फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Effect of Delhi Politics on Haryana Politics

विस चुनावः जिसकी दिल्ली, उसका हरियाणा

Mon, 01 Sep 2014 08:27 AM IST
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 01 Sep 2014 08:27 AM IST
विज्ञापन
Effect of Delhi Politics on Haryana Politics

हरियाणा विधानसभा की चुनाव जंग का इतिहास गवाह है कि दिल्ली की सियासी हवा सबसे पहले यहीं पहुंचती रही है। अब तक के चुनाव नतीजों के ट्रेंड बताते हैं कि केंद्र में जिस भी पार्टी की सरकार बनी है। हरियाणा में वही अथवा उसके पाले में रहने वाली पार्टी के नेता की ही प्रदेश के सिंहासन पर ताजपोशी होती रही है।

विज्ञापन


इसलिए हरियाणा में आम तौर पर कहा जाता रहा है कि जिसकी दिल्ली उसका हरियाणा। चुनाव मैदान में भाजपा इसी बात को पुरजोर तरीके से प्रचारित कर रही है, जबकि पिछले चुनाव में कमोबेश यही बात कांग्रेस बोलती थी।
विज्ञापन


भाजपा नेता कैप्टन अभिमन्यु कहते हैं कि हरियाणा के लोग हमेशा से ही दिल्ली के साथ रहे हैं। केंद्र में मोदी सरकार बन चुकी है, और अब हरियाणा में भी भाजपा की ही सरकार बनेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

यही कहता है चुनावी ट्रेंड

Effect of Delhi Politics on Haryana Politics

पंजाब से अलग होने के बाद एक नवंबर 1966 को हरियाणा का गठन हुआ। केंद्र में तब कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी। हरियाणा में 1967 में पहली सरकार कांग्रेस की बनी और मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा बने।

कांग्रेस सरकार मात्र 143 दिन ही चल पाई और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से विशाल हरियाणा पार्टी के राव बीरेंद्र सिंह ने सत्ता संभाल ली। हालांकि, राव सरकार भी 224 दिन ही चल पाई और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।

इसके बाद 1968 के चुनाव में कांग्रेस सत्ता में लौटी और बंसीलाल मुख्यमंत्री बने। केंद्र में तब कांग्रेस की ही सरकार थी। लगातार 1977 तक यही सिलसिला चला।

इमरजेंसी के बाद भी केंद्र का साथ रहा हरियाणा

Effect of Delhi Politics on Haryana Politics

इमरजेंसी के बाद देशभर में आए बदलाव का गवाह हरियाणा बना और केंद्र की तरह यहां भी जनता पार्टी ने परचम फहरा दिया। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई बने और हरियाणा में चौधरी देवीलाल ने सत्ता संभाली।

हालांकि, उन्हें बीच में ही मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी और भजनलाल मुख्यमंत्री बन गए। जनता पार्टी में टूट के बाद अंतत: 1980 में लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी सत्ता में लौट आईं।

हरियाणा में तब जनता पार्टी की सरकार के मुखिया भजनलाल थे। वे पूरी जनता पार्टी सरकार का दलबदल करके इंदिरा गांधी की शरण में लौट गए। इस तरह बिना चुनाव के ही हरियाणा में कांग्रेस सरकार बन गई।

इसके बाद 1989 में केंद्र में जनता दल नेता वीपी सिंह की सरकार बनी। हालांकि, हरियाणा में दो साल पहले ही चौधरी देवीलाल के नेतृत्व में जनता दल सरकार बन चुकी थी।

केंद्र में दिन फिरते ही हरियाणा में लौटी कांग्रेस

Effect of Delhi Politics on Haryana Politics

वीपी सिंह और फिर चंद्रशेखर की सरकार गिर जाने के बाद 1991 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में कांग्रेस लौटी और पीवी नरसिंहा राव ने सत्ता संभाली। इधर, हरियाणा भी कांग्रेस की झोली में आ गया और बंसीलाल मुख्यमंत्री बने।

इसके बाद 1996 में केंद्र में 13 दिन की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार भी रही। उनके बाद जनता दल नेतृत्व की सरकारें रहीं। यानी केंद्र में गैर कांग्रेस सरकारें थीं, तो हरियाणा की कमान हरियाणा विकास पार्टी (हविका) के बैनर तले बंसीलाल के हाथ आ गई।

तब भाजपा और हविका का गठबंधन था। बाद में भाजपा ने साढ़े तीन साल बाद हविका को मंझधार में छोड़ दिया और इनेलो को समर्थन देकर ओम प्रकाश चौटाला की ताजपोशी कर दी।

अटल सरकार बनने पर भाजपा ने चखा सत्ता का स्वाद

Effect of Delhi Politics on Haryana Politics

1998 चुनाव में केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए सत्ता में आ गया। दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने। हरियाणा में 2000 में चुनाव हुए। तब इनेलो-भाजपा गठबंधन सत्ता में आ गया।

इसके बाद 2004 और 2009 के चुनाव में केंद्र में लगातार दो बार कांग्रेस की ही सरकार बनी, हरियाणा में भी 2005 और 2009 में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की और हुड्डा के हाथ कमान रही। इसलिए भाजपा इसी ट्रेंड को देखकर जनता से कह रही है कि इस बार हरियाणा में कमल खिलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed