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Hindi News ›   Chandigarh ›   Family did not want Milkha Singh to suffer at the last moment so did not send on ventilator

आखिरी वक्त की कहानी: परिवार नहीं चाहता था मिल्खा सिंह को अंतिम समय में कष्ट हो, इसलिए नहीं भेजा वेंटिलेटर पर

Sat, 19 Jun 2021 03:23 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Jun 2021 03:23 AM IST
सार

मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी के संक्रमित होने के बाद उनकी बेटी मोना सिंह अमेरिका से भारत उनकी देखभाल के लिए आ गई थी। मोना अमेरिका में मेडिसिन की डॉक्टर हैं और अस्पताल में स्थानीय डॉक्टरों के साथ उनकी देखभाल कर रही थीं।

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Family did not want Milkha Singh to suffer at the last moment so did not send on ventilator
पीजीआई चंडीगढ़ में मिल्खा सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शुक्रवार को जब मिल्खा सिंह की हालत बिगड़ने लगी तो पीजीआई के डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना होगा। परिजनों ने मिल्खा सिंह को वेंटिलेटर पर रखने से मना कर दिया था। परिजनों को आभास हो गया था कि निर्मल मिल्खा सिंह के जाने के बाद वे ज्यादा दिन तक जी नहीं पाएंगे। 

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वेंटिलेटर पर उनके जीवन को खींचना ठीक नहीं होगा। पत्नी के साथ उनका जबरदस्त बंधन था। दो दिन से उनकी याद आने लगी थी। परिजन अंतिम समय पर चाहते थे कि वे बिना किसी कष्ट के ही शांतिपूर्ण अंतिम यात्रा पर जाएं। हालांकि पीजीआई के डॉक्टर और परिजन लगातार उनकी देखरेख में लगे रहे।
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पीजीआई से घर लाया गया पार्थिव शरीर
निधन के बाद परिजन उनके पार्थिव शरीर को चंडीगढ़ सेक्टर आठ स्थित घर पर ले आए थे। घर पर सन्नाटा पसरा हुआ था। घर पर जीव मिल्खा सिंह के साथ उनकी पत्नी कुदरत मिल्खा सिंह, बेटा हरजय मिल्खा सिंह और मिल्खा की बेटी मोना और सोनिया मौजूद थीं। मिल्खा सिंह का संस्कार शनिवार को दोपहर बाद सेक्टर-25 में किया जाएगा। इससे पहले उनके पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन के लिए रखा जाएगा।
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मां के बाद पिता नहीं रहे
मिल्खा सिंह के निधन के बाद उनके बेटे व अंतरराष्ट्रीय स्तर के गोल्फर जीव मिल्खा सिंह ने कहा कि मेरे पिता का निधन रात 11.30 बजे के करीब हुआ। शुक्रवार को उन्होंने अपनी जिंदगी के लिए काफी संघर्ष किया था लेकिन भगवान के अपने तरीके हैं। यह सच्चा प्यार और साथ था कि पांच दिन में मां और पिता दोनों चले गए। हम पीजीआई के डॉक्टरों के उनके साहसिक प्रयासों और दुनिया भर से मिले प्यार और प्रार्थना के लिए आभारी हैं।

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