह वाकई समाज के लिए आदर्श होते हैं। - प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी