करनाल: बढ़ रहे किसानों के मददगार, कर्मचारियों व वकीलों का भी मिला साथ
हरियाणा के करनाल में किसान लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। अब किसानों के समर्थन में अन्य संगठनों के लोग आने लगे हैं। कर्मचारी संगठनों के बाद किसानों को वकीलों का भी साथ मिला है। शुक्रवार को करनाल में वकीलों ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
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किसानों को अब कर्मचारियों का भी साथ मिलने लगा है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों ने लघु सचिवालय के सामने धरनास्थल पर पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। साथ ही किसानों की मांगों को जायज बताया। वहीं उत्तर प्रदेश और पंजाब से भी कई संगठन समर्थन में पहुंचे। किसानों के समर्थन में वकील भी उतर आए हैं। बैनर लेकर वकीलों ने मार्च निकाला।
सर्व कर्मचारी संघ के कर्मचारी गुरुवार को राजीव गांधी विद्युत सदन में एकत्र हुए और यहां किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन किया। एसकेएस के जिला प्रधान मलकीत सिंह व कार्यकारी सचिव सुशील गुर्जर की अगुवाई में कर्मचारी सरकार के खिलाफ और किसानों के समर्थन में नारे लगाते हुए लघु सचिवालय के सामने धरनास्थल पर पहुंचे।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अन्नदाताओं की मांगें जायज हैं। सरकार को हठधर्मिता छोड़कर किसानों की बात सुननी चाहिए। नपा कर्मचारी संघ की प्रदेश सचिव शारदा, जिला प्रधान वीरभान बिड़लान, जिला सचिव इंद्रजीत चनालिया, करनाल के प्रधान राम सिंह ढिल्लौड़ ने कहा कि नौ महीने से किसान दिल्ली की सरहदों पर डटे हैं। तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग की जा रही है लेकिन सरकार का रवैया किसानों के प्रति ठीक नहीं है।
हरियाणा में कई बार किसानों पर बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया जा चुका है। मजबूर होकर किसानों को करनाल में जिला सचिवालय का घेराव करना पड़ा। लाठीचार्ज का आदेश देने वाले तत्कालीन एसडीएम के खिलाफ केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। शहीद किसान के परिवार को मुआवजा मिले और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
धरनास्थल पर पहुंचे विभिन्न संगठनों से किसान
भारतीय किसान यूनियन (अन्नदाता) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरमुख सिंह विर्क, भाकियू (अन्नदाता) अमृतसर के प्रधान जसकरन सिंह और हरियाणा स्टेट शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के प्रधान हरजीत सिंह विर्क भी दर्जनों किसानों की भीड़ के साथ करनाल पहुंचे।
इन नेताओं का काफिला तो वाहनों से आया था लेकिन करनाल में एनडीआरआई के सामने अग्रसेन चौक पर सभी किसान सड़क पर उतर गए और यहां से नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय के सामने मुख्य धरनास्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया और धरने पर बैठ गए। गुरमुख सिंह विर्क ने बताया कि उनके संगठन के सैकड़ों किसान धरने में शामिल रहेंगे।
मुख्य धरनास्थल के पास सजीं छोटी-छोटी पंचायतें
लघु सचिवालय के सामने लगे संयुक्त किसान मोर्चा के अनिश्चितकालीन धरने में किसानों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। सभी किसान नेताओं को संबोधन का मौका मिलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में मुख्य धरनास्थल के पास ही छोटी-छोटी पंचायतें सज गई हैं, जहां दूरदराज से आने वाले किसान बैठें हैं, इनके बीच हुक्का आदि का भी इंतजाम हैं।
लघु सचिवालय के सामने मुख्य धरनास्थल का दायरा गुरुवार को और बढ़ा दिया गया है। मुख्य पंडाल के पास ही कांप्लेक्स की ओर एक पंडाल और लगा दिया गया है। यह पंडाल भी गुरुवार को फुल हो गया। धरनास्थल पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि जिस क्षेत्र से जितने लोग आ रहे हैं, वह मुख्य धरनास्थल के निकट ही एक साथ बैठते हैं। वहां एक नई छोटी पंचायत लग जाती है।
जेपी शेखपुरा के संयोजन में भी मुख्य धरनास्थल के निकट एक छोटी पंचायत लगी तो वहां भी कई किसान नेताओं ने संबोधित किया। इसी तरह की छोटी-छोटी पंचायतें कई जगह दिखीं, जहां कुछ में किसान संबोधित करते नजर आए तो कुछ में नारेबाजी करते रहे। इन्हीं में हुक्का भी गुड़गुड़ाते रहे। इन पंचायतों में महिलाएं व बच्चे भी पहुंच रहे हैं। सभी किसान मुख्यत: एसडीएम आयुष सिन्हा पर केस दर्ज करके सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, साथ ही मृतक किसान सुशील काजल के आश्रितों को 25 लाख का मुआवजा और सरकारी नौकरी, घायलों के लिए दो-दो लाख रुपये के मुआवजे की भी मांग की जा रही है।