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Loksabha Election 2024: ओपीएस लागू होने के इंतजार में पंजाब के लाखों कर्मचारी, अभी तक धरातल पर नहीं उतरा वादा
Fri, 29 Mar 2024 01:49 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 29 Mar 2024 01:49 PM IST
सार
पुरानी पेंशन स्कीम के लागू होने से 1.77 लाख के करीब कर्मचारियों को फायदा होना है, क्योंकि वर्तमान में ये कर्मी नेशनल पेंशन योजना के तहत आते हैं। इसके अलावा 1.08 लाख के करीब कर्मचारी पहले से पुरानी पेंशन स्कीम के दायरे में आते है। इस तरह करीब तीन लाख पेंशनभोगी इसके अधीन आते हैं।
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पुरानी पेंशन योजना
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पंजाब के लाखों कर्मचारी पेंशन की टेंशन में हैं। इस समय कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन स्कीम (ओल्ड) को लागू करने की है, जिसके लिए कर्मचारी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
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आप सरकार ने प्रदेश में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की घोषणा की थी। स्कीम को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी के बाद वर्ष 2022 में अधिसूचना भी जारी कर दी गई थी, लेकिन बावजूद इसके अभी तक कर्मचारी इस स्कीम के लागू होने के इंतजार में हैं। कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। यही कारण है कि वह लोकसभा चुनाव में अब पोस्टर मुहिम भी चलाने जा रहे हैं।
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स्कीम की घोषणा के साथ ही पेंशन कोष बनाने का फैसला लिया गया था, ताकि भविष्य में कर्मचारियों को योजना के तहत पेंशन प्रदान की जा सके। साथ ही शुरुआत में प्रति वर्ष 1 हजार करोड़ रुपये योगदान राशि रखने का भी निर्णय लिया गया। एनपीएस के तहत मौजूदा रिजर्व फंड को भारत सरकार के पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी से वापस लाने के लिए भी प्रयास शुरू किए जाने थे। कर्मचारी संगठनों के अनुसार इन सभी मसलों को लेकर वह सरकार के साथ कई बैठकें कर चुके हैं, ताकि जल्द ही योजना को लागू किया जा सके, लेकिन लगभग डेढ़ साल बाद भी सरकार योजना पर आगे नहीं बढ़ पाई है।
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चुनाव में मुद्दा बनाएंगे कर्मचारी संगठन
लोकसभा चुनाव के चलते चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है, इसलिए चुनाव में भी ये मुद्दा अहम रहने वाला है। सभी पार्टियां पुरानी पेंशन स्कीम के मुद्दे को भुनाने का प्रयास करेगी। साथ ही कर्मचारी संगठन भी चुनाव में सभी पार्टियों के सामने अपना मुद्दा रखने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि प्राथमिकता के आधार पर इस योजना को लागू करने के प्रयास हों। पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन के चेयरमैन सुखचैन सिंह खैहरा ने कहा कि पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर कई राज्यों ने वादा किया था, जिसे वहां की सरकारों ने पूरा कर दिया है। पंजाब सरकार की तरफ से अभी तक इस पर फैसला नहीं लिया गया, जिसके चलते कर्मचारियों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। उनकी यही अपील है कि इस मामले को और ज्यादा न लटकाया जाए और जल्द ही कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जाए।
कर्मचारी बोले- जल्द ही पोस्टर मुहिम शुरू करेंगे
पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष कमेटी पंजाब के कन्वीनर जसवीर सिंह तलवाड़ा ने कहा कि ओपीएस को लेकर 18 नंवबर, 2022 को मंजूरी दी गई थी और साथ ही सरकार ने आधी-अधूरी अधिसूचना भी जारी की था। गुजरात और हिमाचल में चुनाव के दौरान ये अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन अभी तक 1.77 लाख कर्मियों को पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ नहीं मिला है। न तो एनपीएस की कटौती होना बंद हुआ है और न ही जीपीएफ के खाते खोले गए।
इससे साफ है कि सरकार की पुरानी पेंशन स्कीम के प्रति नीयत ठीक नहीं है। हिमाचल प्रदेश में छह माह के अंदर ही प्रक्रिया पूरी करके इसे लागू कर दिया गया है, जबकि पंजाब में अभी तक ये लटकी हुई है। उन्होंने कहा कि इसी के चलते कर्मचारी जल्द ही पोस्टर मुहिम शुरू करने जा रहे हैं। 2004 के बाद भर्ती सभी कर्मी अपने घरों के बाहर ये पोस्टर लगाएंगे कि उनके द्वारा चुने हुए विधायकों, सांसदों को तो पेंशन लग गई है, जबकि उनको अभी तक इसका लाभ नहीं मिला है।
एनपीएस फंड वापस लाने का प्रयास हो
पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन के प्रधान सुशील कुमार ने कहा कि सरकार ने ओपीएस को लेकर सिर्फ लेटर जारी कर दिया था, जबकि विस्तृत अधिसूचना जारी नहीं की गई, जिसमें सभी तरह की नियम और शर्तें शामिल होनी तीं। यही कारण है कि अभी तक ओपीएस लागू नहीं हो पाई है। उनकी मांग हैं कि इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी की जाए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। साथ ही पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी से एनपीएस का फंड वापस लाने के लिए भी प्रयास होने चाहिए, जो 18 हजार करोड़ रुपये से ऊपर है।
विधानसभा में भी गूंजा था मुद्दा
ओपीएस का मुद्दा पिछले वर्ष पंजाब विधानसभा में भी गूंजा था। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आप सरकार से राज्य के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की समय सीमा बताने की मांग की थी। दो दिवसीय सत्र के अंतिम दिन शून्यकाल के दौरान उन्होंने यह मुद्दा उठाया था।
जल्द की जाए बहाली की घोषणा
हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस सरकारों ने पहले ही ओपीएस लागू कर दिया है। आप सरकार ने पिछले साल ओपीएस की बहाली की घोषणा की थी, लेकिन यह अभी तक नहीं की गई। इसे जल्द किया जाना चाहिए। - प्रताप सिंह बाजवा, नेता विपक्ष
अधिसूचना के बाद कुछ नहीं हुआ
पंजाब के कर्मचारी पुरानी पेंशन स्कीम के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की तरफ से अधिसूचना जारी की गई, लेकिन उसके बाद कुछ भी नहीं हुआ। अभी भी पुरानी पेंशन स्कीम का मामला लंबित पड़ा है, जबकि हिमाचल सरकार की तरफ से इसे लागू भी किया जा चुका है। - अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस।
एनपीएस की राशि लौटाने में गंभीर नहीं
आप सरकार ओपीएस को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने इसके लिए कमेटी भी गठित हुई है, जिसने राजस्थान, छतिसगढ़ और हिमाचल प्रदेश के ओपीएस मॉडल की स्टडी की है और जल्द ही पुरानी पेंशन स्कीम के सबसे बेहतर मॉडल लागू किया जाएगा। केंद्र सरकार एनपीएस के 18 हजार करोड़ रुपये वापस करने के लिए गंभीरता नहीं दिखा रही है। - मलविंदर सिंह कंग, मुख्य प्रवक्ता, आप पंजाब।