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देश सेवा का सपना आदेश कुमार इस महामारी में कर रहे साकार
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चंडीगढ़। जीएमएसएच- 16 के कोविड वार्ड में 13 महीने से लगातार ड्यूटी कर रहे सफाई कर्मचारी आदेश कुमार इसे अपना सौभाग्य मानते हैं। भगवान का आशीर्वाद भी उन पर बना है। 13 महीने के दौरान दो बार उनमें संक्रमण के लक्षण दिखे, लेकिन दोनों बार उनकी टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई। आदेश में सेवा का जज्बा कूट-कूटकर भरा है। वहां मरीजों की देखभाल तो करते ही हैं, अगर कोई मरीज खुद बैठ नहीं पाता तो उसे सहारा देकर बैठाते हैं। इसके अलावा जो मरीज खुद खाना नहीं खा पाता, उसे अपने हाथों से निवाला खिलाते हैं।
उनका कहना है कि महामारी के दौर में मरीजों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए बेहद ईमानदारी और लगन से कार्य कर रहे हैं। आदेश ने बताया कि बचपन से उनका सपना सेना में जाने का था, लेकिन लंबाई कम होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका। घर की जिम्मेदारियां संभालते हुए अब जीएमएसएच- 16 में नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों की सेवा कर उन्हें खुद फक्र महसूस हो रहा है। आदेश अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।
घर में सबसे बड़े.. माता-पिता और भाई-बहनों की उठा रहे जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि वह घर में सबसे बड़े हैं। उन पर माता-पिता और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में वह नौकरी छोड़कर घर में नहीं बैठ सकते। आदेश का कहना है कि महामारी के इस दौर में जब लोग अपनों का साथ छोड़कर चले जा रहे हैं। उस स्थिति में उन जैसे कर्मचारी उन मरीजों की अपनों की तरह सेवा कर रहे हैं। इसके लिए वे प्रत्येक मरीज के साथ मित्रवत व्यवहार करते हैं। खुद को मजबूती और संक्रमण से बचाव के लिए तैयार करने में आदेश का खुशमिजाज अंदाज और अपनों का प्यार बेहद मददगार साबित हो रहा है।
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उनका कहना है कि महामारी के दौर में मरीजों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए बेहद ईमानदारी और लगन से कार्य कर रहे हैं। आदेश ने बताया कि बचपन से उनका सपना सेना में जाने का था, लेकिन लंबाई कम होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका। घर की जिम्मेदारियां संभालते हुए अब जीएमएसएच- 16 में नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों की सेवा कर उन्हें खुद फक्र महसूस हो रहा है। आदेश अस्पताल के मेल सर्जिकल वार्ड में ड्यूटी कर रहे हैं।
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घर में सबसे बड़े.. माता-पिता और भाई-बहनों की उठा रहे जिम्मेदारी
उन्होंने बताया कि वह घर में सबसे बड़े हैं। उन पर माता-पिता और छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में वह नौकरी छोड़कर घर में नहीं बैठ सकते। आदेश का कहना है कि महामारी के इस दौर में जब लोग अपनों का साथ छोड़कर चले जा रहे हैं। उस स्थिति में उन जैसे कर्मचारी उन मरीजों की अपनों की तरह सेवा कर रहे हैं। इसके लिए वे प्रत्येक मरीज के साथ मित्रवत व्यवहार करते हैं। खुद को मजबूती और संक्रमण से बचाव के लिए तैयार करने में आदेश का खुशमिजाज अंदाज और अपनों का प्यार बेहद मददगार साबित हो रहा है।
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