शहीदों की याद में हुसैनीवाला बॉर्डर पर लगा मेला, अधिकारियों और हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि
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हुसैनीवाला बॉर्डर स्थित शहीदी स्मारक पर आयोजित शहीदी मेले में सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे। कई लोगों ने शहीए-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के बुतों पर अपने खून से तिलक लगाकर श्रद्धांजलि दी। दूर-दराज शहरों से आए लोग शहीदों की समाधि पर फूल अर्पित कर माथा टेक कर इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए।
लोग सिर पर संतरी रंग की पगड़ी पहनकर रैली के रूप में शहीदी मेले में पहुंचे। रैली में नौजवान मनदीप सिंह बाइक पर करतब करता रहा। फिरोजपुर छावनी से लेकर हुसैनीवाला बॉर्डर को आने वाली सड़क पर लोगों की भीड़ थी। सतलुज दरिया के पुल के इस तरफ कई संस्थाओं ने अपने-अपने मंच लगाए थे और शहीदों की जीवनी पर नाटक खेले जा रहे थे।
कई धार्मिक संस्थाओं ने लोगों के लिए लंगर लगाए। शहीदी स्मारक के पास बने पार्क में खान-पान के स्टाल लगे हुए थे। बच्चों के लिए झूले लगे थे। पूर्व भाजपा प्रदेश प्रधान कमल शर्मा, कांग्रेस विधायक परमिंदर सिंह के अलावा कई सियासी नेता शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शहीदी स्थल के मैदान में जिला प्रशासन ने इलेक्ट्रानिक्स वोटिंग मशीन का स्टाल लगाया था। यहां लोगों को मशीन के जरिए वोट करने संबंधी जानकारी दी जा रही थी। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पूरे प्रबंध थे।
हुसैनीवाला बॉर्डर स्थित शहीदी स्मारक पर शहीद-ए-आजम भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के 88वें शहीदी दिवस पर मेला आयोजित किया। डीसी चंद्र गैंद ने शहीदों की समाधि पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। डीसी ने लोगों के साथ फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन से हुसैनीवाला बार्डर तक ट्रेन में सफर किया और लोगों से बातचीत की।
डीसी ने ट्रेन के सफर के दौरान लोगों से बातचीत कर नशे की समस्या समेत कई अहम पहलुओं पर फीडबैक लिया। शहीदी मेले पर पत्नी नेहा के साथ माथा टेकने जा रहे बलविंदर सिंह ने बताया कि वह कई सालों से शहीदी मेले पर परिवार के साथ माथा टेकने जाते हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई डीसी आम जनता के बीच बैठकर ट्रेन में सफर कर रहा है।
उन्होंने डीसी के साथ अपने गांव की कुछ समस्यों को लेकर भी बातचीत की। डीसी ने कहा कि ये ऐतिहासिक रेल ट्रैक है क्योंकि यहां 1887 में रेल सेवा शुरू हो गई थी। यहां से ट्रेन गंडा सिंह वाला, कसूर जंक्शन और रावलविंड जंक्शन (अब पाकिस्तान में) तक जाया करती थी। 1947 में देश की आजादी तक यहां ट्रेन चलती थी। 1912 में यहा पंजाब मेल चलाई गई थी, जो कि अब भी चल रही है। इस ट्रैक पर हमारे शहीदों ने भी सफर किया था। इसलिए वह भी इस ट्रैक पर जाकर उस भावना की अनुभूति करना चाहते थे।
जनता की मांग को देखते हुए वह रेल प्रशासन को हर रविवार इस ट्रैक पर ट्रेन चलाने के लिए लिखेंगे। लोगों की इस मांग को रेलवे की हाई अथॉरिटी के समक्ष भी उठाएंगे। उन्होंने नवनिर्मित हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन का भी जायजा लिया।
रेलवे ने शहीदी स्मारक पर हुसैनीवाला रेल ट्रैक से संबंधित तस्वीरें भी एक होर्डिंग के जरिये लगाई थी। ऐतिहासिक ब्रिज का विवरण भी इस पर दिया गया था। इस मौके पर बीएसएफ के कमांडेंट शिव ओम, सेकेंड इन कमांड अमरजीत सिंह, डिप्टी कमांडेंट सीता राम, एसडीएम अमित गुप्ता, रेड क्रॉस के सचिव अशोक बहल उपस्थित थे।