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डॉ. पाली भूपिंदर ने पीयू को भेजा पत्र, कहा, किस आधार पर बनाई कमेटी
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूसोल विभाग में तैनात पंजाबी के शिक्षक डॉ. पाली भूपिंदर को पीयू की स्टैंडिंग कमेटी ने नोटिस भेजकर पूछा है कि वह साबित करें कि उनकी पदोन्नति सिख होने के कारण नहीं हुई। साथ ही इस प्रकरण को मीडिया के समक्ष लाने से लेकर कई सवालों के जवाब देने को कहा है। पत्र मिलने के बाद डॉ. पाली भूपिंदर ने पीयू को पत्र भेजा है। कहा है कि पहले यह बताएं कि कमेटी किस आधार से और क्यों बनाई गई। इसके अलावा कई सवाल पूछे हैं। यदि पीयू ने उन्हें शुक्रवार तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो वह शनिवार को कोई बड़ा निर्णय लेने को मजबूर होंगे। वहीं दूसरी ओर एसजीपीसी ने भी इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है और डॉ. पाली भूपिंदर से पूरा प्रकरण जाना है। उनका कहना है कि पीयू से भी जवाब मांगा गया है। ऐसे में पीयू के जिम्मेदार कहीं न कहीं फंस रहे हैं।
इस तरह आगे बढ़ा मामला
पंजाब के शिक्षक डॉ. पाली भूपिंदर ने आरोप लगाया था कि वह सिख हैं, इसलिए उनकी पदोन्नति तीन साल में नहीं हो पाई। आज तक उन्हें पदोन्नति न होने के कारण नहीं बताए गए जबकि कई बार उन्होंने ई-मेल किए और आरटीआई के तहत जवाब मांगा। सूत्रों का कहना है कि जब मामला सार्वजनिक हो गया तो पीयू पर एसजीपीसी का भी दबाव आने लगा और अधिकारी भी कहीं न कहीं फंस रहे थे। इसके बाद पीयू ने स्टैंडिंग कमेटी बना दी, जिसके कुछ नामों को लेकर डॉ. पाली भूपिंदर को आपत्ति थी।
डॉ. भूपिंदर बोले- पीयू प्रशासन साबित करे, मेरे अभिलेख अपूर्ण
डॉ. पाली भूपिंदर का कहना है कि पीयू को इस तरह से कमेटी बनाने और उनका स्पष्टीकरण लेने का अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि पीयू ने यह कहा है कि उनके प्रमाण पत्र पूरे नहीं थे। उन्होंने पीयू प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि साबित करें कि उनके प्रमाण पत्र पूरे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी धरातल पर आकर कार्य नहीं कर रहे हैं। केवल हवा में बात हो रही है। एसजीपीसी की ओर से उनके पास फोन आया था और पूरा प्रकरण जाना है। उनके साथ हुए भेदभाव को उन्होंने बताया है।
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इस तरह आगे बढ़ा मामला
पंजाब के शिक्षक डॉ. पाली भूपिंदर ने आरोप लगाया था कि वह सिख हैं, इसलिए उनकी पदोन्नति तीन साल में नहीं हो पाई। आज तक उन्हें पदोन्नति न होने के कारण नहीं बताए गए जबकि कई बार उन्होंने ई-मेल किए और आरटीआई के तहत जवाब मांगा। सूत्रों का कहना है कि जब मामला सार्वजनिक हो गया तो पीयू पर एसजीपीसी का भी दबाव आने लगा और अधिकारी भी कहीं न कहीं फंस रहे थे। इसके बाद पीयू ने स्टैंडिंग कमेटी बना दी, जिसके कुछ नामों को लेकर डॉ. पाली भूपिंदर को आपत्ति थी।
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डॉ. भूपिंदर बोले- पीयू प्रशासन साबित करे, मेरे अभिलेख अपूर्ण
डॉ. पाली भूपिंदर का कहना है कि पीयू को इस तरह से कमेटी बनाने और उनका स्पष्टीकरण लेने का अधिकार नहीं है। उनका कहना है कि पीयू ने यह कहा है कि उनके प्रमाण पत्र पूरे नहीं थे। उन्होंने पीयू प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि साबित करें कि उनके प्रमाण पत्र पूरे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी धरातल पर आकर कार्य नहीं कर रहे हैं। केवल हवा में बात हो रही है। एसजीपीसी की ओर से उनके पास फोन आया था और पूरा प्रकरण जाना है। उनके साथ हुए भेदभाव को उन्होंने बताया है।
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