{"_id":"660a3df6e1f4efed7d0ef34b","slug":"farmer-died-in-ongoing-agitation-on-shambhu-border-2024-04-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Punjab: शंभू बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में एक और किसान की मौत, अभी तक जा चुकी है नौ किसानों की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Punjab: शंभू बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में एक और किसान की मौत, अभी तक जा चुकी है नौ किसानों की जान
Mon, 01 Apr 2024 10:24 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 01 Apr 2024 10:24 AM IST
सार
दया सिंह फौज से रिटायर हुए थे। उनके पास करीब 10 बीघा जमीन थी, जिस पर वह अपने दो बेटों के साथ खेतीबाड़ी करते थे। गौरतलब है कि इससे पहले किसानी आंदोलन 2.0 में 9 किसानों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शंभू बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में एक और किसान की मौत हो गई है। मृतक किसान की पहचान दया सिंह (71 साल) निवासी अमृतसर के तौर पर हुई है। दया सिंह पिछले करीब एक सप्ताह से शंभू बार्डर पर मौजूद थे। बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई है।
किसान जत्थेबंदियों ने किसान की मौत पर शोक जताते सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। दया सिंह फौज से रिटायर हुए थे। उनके पास करीब 10 बीघा जमीन थी, जिस पर वह अपने दो बेटों के साथ खेतीबाड़ी करते थे। गौरतलब है कि इससे पहले किसानी आंदोलन 2.0 में 9 किसानों की मौत हो चुकी है।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा है कि सरकार गलत प्रचार कर रही है कि बॉर्डरों पर भीड़ कम हो गई है। जबकि बॉर्डरों पर किसान लगातार जुट रहे हैं। आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ेगी। उन्होंने फिर साफ किया कि बॉर्डरों पर आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक किसानों की जायज मांगों का हल नहीं किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसान जत्थेबंदियों ने किसान की मौत पर शोक जताते सरकार से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। दया सिंह फौज से रिटायर हुए थे। उनके पास करीब 10 बीघा जमीन थी, जिस पर वह अपने दो बेटों के साथ खेतीबाड़ी करते थे। गौरतलब है कि इससे पहले किसानी आंदोलन 2.0 में 9 किसानों की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा है कि सरकार गलत प्रचार कर रही है कि बॉर्डरों पर भीड़ कम हो गई है। जबकि बॉर्डरों पर किसान लगातार जुट रहे हैं। आने वाले दिनों में भीड़ और बढ़ेगी। उन्होंने फिर साफ किया कि बॉर्डरों पर आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक किसानों की जायज मांगों का हल नहीं किया जाता है।
विज्ञापन