कोरोना से मरीजों की मौत : शव के लिए घंटों का इंतजार, परिजनों ने बयां किया दर्द
कोरोना की दूसरी लहर के बाद से सरकारी राजिंदरा अस्पताल में पंजाब के अन्य जिलों से ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार से भी कोविड मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक राजिंदरा में रोजाना 35 से 40 के बीच कोविड से मौतें हो रही हैं।
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पटियाला स्थित सरकारी राजिंदरा अस्पताल में कोरोना की मार से व्यवस्थाएं चरमराती नजर आ रही हैं। हाल यह है कि ऑक्सीजन, दवाओं की मारामारी तो है ही अब परिजनों को अपने कोविड मरीजों के शव पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
कोविड वार्ड से तीमारदारों को कंट्रोल रूम भेजा जाता है तो कंट्रोल रूम से मोर्चरी भेज दिया जाता है। रोते-बिलखते लोग इधर से उधर चक्कर काटते रहते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन कोविड के कारण हुई अधिक मौतें पर काम बढ़ने का हवाला देते अपना पल्ला झाड़ता दिखाई दे रहा है।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद से सरकारी राजिंदरा अस्पताल में पंजाब के अन्य जिलों से ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार से भी कोविड मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक राजिंदरा में रोजाना 35 से 40 के बीच कोविड से मौतें हो रही हैं।
सोमवार को भी कोविड से अस्पताल में 34 मौतें हुई, जो केवल पटियाला से ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों व पंजाब के अन्य जिलों से भी संबंधित रहीं। कोविड के बढ़ते कहर के बीच राजिंदरा में अब सेहत सेवाएं चरमराती नजर आ रही हैं। ऑक्सीजन व दवाओं के बाद अब यहां परिजन शव पाने के लिए तरस रहे हैं।
जब मोर्चरी में शव पहुंचेगा तभी मिल पाएगा : अस्पताल
सोमवार को जब राजिंदरा अस्पताल का दौरा किया तो वहां अस्पताल परिसर में नौजवान संजू निवासी मंडी गोबिंदगढ़ अपने रिश्तेदारों के साथ विलाप कर रहा था। उसने बताया कि माता बलवीर कौर राजिंदरा में उपचाराधीन थीं। सुबह बताया कि माता बिल्कुल ठीक है। आधे घंटे बाद मौत की सूचना दे दी। सुबह से लेकर अब बाद दोपहर हो गई, शव नहीं दिया जा रहा है। कंट्रोल रूम वाले फोन नहीं उठाते। कोविड वार्ड वालों ने मोर्चरी भेज दिया।
मोर्चरी की सिक्योरिटी वाले धक्के मार रहे हैं। कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। इसी बीच कंट्रोल रूम पर जब दोबारा संपर्क किया तो बताया गया कि मोर्चरी में शव रखने की जगह नहीं। जब जगह बनेगी तो वहां माता का शव पहुंचेगा। इसके बाद ही मिल पाएगा।
नौजवान ने आरोप लगाया कि माता के इलाज में डॉक्टरों ने लापरवाही बरती, जिस कारण मौत हुई है। अब वह मां का शव पाने को भटक रहा है। इसी तरह का एक मामला दो-तीन दिन पहले सामने आया था जब कोरोना के कारण सरकारी वकील की मौत के बाद उनकी पत्नी को शव हासिल करने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ी थी।
मौतों की संख्या बढ़ने से हुई दिक्कत : एमएस
इस संबंध में रांजिंदरा के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एचएस रेखी ने बताया कि कोविड के कारण मौतों की संख्या अधिक होने कारण दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि एक कोविड मरीज के शव को सैनिटाइज करने, पैकिंग करने, टैगिंग वगैरह करने में दो-तीन घंटे लगते हैं। टैगिंग भी जरूरी है, ताकि शवों की अदला-बदली न हो जाए। डॉक्टर कोरोना के इस संकट में दिन-रात काम करके अपना बेस्ट दे रहे हैं।