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Chandigarh News: 55 दिन बाद भी ज्योति के परिवार को मुआवजे और नौकरी का इंतजार
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट लगने से जान गंवाने वाली पीएचडी छात्रा ज्योति के परिवार को 55 दिन बाद भी मुआवजे और नौकरी का इंतजार है। बेटी को खोने के बाद परिवार अब घोषित आर्थिक मदद और नौकरी पाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है। परिवार का कहना है कि बार-बार चंडीगढ़ आना आसान नहीं है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
पीयू की ओर से ज्योति के परिवार को कुल 16 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई थी। इसमें पांच लाख रुपये कुलपति के विवेकाधीन कोष और 11 लाख रुपये डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर कार्यालय के माध्यम से देने की बात कही गई थी। इसके अलावा ज्योति के भाई पवन को उसकी आईटीआई योग्यता के आधार पर इलेक्ट्रीशियन के पद पर नौकरी देने की घोषणा हुई थी।
बेटी को खोने के बाद अब मदद का इंतजार
ज्योति के पिता रविंदर और मां राजबाला का कहना है कि बेटी की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। अब घोषित मदद के लिए भी उन्हें बार-बार अधिकारियों से संपर्क करना पड़ रहा है। परिवार का आरोप है कि न तो यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें ठोस सहयोग मिल रहा है और न सरकार की ओर से।
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28 जुलाई को गई थी ज्योति की जान
महेंद्रगढ़ के कनीना क्षेत्र के गांव ककराला की रहने वाली ज्योति पीयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीएचडी कर रही थी। 28 जुलाई को सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में करंट लगने से उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद विद्यार्थियों ने लगातार दो दिन प्रदर्शन कर कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। ज्योति की मौत के अगले दिन पीयू की तत्कालीन कुलपति प्रो. रेनु विग के कार्यकाल का आखिरी दिन था। इसके बाद से यूनिवर्सिटी में नियमित कुलपति नहीं है। फिलहाल प्रो. मीनाक्षी गोयल कार्यकारी तौर पर कुलपति का कार्यभार संभाल रही हैं।
कोट.....
ज्योति के परिवार से पूरे डॉक्यूमेंट ले लिए गए हैं। इसकी सप्ताह परिवार को उनकी ओर से 11 लाख रुपए मुआवजा अदा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इश्योरेंस के पैसे देने को लेकर प्रक्रिया चल रही है। -प्रो. वाई के रावल, डीएसडब्ल्यू पीयू
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पीयू की ओर से ज्योति के परिवार को कुल 16 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई थी। इसमें पांच लाख रुपये कुलपति के विवेकाधीन कोष और 11 लाख रुपये डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर कार्यालय के माध्यम से देने की बात कही गई थी। इसके अलावा ज्योति के भाई पवन को उसकी आईटीआई योग्यता के आधार पर इलेक्ट्रीशियन के पद पर नौकरी देने की घोषणा हुई थी।
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बेटी को खोने के बाद अब मदद का इंतजार
ज्योति के पिता रविंदर और मां राजबाला का कहना है कि बेटी की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया है। अब घोषित मदद के लिए भी उन्हें बार-बार अधिकारियों से संपर्क करना पड़ रहा है। परिवार का आरोप है कि न तो यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें ठोस सहयोग मिल रहा है और न सरकार की ओर से।
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28 जुलाई को गई थी ज्योति की जान
महेंद्रगढ़ के कनीना क्षेत्र के गांव ककराला की रहने वाली ज्योति पीयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में पीएचडी कर रही थी। 28 जुलाई को सेक्टर-25 स्थित साउथ कैंपस में करंट लगने से उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद विद्यार्थियों ने लगातार दो दिन प्रदर्शन कर कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। ज्योति की मौत के अगले दिन पीयू की तत्कालीन कुलपति प्रो. रेनु विग के कार्यकाल का आखिरी दिन था। इसके बाद से यूनिवर्सिटी में नियमित कुलपति नहीं है। फिलहाल प्रो. मीनाक्षी गोयल कार्यकारी तौर पर कुलपति का कार्यभार संभाल रही हैं।
कोट.....
ज्योति के परिवार से पूरे डॉक्यूमेंट ले लिए गए हैं। इसकी सप्ताह परिवार को उनकी ओर से 11 लाख रुपए मुआवजा अदा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इश्योरेंस के पैसे देने को लेकर प्रक्रिया चल रही है। -प्रो. वाई के रावल, डीएसडब्ल्यू पीयू