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तथ्य छिपा कर याचिका दाखिल करना न्याय प्रशासन की धारा दूषित करना : हाईकोर्ट

Thu, 23 Oct 2025 12:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Oct 2025 12:11 AM IST
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Filing a petition by concealing facts vitiates the system of judicial administration: High Court
-पिछली जमानत याचिका खारिज होने के तथ्य छिपाने को हाईकोर्ट ने माना अदालत से धोखाधड़ी
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-पोक्सो एक्ट में आरोपी की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने किया खारिज
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पोक्सो एक्ट के मामले में याची की ओर से पिछली जमानत याचिका खारिज होने की बात छिपाने को अदालत के साथ धोखाधड़ी करार दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि गुण-दोष के आधार पर पहले की जमानत याचिका खारिज होने के आदेश को दबाना न्याय प्रशासन की धारा को दूषित करना है।
जस्टिस नमित कुमार ने पिछले साल जुलाई में मोहाली के बलौंगी पुलिस स्टेशन में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण पोक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज दुष्कर्म के मामले में एक आरोपी की ओर से दायर दूसरी याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से महत्वपूर्ण तथ्यों को सक्रिय रूप से छिपाया और दबाया गया। वह स्पष्ट रूप से चुप रहा और जानबूझकर अपनी पिछली जमानत याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज करने का आदेश संलग्न नहीं किया।
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याची ने कहा था कि प्रारंभिक जमानत याचिका वापस लेने की छूट देते हुए हुए खारिज कर दी गई थी। चूंकि आदेश संलग्न नहीं था इसलिए अदालत की ओर उसकी प्रति प्राप्त कर ली गई और उसे रिकॉर्ड में ले लिया गया। इसके अवलोकन से पता चलता है कि संबंधित प्राथमिकी में पहले की नियमित जमानत याचिका को वापस लिए जाने के कारण खारिज नहीं किया गया था बल्कि उसे एक समन्वय पीठ की ओर से गुण-दोष के आधार पर खारिज किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाना या छिपाना वकालत नहीं बल्कि बाजीगरी, हेरफेर या गलत बयानी है जिसका न्यायसंगत और विशेषाधिकार प्राप्त क्षेत्राधिकार में कोई स्थान नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो अदालत में सभी तथ्यों को निष्पक्ष और सत्यता से प्रकट न करके और उन्हें तोड़-मरोड़कर या तो हेरफेर करके या फिर गलत बयानी करके अदालत को गुमराह करने के लिए दमन का सहारा लेता है तो वास्तव में वह अदालत के साथ धोखाधड़ी कर रहा होता है। यह मानते हुए कि याचिकाकर्ता ने गंदे हाथों से अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति कुमार ने याचिका को शुरुआत में ही खारिज कर दिया।
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