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Chandigarh: मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा विभाग ने नहीं दीं किताबें, प्रशिक्षण केंद्र भी बंद किए

Fri, 19 Jul 2024 02:49 PM IST
निवेदिता वर्मा प्रियंका ठाकुर, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 19 Jul 2024 02:49 PM IST
सार

शिक्षा विभाग का कहना है कि बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत औपचारिक शिक्षा देना जरूरी है। इसके लिए उन्हें स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए। ऐसे में वह अभिभावकों से अपील कर रहे हैं कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजें।

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Education department not provided NCERT books to children studying in madrasas of Chandigarh
NCERT - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

चंडीगढ़ के मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के लिए इस साल शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी की किताबें नहीं दी हैं। अब तक हर साल यहां पढ़ने वाले आठवीं तक के बच्चों को किताबें मिलती थीं। इन मदरसों में चलने वाले विशेष प्रशिक्षण केंद्र (एसटीसी) भी बंद कर दिए गए हैं। इससे जहां मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य अधर में है वहीं, मदरसा संचालकों की भी चिंताएं बढ़ गईं हैं।

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चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीसीपीसीआर) भी मदरसों को नोटिस पर नोटिस भेज रहा है। आयोग ने जनवरी में मदरसों का निरीक्षण किया था, जिसमें कई खामियां मिलीं थीं। इस संबंध में मदरसा संचालकों को नोटिस जारी किए गए थे। बाद में सीसीपीसीआर के हस्तक्षेप पर शिक्षा विभाग ने दस से अधिक वर्षों से मदरसों में चल रहे विशेष प्रशिक्षण केंद्र बंद कर दिए।

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चंडीगढ़ में हैं तीन मदरसे

शहर में प्रमुख रूप से तीन मदरसे हैं। बुड़ैल के मदरसा अरबिया फैजुल इस्लाम में 235, मनीमाजरा के मदरसा एजाहुल उलुम मुजद्दीदी में 114 और गोविंदपुर के मदरसा शिराज-उल-उलुम में 43 बच्चे पढ़ रहे हैं। सीसीपीसीआर ने इन मदरसों का निरीक्षण कर शौचालय साफ न होने, सीसीटीवी कैमरे कम होने और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित न होने आदि को लेकर नोटिस जारी किए हैं। साथ ही उनसे यह जानकारी भी मांगी है कि इन मदरसों में कितने गैर मुस्लिम बच्चे पढ़ रहे हैं।

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मामले में सीसीपीसीआर की अध्यक्ष शिप्रा बंसल ने अपना औपचारिक पक्ष देने से मना करते हुए बताया कि मदरसों में बच्चों को औपचारिक शिक्षा नहीं मिल रही है, इसलिए उन्हें स्कूल भेजाना जरूरी है। वह मजहबी शिक्षा के खिलाफ नहीं हैं लेकिन मदरसों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत हर बच्चा शिक्षा पाने का हकदार है।

बुड़ैल के मदरसा संचालक शमशेर अली ने कहा कि उनके यहां बच्चों को आठवीं तक अंग्रेजी मीडियम में वही पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रहीं हैं। बस फर्क इतना है कि वह साथ में कुरान शरीफ और उर्दू की भी तालीम देते हैं। उनके मदरसे को पंजीकृत सोसासटी चलाती है जो रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकृत है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मान्यता के लिए आवेदन भी कर रखा है। आठ अक्तूबर 2021 को विभाग की टीम ने मदरसे का दौरा भी किया था। उन्होंने बताया शिक्षा विभाग ने वर्ष 2013 में मदरसे से आठवीं तक की पढ़ाई को मान्यता दे दी थी। नौवीं में कोई भी स्कूल मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे को दाखिला दे सकता है।

सीसीपीसीआर पर लगाया परेशान करने का आरोप

सीसीपीसीआर ने 08 जनवरी 2024 को मनीमाजरा स्थित एजाहुल-उलुम मुजद्दीदी मदरसे का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में शौचालय के पर्याप्त मरम्मत न होने, मदरसे की बिल्डिंग के सुरक्षित न होने, सीसीटीवी कैमरे कम होने समेम 9 खामियों पर मदरसा संचालक को सात मार्च 2024 को नोटिस जारी किया गया। खामियों में बच्चों के इंटर स्कूल गतिविधियों में शामिल न होने का जिक्र भी किया गया था।

मदरसा संचालक मौलवी एम इमरान मुजद्दीदी ने 16 मार्च को डाक से नोटिस का जवाब भेज दिया। इसमें बताई गई खामियों पर लिए एक्शन की जानकारी भी दी। अदालत के स्टे के चलते शौचालय की मरम्मत न कर पाने, सीसीटीवी की मरम्मत कराने और नए कैमरे लगवाने, बच्चों को आगे से अधिक इंटर स्कूल गतिविधियों में शामिल करने समेत सभी नौ बिंदुओं का जवाब दिया लेकिन सीसीपीसीआर ने 16 मार्च को फिर से खामियों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगा और 24 अप्रैल तक जवाब न मिलने पर एक बार फिर नोटिस जारी कर दिया। 30 अप्रैल को मदरसा संचालक ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि वह 16 मार्च को उन्हें सारी जानकारी दे चुके हैं और एक बार फिर सभी दस्तावेज भेज रहे हैं। मदरसा संचालक ने इसे परेशान करने की तरकीब बताते हुए कहा कि जब वह एक बार सब चीजों का जवाब दे चुके हैं तो बार-बार उनसे वही चीजें क्यों पूछी जा रहीं हैं।

संविधान का आर्टिकल-30 देता है मदरसा चलाने का हक

संविधान का आर्टिकल 30 सभी अल्पसंख्यकों को (चाहे वह धर्म या भाषा पर आधारित हों) अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और संचालित करने का अधिकार देता है। राज्य, शैक्षणिक संस्थानों को सहायता प्रदान करते समय किसी भी शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ इस आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता कि यह किसी अल्पसंख्यक के प्रबंधन के अधीन है। मदरसे को साेसाइटियां चला रही हैं जो सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत हैं और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग से अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा प्राप्त हैं।

शिक्षा विभाग ने अब तक हमें बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने को लेकर कोई नोटिस जारी नहीं किया है और न ही कोई जानकारी दी है लेकिन सीसीपीसीआर इसका दबाव बना रहा है। - शमशेर अली, मदरसा अरबिया फैजुल इस्लाम प्रधानाचार्य



विशेष प्रशिक्षण केंद्रों को समेकन कर हम उन्हें सरकारी स्कूलों में ही खोल रहे हैं इसलिए मदरसे से उन्हें बंद कर दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत बच्चे औपचारिक शिक्षा प्राप्त करें इसलिए मदरसों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों से अपील कर रहे हैं कि वह उन्हें सरकारी स्कूल में भर्ती करवाएं। मदरसों को इसे लेकर कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। - हरसुहिंदर पाल सिंह बराड़, स्कूल शिक्षा निदेशक, चंडीगढ़

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