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खेतों में किसान जला रहे पराली, कोहरे की चपेट में आ सकते हैं वाहन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़(हर्ष कुमार सलारिया)
Updated Mon, 17 Oct 2016 09:26 AM IST
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किसान जला रहे पराली
- फोटो : File Photo
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खेतों में पराली नहीं जलाने को लेकर चलाए जा रहे जागरुकता अभियानों को दरकिनार कर हरियाणा में किसानों ने धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि प्रदेश से गुजरती जीटी रोड से सटे लगभग सभी जिलों में पराली जलाने के मामले सबसे अधिक सामने आ रहे हैं।
इससे उठते धुएं ने राज्य सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ही चिंता नहीं बढ़ाई बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात पुलिस का काम भी बढ़ा दिया है क्योंकि बदलते मौसम के बीच अगले 15 दिनों में ही इस हाईवे को कोहरा अपनी चपेट में ले लेगा। ऐसे में पराली जलने से फैला धुआं भी वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जहां नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है वहीं राज्य सरकार ने हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एचएआरएसएसी) को निर्देश दिए हैं कि वह सैटेलाइट के जरिए राज्य में पराली जलाए जाने पर नजर रखें और इसकी सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराएं। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) के मुताबिक, इस बार खेतों में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले जीटी रोड से सटे जिलों- अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत व सोनीपत में सामने आ रहे हैं।
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इससे उठते धुएं ने राज्य सरकार और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ही चिंता नहीं बढ़ाई बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात पुलिस का काम भी बढ़ा दिया है क्योंकि बदलते मौसम के बीच अगले 15 दिनों में ही इस हाईवे को कोहरा अपनी चपेट में ले लेगा। ऐसे में पराली जलने से फैला धुआं भी वाहन चालकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
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राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जहां नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है वहीं राज्य सरकार ने हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एचएआरएसएसी) को निर्देश दिए हैं कि वह सैटेलाइट के जरिए राज्य में पराली जलाए जाने पर नजर रखें और इसकी सूचना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उपलब्ध कराएं। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीसीबी) के मुताबिक, इस बार खेतों में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले जीटी रोड से सटे जिलों- अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत व सोनीपत में सामने आ रहे हैं।
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हाईकोर्ट भी दे चुका है दखल
खेतों में किसान जला रहे पराली
- फोटो : File Photo
कैथल, यमुनानगर, जींद, सिरसा, फतेहाबाद जिलों में भी पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। प्रदेश में खरीफ की फसलों की कटाई के इस सीजन में एचपीसीबी ने अब तक पराली जलाने के 75 मामले दर्ज किए हैं और दोषियों को विशेष जिलास्तरीय कमेटियों के जरिए चालान भी भेजे गए हैं। लेकिन बोर्ड के पास अभी पिछले साल के ही कई मामले लंबित हैं।
नियमानुसार, बोर्ड कुरुक्षेत्र व फरीदाबाद स्थित पर्यावरण अदालत में पराली जलाने के आरोपियों के केस दाखिल करता है, पर इन मुकदमों में से अधिकतर का फैसला आने में लंबा समय लग जाता है। यही कारण है कि बोर्ड ने पिछले साल जो मामले दर्ज किए थे, उनमें से आधे मामलों में अभी तक जुर्माना तय नहीं हो सका है। बता दें कि पराली जलाने पर जुर्माने की राशि दो एकड़ के लिए 2500 रुपये से शुरू होकर 15 हजार रुपये तक निर्धारित है।
खेतों में पराली जलाने के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी दखल दे चुका है। अप्रैल, 2012 में हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए तीन सुझाव दिए थे। इनमें एक सुझाव बायोमास पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने का था, ताकि खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों का उपयोग किया जा सके। हाईकोर्ट ने दो अन्य सुझावों में- ग्रामीण इलाकों में पशु चारा उद्योग स्थापित करने के अलावा धान व गेहूं की कटाई के बाद सूखे तिनकों का उपयोग करने के लिए ग्रामीण इलाकों में कागज, गत्ता उद्योग लगाने की सलाह दी थी। लेकिन हरियाणा सरकार अब तक किसी भी सुझाव पर अमल नहीं कर सकी है।
नियमानुसार, बोर्ड कुरुक्षेत्र व फरीदाबाद स्थित पर्यावरण अदालत में पराली जलाने के आरोपियों के केस दाखिल करता है, पर इन मुकदमों में से अधिकतर का फैसला आने में लंबा समय लग जाता है। यही कारण है कि बोर्ड ने पिछले साल जो मामले दर्ज किए थे, उनमें से आधे मामलों में अभी तक जुर्माना तय नहीं हो सका है। बता दें कि पराली जलाने पर जुर्माने की राशि दो एकड़ के लिए 2500 रुपये से शुरू होकर 15 हजार रुपये तक निर्धारित है।
खेतों में पराली जलाने के मामलों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी दखल दे चुका है। अप्रैल, 2012 में हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए तीन सुझाव दिए थे। इनमें एक सुझाव बायोमास पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने का था, ताकि खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों का उपयोग किया जा सके। हाईकोर्ट ने दो अन्य सुझावों में- ग्रामीण इलाकों में पशु चारा उद्योग स्थापित करने के अलावा धान व गेहूं की कटाई के बाद सूखे तिनकों का उपयोग करने के लिए ग्रामीण इलाकों में कागज, गत्ता उद्योग लगाने की सलाह दी थी। लेकिन हरियाणा सरकार अब तक किसी भी सुझाव पर अमल नहीं कर सकी है।