31 साल तक चला इस फौजी का संघर्ष, अब जाकर जीती पेंशन की जंग, खुद बयां की कहानी
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पूर्व फौजी जसपाल सिंह को करीब 31 साल के संघर्ष के बाद पेंशन मिलने की राह साफ हो गई है। उन्हें हर महीने करीब पंद्रह हजार रुपये दिव्यांगता पेंशन मिलेगी। वहीं, आर्मी को पांच साल का बकाया भी देना होगा। यह फैसला आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल ने सुनाया है। इस संबंधी पंजाब एक्स सर्विसमैन ग्रीवांसेज सेल के प्रधान कर्नल एसएस सोही की टीम ने काफी मेहनत की। शुक्रवार को इस खुशी में उन्होंने लड्डू बांटकर खुशी जताई।
छुट्टी लेकर आए तो हुए थे हादसे का शिकार
69 वर्षीय जसपाल सिंह ने बताया कि वह जिला फतेहगढ़ साहिब के रहने वाले हैं। 1980 में पटियाला में भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान वह सिख रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। उनकी नौकरी बढ़िया चल रही थी कि इसी बीच 1985 में अचानक उनके पिता बीमार हो गए।
वह पिता की देखभाल के लिए छुट्टी लेकर घर आए। एक दिन वह बाइक पर मोहाली से फतेहगढ़ साहिब की तरफ जा रहे थे तो लखनौर के पास हादसे का शिकार हो गए। लोग उन्हें पीजीआई ले गए जहां पर उनकी टांग में रॉड और प्लेट डाली गई। इसके अलावा उनकी डिस्क में समस्या आ गई थी।
गैरहाजिर होने पर आर्मी ने सुनाई जेल की सजा
जसपाल सिंह ने बताया कि हादसे के समय उनकी देहरादून में पोस्टिंग थी। ऐसे में आर्मी को सूचना नहीं दे पाए। सेना ने उसे गैरहाजिर मान लिया। साथ ही उसे वहां पर सेना ने 14 दिन जेल की सजा दी। इसके बाद उन्हें जून 1988 में मेडिकल अनफिट कर दिया लेकिन पेंशन नहीं दी गई।
वह काफी समय तक संघर्ष करते रहे। आखिरी में उन्होंने एक्स सर्विसमैन ग्रीवांसेस सेल के सहयोग से अदालत में केस दायर किया। अदालत में उनके वकील ओझा ने इस मामले को गंभीरता से उठाया जिसके बाद उसकी पेंशन की राह साफ हो पाई है।
भैंसे और खेती कर बच्चे पाले
पूर्व फौजी ने बताया कि उनकी दो बेटियां और एक बेटा था। आर्मी से घर आने के बाद उनकी पेंशन तो लगी नहीं थी। ऐसे में गुजारा करना मुश्किल था। उन्होंने भैंसे पाली। दूध बेचकर व खेती से उन्होंने रुपये कमाए और किसी तरह अपना घर चलाया।
आंखों के आगे बेटा चला गया
जसपाल सिंह ने बताया कि उनकी मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। कुछ समय पहले उनके नौजवान 24 वर्षीय बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई, जिसका एक ढाई साल का बेटा भी है। पूरा परिवार नौजवान बेटे की मौत से आहत है।