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बहिबल गोलीकांड: कोर्ट से नहीं मिली तीनों पुलिस अफसरों को राहत, खारिज हुई जमानत याचिका

Sun, 03 Feb 2019 09:06 AM IST
खुशबू गोयल राजीव शर्मा, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
राजीव शर्मा, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 03 Feb 2019 09:06 AM IST
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Faridkot Court Rejected Bail Petition of Police Officers, Behbal Kalan Firing Case
कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo

जिला व सेशन जज हरपाल सिंह की अदालत ने शनिवार को बहिबल गोलीकांड मामले में नामजद तीन पुलिस अधिकारियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। एक दिन पहले इन तीनों पुलिस अधिकारियों फाजिल्का के तत्कालीन एसपी बिक्रमजीत सिंह, एसएसपी मोगा के रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और थाना बाजाखाना प्रभारी एसआई अमरजीत सिंह कुलार की याचिकाओं पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बहस हुई थी। 

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शनिवार को इन याचिकाओं को खारिज करते हुए जिला अदालत ने एसपी बिक्रमजीत सिंह द्वारा एक दिन पहले ही अदालत के पास जमा करवाए पासपोर्ट को वापस लेने के भी आदेश दिए। जिला अदालत के पास इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कई अहम बातें सामने आई हैं। अदालत के सामने आरोपी पुलिस अधिकारियों ने तर्क दिया था कि उन्होंने अपने बचाव के लिए गोलियां चलाई थीं लेकिन पुलिस रिकार्ड के मुताबिक घटनास्थल पर तैनात किसी भी पुलिसकर्मी के हथियार से कोई गोली ही नहीं चली। 
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इसके अलावा पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उस दिन धरना दे रहे लोगों द्वारा एसएसपी मोगा की जिप्सी पर 12 बोर की राइफल से फायर किए गए थे लेकिन पुलिस उस राइफल को बरामद नहीं कर सकी। पुलिस अधिकारियों ने यह भी तर्क दिया कि उन्होंने एके 47 का भी उपयोग किया लेकिन उनके द्वारा एक भी खाली कारतूस जमा नहीं करवाया गया। 
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सात दिन बाद किया केस दर्ज 
जिला अदालत ने अपने फैसले में इस बात का भी नोटिस लिया कि घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को बहिबल कलां में दो लोगों की मौत हुई जिनका पुलिस ने पोस्टमार्टम भी करवाया लेकिन कोई केस दर्ज नहीं किया। एसआईटी की शिकायत पर घटना के सात दिन बाद 21 अक्तूबर को अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया। 


इसके अलावा पुलिस द्वारा मृतकों के शव से निकली गोलियों से छेड़छाड़ की गई। मृतकों में शामिल गुरजीत सिंह के शव से 7.725 एमएम की गोली निकली थी जो पुलिस के हथियारों में उपयोग होती है। इस गोली की स्टेट लैब में फोरेंसिक जांच के दौरान तो कोई रिपोर्ट नहीं आई लेकिन केंद्र की लैब से रिपोर्ट आई कि इस गोली से किसी तीखी चीज से नंबर मिटाए गए हैं। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सरकारी पक्ष ने अदालत से आग्रह किया था कि इन आरोपियों से मामले की सच्चाई जानने के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना बेहद जरूरी है। 

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